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Sambhal News: विकास की गजब कहानी...पिछड़ों के नाम पर अमीरों को मिली सड़क
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चंदौसी। नाम पिछड़ी और मलिन बस्ती के उत्थान का, काम चंद जमीन कारोबारियों को लाभ पहुंचाने का। जिला प्रशासन की अनुमोदित कार्ययोजना पर शासन ने खुर्जा गेट स्थित आंबेडकर पार्क से जीनियस गर्ल्स स्कूल होते हुए ग्राम पतरौआ तक ढाई किमी सड़क के लिए 194.81 लाख रुपये का बजट जारी किया। सड़क का काम शुरू भी हो गया, लेकिन आरोप है कि निर्माण स्वीकृत नक्शे पर नहीं, कारोबारियों के इशारे पर दूसरी दिशा में किया जा रहा है। पूर्व सांसद व ग्राम प्रधान समेत कई प्रमुख लोगों ने इसका खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। आरोप सीधे तौर पर लोक निर्माण विभाग के आला अफसरों पर है।
दरअसल जीनियस गर्ल्स स्कूल प्रबंधक और प्रशासन की ओर से अप्रैल 2025 में जिला योजना की बैठक में इस सड़क का प्रस्ताव रखा गया था। तत्कालीन डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने 30 जून 2025 को लोनिवि की संशोधित कार्ययोजना शासन को भेजी। बीच में एक जनप्रतिनिधि के अड़ंगे से फाइल लटकी रही। इसके बाद 23 नवंबर 2025 को एमएलसी डॉ. जयपाल व्यस्त ने प्रमुख सचिव लोनिवि को पत्र लिखकर सड़क को स्वीकृत कर निर्माण कराए जाने के लिए कहा था।
फरवरी 2026 में लोक निर्माण विभाग लखनऊ से नव निर्माण योजना के तहत कार्य योजना को स्वीकृति मिली, और अप्रैल में 60 लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई। इसका टेंडर एमए खान एंड संस फर्म को दिया गया। 13 अप्रैल 2026 को एमएलसी डॉ. जयपाल व्यस्त ने खुर्जा गेट आंबेडकर पार्क पर इस सड़क का शिलान्यास किया था, लेकिन जहां शिलान्यास हुआ वहां से सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया। इसके बाद राज्यमंत्री गुलाब देवी ने आटा गांव के पास 22 मई को इसी सड़क का शिलान्यास किया और वहीं से निर्माण कार्य शुरू हो गया।
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अब सवाल यही है कि जब शासन ने कार्ययोजना पर मुहर लगाकर पैसा दिया, तो विभाग ने अपने स्तर से सड़क की दिशा कैसे बदल दी? विरोध करने वालों का आरोप है कि स्वीकृत मार्ग से सड़क बनने पर पिछड़े वर्ग की बस्ती को सीधा लाभ मिलता, लेकिन रूट बदलकर उसे जमीन कारोबारियों की नई काटी जा रही कॉलोनियों की ओर मोड़ दिया गया, ताकि उनकी जमीनों के दाम बढ़ जाएं।
सड़क का निर्माण खुर्जा गेट आंबेडकर पार्क से होना था। पतरौआ गांव को इस सड़क से जोड़ना था ताकि गांव की दलित एवं वंचित जनता को इसका लाभ मिल सके, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और दूसरी से सड़क का निर्माण शुरू कर दिया गया। अब जो सड़क डाली जा रही है, उसका विरोध नहीं है, लेकिन जहां से जहां तक पहले सड़क स्वीकृत हुई थी वह पतरौआ को जोड़ते हुए डालनी होगी। इसके लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। -गिरीश चंद्र, पूर्व सांसद एवं विधायक
जो 2.5 किमी सड़क मंजूर हुई थी उससे हमारे गांव की गरीब, दलित एवं वंचित जनता के लिए चंदौसी शहर के लिए सीधी कनेक्टविटी मिलनी थी, लेकिन जमीन के कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए इसे गांव में न लाकर मोड़ दिया गया, ताकि जमीन कारोबारियों को मोटा लाभ हो सके। अगर पूर्व में स्वीकृत लेआउट के अनुसार सड़क को गांव से नहीं जोड़ा गया तो बड़ा आंदोलन गांव के लोग करेंगे। वह इस मामले में राज्यमंत्री से मिलेंगे। -रेनू कुमारी, ग्राम प्रधान पतरौआ
पहले जो सड़क स्वीकृत हुई थी वह पतरौआ गांव को जोड़ने वाली थी, लेकिन अधिकारियों का कहना था कि गांव में स्थित सरकारी तालाब के कारण इधर से सड़क निकालने में असुविधा होगी। हमें तो अधिकारियों ने जैसा बताया है उसी के अनुसार निर्माण कार्य कर रहे हैं। कुछ लोगों ने इसका विरोध किया है। फिलहाल सड़क निर्माण का कार्य बंद कर दिया गया है। आगे जैसा आदेश मिलेगा वैसा करेंगे। -नासिर खान, ठेकेदार
कुछ जमीन का कारोबार करने वालों को लाभ पहुंचाने के लिए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने सड़क का रुख मोड़ दिया है। हमारे गांव पतरौआ में होकर पहले यह सड़क जानी थी, लेकिन अब रास्ता बदल गया है। यह मनमानी की जा रही है, इसका विरोध शासन स्तर तक किया जाएगा। -सूरज सिंह, सेवानिवृत्त क्लर्क
