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Sambhal News: भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का मार्ग दिखाती है श्रीमद्भागवत कथा
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चंदौसी। गीता सत्संग भवन में शुक्रवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ धार्मिक उल्लास और भक्तिमय वातावरण के बीच हुआ। कथा शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा गीता सत्संग भवन से शुरू होकर बाजारों और चौराहों से होते हुए वापस कथा स्थल पहुंची। जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से कलश स्थापना की गई और श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ।
कथा के पहले दिन कथा वाचक शिवशंकर भारद्वाज ने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कलियुग में श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का मार्ग दिखाती है। कथा श्रवण से व्यक्ति के मन के विकार दूर होते हैं और उसे आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति तो कई साधनों से हो सकती है, लेकिन भगवत प्राप्ति का मार्ग सत्संग और कथा श्रवण से ही प्रशस्त होता है। उन्होंने प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब ऋषियों ने ब्रह्माजी से कलियुग के प्रभाव से बचने का उपाय पूछा, तब ब्रह्माजी ने सत्संग को ही सबसे सरल और प्रभावी उपाय बताया था। इस अवसर पर विनय अग्रवाल, रानी अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, अनिल गोयल, गोगी, रजनीश, मुन्ना, बंटू शर्मा, रामचंद्र आदि मौजूद रहे।
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कथा के पहले दिन कथा वाचक शिवशंकर भारद्वाज ने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कलियुग में श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का मार्ग दिखाती है। कथा श्रवण से व्यक्ति के मन के विकार दूर होते हैं और उसे आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति तो कई साधनों से हो सकती है, लेकिन भगवत प्राप्ति का मार्ग सत्संग और कथा श्रवण से ही प्रशस्त होता है। उन्होंने प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब ऋषियों ने ब्रह्माजी से कलियुग के प्रभाव से बचने का उपाय पूछा, तब ब्रह्माजी ने सत्संग को ही सबसे सरल और प्रभावी उपाय बताया था। इस अवसर पर विनय अग्रवाल, रानी अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, अनिल गोयल, गोगी, रजनीश, मुन्ना, बंटू शर्मा, रामचंद्र आदि मौजूद रहे।
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