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Sambhal News: महज तीन फीट चौड़ी गली में था स्कूल, बेसमेंट में लगतीं थीं क्लास
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संभल। लखनऊ प्रकरण के बाद कोचिंग और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा का सवाल बड़ा मुद्दा बनने पर शहर के सनातन पब्लिक स्कूल को प्रबंधन ने अचानक बंद करने का निर्णय ले लिया। सोमवार से यहां क्लास नहीं लगेंगी। मोहल्ला कोटपूर्वी में वर्ष 1992 से संचालित इस अंग्रेजी माध्यम स्कूल से जुड़े अभिभावकों ने यहां पढ़ने वालों की संख्या 1000 बताई है। हालांकि प्रधानाध्यापक का कहना है कि फिलहाल यहां पढ़ने वाले बच्चों की संख्या छह सौ है।
बड़ा सवाल यह है कि अचानक स्कूल बंद होने से इसमें पढ़ रहे बच्चों का क्या होगा। अप्रैल से शुरू हो चुके सत्र में बच्चों को किसी और स्कूल में दाखिला कैसे मिलेगा। उनके उस मोटे खर्च का क्या होगा, जो बच्चों के प्रवेश के समय फीस, किताब-कॉपी, यूनिफॉर्म आदि पर किया गया था।
अभिभावकों ने बताया कि शनिवार रात 9.51 बजे सनातन पब्लिक स्कूल की ओर से उनके फोन पर मैसेज आया कि शासन द्वारा बेसमेंट में कक्षाओं के संचालन पर प्रतिबंध लगा देने से अब इस स्कूल में शिक्षण कार्य संभव नहीं है। सोमवार से स्कूल संचालित नहीं होगा। प्रबंधन ने अभिभावकों को शांत रखने के लिए फिलहाल जुलाई या उससे आगे के महीनों की जमा फीस वापस करने का भरोसा दिया है। स्कूल बंदी का संदेश मिलने के बाद से तमाम अभिभावकों की नींद उड़ गई। उन्होंने आनन-फानन आपस में फोन पर संपर्क किया, जिसमें प्रमुख सवाल यह था कि अगर स्कूल प्रबंधन कुछ फीस वापस भी कर दे तो क्या इससे उनके बच्चों का भविष्य बच जाएगा। जुलाई में उनके बच्चों का किसी और स्कूल में दाखिला कैसे संभव है। इसके अलावा यहां पढ़ाई के लिए बच्चों की यूनिफॉर्म, किताब-कॉपियों आदि पर किए जा चुके खर्च का हिसाब कौन देगा।
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इन सवालों पर स्कूल के प्रधानाध्यापक अर्पित अग्रवाल ने कहा कि बेसमेंट में कई कक्षाएं संचालित होती हैं। दमकल की ओर से इनकी एनओसी नहीं दी जा रही। इसलिए प्रबंधन ने स्कूल को बंद करने का निर्णय लिया है। जिन बच्चों की फीस जुलाई या उससे आगे के महीनों की जमा है, वह वापस कर दी जाएगी। उन्होंने स्कूल में कुल बच्चों की संख्या छह सौ बताई। स्कूल बंद होने पर इन बच्चों का एडमिशन कहां होगा, इसका जवाब प्रधानाध्यापक नहीं दे सके। अभिभावकों का आरोप है कि इस मामले में बीएसए से बात करने का प्रयास किया तो उनका फोन लगातार बंद मिला।
सन 92 से चल रहा स्कूल, जिम्मेदार रहे बेखबर, सालाना जांच बनी खानापूरी
- शिक्षा विभाग से लेकर किसी भी महकमे को नहीं अखरी सुरक्षा की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
संभल। लखनऊ प्रकरण भले ही अब हुआ है लेकिन शिक्षा विभाग में स्कूलों के लिए तय मानकों की जांच करने का प्रावधान है। जानकार बताते हैं कि साल में न्यूनतम एक बार जांच जरूरी है। यही नहीं, स्कूल में सुरक्षा व अन्य मानकों को परखने के बाद ही मान्यता तथा अन्य जरूरी एनओसी मिलती है।
