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Sambhal News: किराये के भवनों में चल रहे जिले के होम्योपैथिक अस्पताल

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 17 Dec 2025 01:37 AM IST
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The district's homeopathic hospital is operating in rented buildings.
चंदौसी(संभल)। आम लोगों का ही नहीं चिकित्सकों का भी दावा है कि होम्योपैथी से इलाज हो तो बीमारी जड़ से समाप्त हो जाती है। इसी को लेकर अब होम्योपैथी की ओर रुझान बढ़ रहा, यही कारण है कि जिले में लगभग 35 प्रतिशत मरीज इसी पैथी से अपना इलाज करा रहे हैं। जिले के सभी सात अस्पतालों में प्रतिदिन भीड़ नजर आती है, लेकिन अफसोस जनक यह है कि जनपद के सात होम्योपैथिक अस्पतालों में से पांच के पास अपना भवन भी नहीं है। यह अस्पताल उधार के भवन में संचालित हो रहे हैं।
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जिले में संभल, चंदौसी, बहजोई, गुन्नौर, किसौली, सिरसी और मनौटा में होम्योपैथिक अस्पताल संचालित हैं। यह सभी सामुदायिक या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चल रहे हैं। सात साल पहले वर्ष 2018 में शासन के आदेश पर किराये के भवनों में चल रहे सभी होम्योपैथिक अस्पतालों को सीएचसी व पीएचसी के भवनों में शिफ्ट कर दिया गया था। तब से अभी तक इन्हें अपना भवन नहीं मिल सका है।
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हालांकि जिला होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंजू सिंघला द्वारा जिला व तहसील प्रशासन को पत्राचार के माध्यम से जमीन उपलब्ध कराए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन इसके लिए एक कदम भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। हालांकि बहजोई और गुन्नौर में संचालित अस्पतालों को तो जमीन मिल चुकी है, बाकी के पांच अस्पतालों को अभी तक शासनादेश न मिलने के कारण भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
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सबसे पुराना है चंदौसी का होम्योपैथिक अस्पताल

चंदौसी। यहां वर्ष 1982 से होम्योपैथिक अस्पताल चल रहा है। पहले यह किराये के भवन में था। इसके बाद सीएचसी परिसर स्थित एक जर्जर भवन में संचालित किया जाने लगा। भवन की हालत खस्ता होने के कारण मरीजों व स्टॉफ की सुरक्षा को देखते हुए इसे वहां से हटाकर एक वर्ष पहले सीएचसी में बने कोरोना विंग के एक कमरे में शिफ्ट कर दिया गया। अब एक ही कमरे में पंजीकरण, चिकित्सकीय परामर्श और दवा वितरण का कार्य हो रहा है। अकेले चंदौसी के ही इस अस्पताल में प्रतिदिन 100 से 125 मरीज इलाज के लिए आते हैं। जगह कम होने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। संवाद




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अस्पताल की जमीन को शासन स्तर पर हो पैरवी



चंदौसी। होम्योपैथिक अस्पताल की अपनी इमारत के लिए जमीन की दरकार है। ऐसे में शासन स्तर पर मजबूत पैरवी न हो पाने के कारण जमीन नहीं मिल पा रही है। शहर का सबसे पुराना अस्पताल होने के बाद भी जनप्रतिनिधि इसको लेकर संजीदा नहीं हैं। विभागीय अधिकारियों के पत्राचार पर ध्यान देकर अगर जिला प्रशासन शासन से जमीन के लिए मांग भी करे तो इसके लिए सरकार में मंत्री पद पर आसीन शहर की विधायक को पैरवी करनी चाहिए। अफसरों का भी मानना है कि मंत्री जी पैरवी करें तो जिले के सभी होम्योपैथिक अस्पतालों को अपने भव मिल सकते हैं, अन्यथा यह कवायद इसी तरह चलती रहेगी। संवाद

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वर्जन

सीएचसी में स्थित होम्योपैथिक अस्पताल में प्रतिदिन सौ से सवा मरीज दवा लेने आते हैं। मात्र एक कमरे में चल रहे अस्पताल भीड़ इतनी हो जाती है कि मरीजों को खड़े होने की जगह भी नहीं मिल पाती। तीन दिन चंदौसी और तीन दिन बहजोई में मरीजों को देखना होता है, लेकिन दोनों ही अस्पताल सीएचसी में चल रहे हैं, इनके अपने भवन होने चाहिए।



-डॉ. अमरीश कुमार शर्मा, वरिष्ठ चिकित्साधिकारी होम्योपैथिक चंदौसी
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