जेई व एई ने सड़क निर्माण के लिए जिस तरह का असाइनमेंट दिया था उसी के अनुसार स्वीकृति लेकर काम कराया जा रहा है। हमें भला क्या परेशानी थी, किधर से भी सड़क का निर्माण होता। कुछ लोग चाहते हैं कि उनकी जिधर प्लाटिंग चल रही है उधर से सड़क निकलनी चाहिए थी। ऐसे लोग नव निर्मित सड़क को लेकर राजनीति कर रहे हैं। जब से सड़क बननी शुरू हुई है तब से सैकड़ों फोन आ चुके हैं, जिसका जवाब देते परेशान हो गए हैं। -सुनील प्रकाश, अधिशासी अभियंता लोनिवि
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दरअसल जीनियस गर्ल्स स्कूल प्रबंधक और प्रशासन की ओर से अप्रैल 2025 में जिला योजना की बैठक में इस सड़क का प्रस्ताव रखा गया था। तत्कालीन डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने 30 जून 2025 को लोनिवि की संशोधित कार्ययोजना शासन को भेजी। बीच में एक जनप्रतिनिधि के अड़ंगे से फाइल लटकी रही। इसके बाद 23 नवंबर 2025 को एमएलसी डॉ. जयपाल व्यस्त ने प्रमुख सचिव लोनिवि को पत्र लिखकर सड़क को स्वीकृत कर निर्माण कराए जाने के लिए कहा था।
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फरवरी 2026 में लोक निर्माण विभाग लखनऊ से नव निर्माण योजना के तहत कार्य योजना को स्वीकृति मिली, और अप्रैल में 60 लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई। इसका टेंडर एमए खान एंड संस फर्म को दिया गया। 13 अप्रैल 2026 को एमएलसी डॉ. जयपाल व्यस्त ने खुर्जा गेट आंबेडकर पार्क पर इस सड़क का शिलान्यास किया था, लेकिन जहां शिलान्यास हुआ वहां से सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया। इसके बाद राज्यमंत्री गुलाब देवी ने आटा गांव के पास 22 मई को इसी सड़क का शिलान्यास किया और वहीं से निर्माण कार्य शुरू हो गया।
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अब सवाल यही है कि जब शासन ने कार्ययोजना पर मुहर लगाकर पैसा दिया, तो विभाग ने अपने स्तर से सड़क की दिशा कैसे बदल दी? विरोध करने वालों का आरोप है कि स्वीकृत मार्ग से सड़क बनने पर पिछड़े वर्ग की बस्ती को सीधा लाभ मिलता, लेकिन रूट बदलकर उसे जमीन कारोबारियों की नई काटी जा रही कॉलोनियों की ओर मोड़ दिया गया, ताकि उनकी जमीनों के दाम बढ़ जाएं।
सड़क का निर्माण खुर्जा गेट आंबेडकर पार्क से होना था। पतरौआ गांव को इस सड़क से जोड़ना था ताकि गांव की दलित एवं वंचित जनता को इसका लाभ मिल सके, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और दूसरी से सड़क का निर्माण शुरू कर दिया गया। अब जो सड़क डाली जा रही है, उसका विरोध नहीं है, लेकिन जहां से जहां तक पहले सड़क स्वीकृत हुई थी वह पतरौआ को जोड़ते हुए डालनी होगी। इसके लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। -गिरीश चंद्र, पूर्व सांसद एवं विधायक
जो 2.5 किमी सड़क मंजूर हुई थी उससे हमारे गांव की गरीब, दलित एवं वंचित जनता के लिए चंदौसी शहर के लिए सीधी कनेक्टविटी मिलनी थी, लेकिन जमीन के कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए इसे गांव में न लाकर मोड़ दिया गया, ताकि जमीन कारोबारियों को मोटा लाभ हो सके। अगर पूर्व में स्वीकृत लेआउट के अनुसार सड़क को गांव से नहीं जोड़ा गया तो बड़ा आंदोलन गांव के लोग करेंगे। वह इस मामले में राज्यमंत्री से मिलेंगे। -रेनू कुमारी, ग्राम प्रधान पतरौआ
पहले जो सड़क स्वीकृत हुई थी वह पतरौआ गांव को जोड़ने वाली थी, लेकिन अधिकारियों का कहना था कि गांव में स्थित सरकारी तालाब के कारण इधर से सड़क निकालने में असुविधा होगी। हमें तो अधिकारियों ने जैसा बताया है उसी के अनुसार निर्माण कार्य कर रहे हैं। कुछ लोगों ने इसका विरोध किया है। फिलहाल सड़क निर्माण का कार्य बंद कर दिया गया है। आगे जैसा आदेश मिलेगा वैसा करेंगे। -नासिर खान, ठेकेदार
कुछ जमीन का कारोबार करने वालों को लाभ पहुंचाने के लिए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने सड़क का रुख मोड़ दिया है। हमारे गांव पतरौआ में होकर पहले यह सड़क जानी थी, लेकिन अब रास्ता बदल गया है। यह मनमानी की जा रही है, इसका विरोध शासन स्तर तक किया जाएगा। -सूरज सिंह, सेवानिवृत्त क्लर्क
जेई व एई ने सड़क निर्माण के लिए जिस तरह का असाइनमेंट दिया था उसी के अनुसार स्वीकृति लेकर काम कराया जा रहा है। हमें भला क्या परेशानी थी, किधर से भी सड़क का निर्माण होता। कुछ लोग चाहते हैं कि उनकी जिधर प्लाटिंग चल रही है उधर से सड़क निकलनी चाहिए थी। ऐसे लोग नव निर्मित सड़क को लेकर राजनीति कर रहे हैं। जब से सड़क बननी शुरू हुई है तब से सैकड़ों फोन आ चुके हैं, जिसका जवाब देते परेशान हो गए हैं। -सुनील प्रकाश, अधिशासी अभियंता लोनिवि