हैरानी है कि मोहल्ला कोटपूर्वी की जिस गली में सनातन पब्लिक स्कूल है, वह महज तीन फीट चौड़ी है। जहां तक दमकल या राहत संबंधी अन्य वाहन पहुंचना आसान नहीं है। सन 1992 से संचालित इस अंग्रेजी माध्यम स्कूल में नर्सरी से कक्षा आठ तक की कक्षाएं लगती हैं। इनमें से छोटे बच्चों की कक्षाएं (नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी आदि) बेसमेंट में हैं। बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा विभाग का इतना बड़ा नेटवर्क होने के बाद भी किसी अधिकारी या कर्मचारी ने स्कूल की हालत देखने, मुआयना करने की जहमत नहीं उठाई। कहा तो यह भी जा रहा है कि इस तरह के स्कूलों की जांच के नाम पर विभाग के लोग खानापूरी कर स्कूल संचालकों से अपने स्वार्थ पूरे करते हैं।
अब बच्चों के भविष्य का सवाल उठने पर खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि प्रभावित बच्चों को सरकारी परिषदीय स्कूल में प्राथमिकता पर दाखिला दिलाया जाएगा। यहां यह सवाल है कि जो अभिभावक मोटी फीस और अन्य बड़े खर्च उठाकर बच्चों को इंगलिश मीडियम की शिक्षा दिलाना चाह रहे हैं, क्या वे प्राइमरी स्कूलों में प्रवेश के लिए रजामंद होंगे।
यदि स्कूल बंद हो गया है तो बच्चों की पढ़ाई खराब नहीं होने दी जाएगी। सुविधा के अनुसार नजदीकी परिषदीय स्कूलों में बच्चों का प्रवेश कराया जाएगा।
- मुंशीलाल पटेल, खंड शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय), संभल
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हम अभियान चलाकर कोचिंग सेंटर, स्कूल और लाइब्रेरी के सुरक्षा मानक चेक कर रहे हैं। जहां फायर सेफ्टी नहीं होगी, वहां संचालन बंद कराया जाएगा। इसके लिए हमें निर्देश मिले हैं।
- सनद कुमार, अग्निशमन अधिकारी, संभल
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बड़ा सवाल यह है कि अचानक स्कूल बंद होने से इसमें पढ़ रहे बच्चों का क्या होगा। अप्रैल से शुरू हो चुके सत्र में बच्चों को किसी और स्कूल में दाखिला कैसे मिलेगा। उनके उस मोटे खर्च का क्या होगा, जो बच्चों के प्रवेश के समय फीस, किताब-कॉपी, यूनिफॉर्म आदि पर किया गया था।
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अभिभावकों ने बताया कि शनिवार रात 9.51 बजे सनातन पब्लिक स्कूल की ओर से उनके फोन पर मैसेज आया कि शासन द्वारा बेसमेंट में कक्षाओं के संचालन पर प्रतिबंध लगा देने से अब इस स्कूल में शिक्षण कार्य संभव नहीं है। सोमवार से स्कूल संचालित नहीं होगा। प्रबंधन ने अभिभावकों को शांत रखने के लिए फिलहाल जुलाई या उससे आगे के महीनों की जमा फीस वापस करने का भरोसा दिया है। स्कूल बंदी का संदेश मिलने के बाद से तमाम अभिभावकों की नींद उड़ गई। उन्होंने आनन-फानन आपस में फोन पर संपर्क किया, जिसमें प्रमुख सवाल यह था कि अगर स्कूल प्रबंधन कुछ फीस वापस भी कर दे तो क्या इससे उनके बच्चों का भविष्य बच जाएगा। जुलाई में उनके बच्चों का किसी और स्कूल में दाखिला कैसे संभव है। इसके अलावा यहां पढ़ाई के लिए बच्चों की यूनिफॉर्म, किताब-कॉपियों आदि पर किए जा चुके खर्च का हिसाब कौन देगा।
