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Sambhal News: मंडी समिति का चबूतरा खाली कराकर चारो ओर होगी तारबंदी

Thu, 02 Oct 2025 01:38 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Thu, 02 Oct 2025 01:38 AM IST
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The Mandi Samiti platform will be vacated and fencing will be done all around it.
संभल। मंडी समिति में कब्जा किए गए चबूतरे को मंडी समिति प्रशासन ने निजी आढ़तियों से खाली कराने का निर्णय लिया है। चबूतरे को खाली कराकर चारों ओर से तारबंदी कराई जाएगी, ताकि कोई आढ़ती दोबारा कब्जा न कर सके। यह प्रक्रिया बृहस्पतिवार से शुरू करा दी जाएगी।
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खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 3 अक्तूबर से धान खरीद के लिए क्रय केंद्रों का संचालन शुरू होना है। संभल मंडी समिति में भी क्रय केंद्र लगाए जाने हैं लेकिन जिस टीनशेड के नीचे चबूतरे पर क्रय केंद्र लगने हैं उस पर आढ़तियों का धान का स्टॉक रखा हुआ है। सामने की तरफ भी धान की बोरियां रखी हैं। ऐसे हालात पहले भी दिखे हैं। आढ़ती इसी चबूतरे पर कब्जा जमा लेते हैं जबकि इस चबूतरे का इस्तेमाल सरकारी क्रय केंद्रों के लिए होता आया है। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए अब मंडी समिति प्रशासन ने निर्णय लिया है। मंडी समिति सचिव मोहित फौजदार ने कहा कि क्रय केंद्र 3 अक्टूबर से लगाए जाने हैं। उससे पहले ही टीनशेड के नीचे चबूतरे को खाली कराकर चारों तरफ से तारबंदी करा दी जाएगी ताकि दोबारा कोई आढ़ती अपना सामान या अनाज वहां पर न रख सके। बहरहाल, अगर चबूतरे को सुरक्षित कर लिया जाएगा तो किसानों को भी वहां तक धान की ट्रैक्टर ट्रालियां या अन्य वाहनों के लाने में सहूलियत मिलेगी।
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मंडी समिति में सीमित ट्रैक्टर-ट्रॉली को प्रवेश मिलेगा
मंडी समिति में बारीक धान की बिक्री पिछले आठ दिन से चल रही है। मोटे धान की बिक्री सरकारी क्रय केंद्रों पर किसान करने के लिए पहुुंचेंगे। इसके लिए मंडी समिति अधिकारियों ने पुलिस-प्रशासन से सहयोग मांगा है। संभल-हसनपुर मार्ग पर जाम न लगे। इसके लिए यातायात पुलिस व्यवस्था बनाने में लगेगी। मंडी में जगह न होने के चलते ट्रैक्टर-ट्रॉली को शहर में प्रवेश से पहले ही रोका जाएगा। जब मंडी में जगह हो जाएगी तो ट्रैक्टर-ट्रॉली को भेजा जाएगा। इससे मंडी समिति में अव्यवस्था नहीं बनेगी। मुख्य मार्ग पर भी जाम नहीं लगेगा।
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जिले में बारीक धान की पैदावार ज्यादा, मोटे धान की फसल में किसानों की दिलचस्पी नहीं

जिले में बारीक धान की फसल बड़े रकबे में की जाती है। मोटे धान की पैदावार कम होने के चलते किसान भी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। शासन द्वारा जो लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा। वह पूरा करना चुनौती रहेगा। पिछले आठ दिन से लगातार मंडी में आढ़तियों के ठिए पर धान पहुंच रहा है। समर्थन मूल्य से कहीं ज्यादा कीमत पर यह धान बिकता है। समर्थन मूल्य मोटे धान की फसल का घोषित किया गया है। इसलिए किसान आढ़तियों को धान लगातार बेच रहे हैं।
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