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Sambhal News: मस्जिद, मजार और शाही इमाम के मकान मामले में सुनवाई अब 10 अप्रैल को होगी
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संभल। कोतवाली क्षेत्र के गांव सैफखां सराय में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद, मजार और शाही इमाम के मकान मामले में सुनवाई शुक्रवार को अवकाश के चलते नहीं हो सकी। अब सुनवाई 10 अप्रैल को होगी। अवकाश के चलते सुनवाई की तिथि आगे बढ़ा दी गई है।
सैफखां सराय में मौलाना खुर्शीद मियां की मजार, इसी परिसर में बनी मस्जिद और उनके बेटे व शाही इमाम आफताब हुसैन वारसी व मेहताब हुसैन का मकान सरकारी जमीन में निर्माण पाया गया है। इसको खाली करने के लिए नौ मार्च को तहसीलदार न्यायालय की ओर से आदेश किया गया था। इस आदेश के खिलाफ शाही इमाम और उनके भाई डीएम कोर्ट अपील करने के लिए पहुंच गए हैं। इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई की जानी थी लेकिन अवकाश के चलते सुनवाई नहीं हो सकी।
तहसीलदार न्यायालय के आदेश के अनुसार ग्राम समाज की करीब दो बीघा जमीन पर शाही इमाम मौलाना आफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन का कब्जा है। इसमें इन दोनों भाइयों के मकान, मस्जिद और इनके पिता की मजार बनी है। वर्ष 2016-17 में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर निर्माण की शिकायत हुई थी।
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शिकायत के बाद पैमाइश हुई और धारा 67 के तहत कार्रवाई आगे बढ़ी। इसी क्रम में तहसीलदार न्यायालय ने बेदखली का आदेश किया था। साथ ही शाही इमाम और उनके भाई पर सात करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इस आदेश के खिलाफ डीएम कोर्ट में अपील की गई है।
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सैफखां सराय में मौलाना खुर्शीद मियां की मजार, इसी परिसर में बनी मस्जिद और उनके बेटे व शाही इमाम आफताब हुसैन वारसी व मेहताब हुसैन का मकान सरकारी जमीन में निर्माण पाया गया है। इसको खाली करने के लिए नौ मार्च को तहसीलदार न्यायालय की ओर से आदेश किया गया था। इस आदेश के खिलाफ शाही इमाम और उनके भाई डीएम कोर्ट अपील करने के लिए पहुंच गए हैं। इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई की जानी थी लेकिन अवकाश के चलते सुनवाई नहीं हो सकी।
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तहसीलदार न्यायालय के आदेश के अनुसार ग्राम समाज की करीब दो बीघा जमीन पर शाही इमाम मौलाना आफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन का कब्जा है। इसमें इन दोनों भाइयों के मकान, मस्जिद और इनके पिता की मजार बनी है। वर्ष 2016-17 में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर निर्माण की शिकायत हुई थी।
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शिकायत के बाद पैमाइश हुई और धारा 67 के तहत कार्रवाई आगे बढ़ी। इसी क्रम में तहसीलदार न्यायालय ने बेदखली का आदेश किया था। साथ ही शाही इमाम और उनके भाई पर सात करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इस आदेश के खिलाफ डीएम कोर्ट में अपील की गई है।