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इन सवालों पर स्कूल के प्रधानाध्यापक अर्पित अग्रवाल ने कहा कि बेसमेंट में कई कक्षाएं संचालित होती हैं। दमकल की ओर से इनकी एनओसी नहीं दी जा रही। इसलिए प्रबंधन ने स्कूल को बंद करने का निर्णय लिया है। जिन बच्चों की फीस जुलाई या उससे आगे के महीनों की जमा है, वह वापस कर दी जाएगी। उन्होंने स्कूल में कुल बच्चों की संख्या छह सौ बताई। स्कूल बंद होने पर इन बच्चों का एडमिशन कहां होगा, इसका जवाब प्रधानाध्यापक नहीं दे सके। अभिभावकों का आरोप है कि इस मामले में बीएसए से बात करने का प्रयास किया तो उनका फोन लगातार बंद मिला।
सन 92 से चल रहा स्कूल, जिम्मेदार रहे बेखबर, सालाना जांच बनी खानापूरी
- शिक्षा विभाग से लेकर किसी भी महकमे को नहीं अखरी सुरक्षा की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
संभल। लखनऊ प्रकरण भले ही अब हुआ है लेकिन शिक्षा विभाग में स्कूलों के लिए तय मानकों की जांच करने का प्रावधान है। जानकार बताते हैं कि साल में न्यूनतम एक बार जांच जरूरी है। यही नहीं, स्कूल में सुरक्षा व अन्य मानकों को परखने के बाद ही मान्यता तथा अन्य जरूरी एनओसी मिलती है।
हैरानी है कि मोहल्ला कोटपूर्वी की जिस गली में सनातन पब्लिक स्कूल है, वह महज तीन फीट चौड़ी है। जहां तक दमकल या राहत संबंधी अन्य वाहन पहुंचना आसान नहीं है। सन 1992 से संचालित इस अंग्रेजी माध्यम स्कूल में नर्सरी से कक्षा आठ तक की कक्षाएं लगती हैं। इनमें से छोटे बच्चों की कक्षाएं (नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी आदि) बेसमेंट में हैं। बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा विभाग का इतना बड़ा नेटवर्क होने के बाद भी किसी अधिकारी या कर्मचारी ने स्कूल की हालत देखने, मुआयना करने की जहमत नहीं उठाई। कहा तो यह भी जा रहा है कि इस तरह के स्कूलों की जांच के नाम पर विभाग के लोग खानापूरी कर स्कूल संचालकों से अपने स्वार्थ पूरे करते हैं।
अब बच्चों के भविष्य का सवाल उठने पर खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि प्रभावित बच्चों को सरकारी परिषदीय स्कूल में प्राथमिकता पर दाखिला दिलाया जाएगा। यहां यह सवाल है कि जो अभिभावक मोटी फीस और अन्य बड़े खर्च उठाकर बच्चों को इंगलिश मीडियम की शिक्षा दिलाना चाह रहे हैं, क्या वे प्राइमरी स्कूलों में प्रवेश के लिए रजामंद होंगे।
यदि स्कूल बंद हो गया है तो बच्चों की पढ़ाई खराब नहीं होने दी जाएगी। सुविधा के अनुसार नजदीकी परिषदीय स्कूलों में बच्चों का प्रवेश कराया जाएगा।
- मुंशीलाल पटेल, खंड शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय), संभल
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हम अभियान चलाकर कोचिंग सेंटर, स्कूल और लाइब्रेरी के सुरक्षा मानक चेक कर रहे हैं। जहां फायर सेफ्टी नहीं होगी, वहां संचालन बंद कराया जाएगा। इसके लिए हमें निर्देश मिले हैं।
- सनद कुमार, अग्निशमन अधिकारी, संभल
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