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एक दशक से बाबू की कुर्सी पर बैठे तीन सफाई कर्मियों को मूल तैनाती पर भेजा
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नगर पालिका परिषद में करीब एक दशक से बाबू के पद पर कार्य कर रहे सफाई कर्मियों को उनके मूल पदों पर भेजने के आदेश हो गए हैं। यह कर्मचारी गलत तरीके से बाबू बने बैठे थे। इन कर्मचारियों का 2012 में तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता ने प्रमोशन निरस्त कर दिया था और मूल तैनाती के पद पर नियुक्त किए जाने के आदेश किए थे। निरस्त की कार्रवाई तो हो गई लेकिन यह सफाई कर्मचारी बाबू की कुर्सी दबाए बैठे रहे। नगर पालिका के प्रभारी/एडीएम केके अवस्थी के आदेश पर अब कार्रवाई हुई है।
नगर पालिका परिषद, संभल में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सफाई कर्मियों के स्थान को भरने के लिए वर्ष 2007 में धर्मेंद्र, प्रहलाद और मोइन की सफाई कर्मचारियों के पद पर नियुक्ति की गई थी। बताते हैं कि वर्ष 2009 में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी ने छह सदस्य समिति गठित की। इस समिति ने धर्मेंद्र, प्रहलाद और मोईन को गलत तरीके से प्रमोशन कर दिया। और यह सफाई कर्मचारी बाबू के पद पर कार्य रहे थे। वर्ष 2011 में अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता आए तो उन्होंने इस मामले को देखा। जिसके बाद इन सभी कर्मचारियों का प्रमोशन निरस्त करते हुए मूल तैनाती पर तैनात करने के आदेश कर दिए थे। तत्कालीन अधिशासी अधिकारी का तबादला होने के बाद नए अधिशासी अधिकारी ने कार्रवाई को स्वीकार किया पर मूल तैनाती पर नहीं भेजा। बल्कि इन्हें ही बाबू माना गया और अटैचमेंट के रूप में यह कार्य करते रहे। हालांकि वेतन सफाई कर्मचारी का ही मिलता है लेकिन रसूख के चलते यह तीनों कर्मचारी बाबू होने का रौब झाड़ते रहे। अब जिलाधिकारी मनीष बंसल से इसकी शिकायत हुई तो मामले का अपर जिलाधिकारी केके अवस्थी ने संज्ञान लिया। ईओ रामपाल यादव ने बताया कि प्रभारी/एडीएम केके अवस्थी की ओर से धर्मेंद्र, प्रहलाद और मोईन को मूल पदों पर भेजने का आदेश किया गया है। यह तीनों कर्मचारी सफाई कर्मचारी हैं और जिन पदों पर काम कर रहे थे उस पर यह काम नहीं कर सकते।
मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं था। जिलाधिकारी से शिकायत की गई। जिसके बाद यह मेरे संज्ञान में आया। यह तीनों सफाई कर्मचारी हैं और बाबू का काम नहीं कर सकते। इसलिए कार्रवाई की गई है। और इनके मूल पदों पर तैनाती के आदेश किए हैं।
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केके अवस्थी, एडीएम/ प्रभारी, नगर पालिका परिषद, संभल
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नगर पालिका परिषद, संभल में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सफाई कर्मियों के स्थान को भरने के लिए वर्ष 2007 में धर्मेंद्र, प्रहलाद और मोइन की सफाई कर्मचारियों के पद पर नियुक्ति की गई थी। बताते हैं कि वर्ष 2009 में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी ने छह सदस्य समिति गठित की। इस समिति ने धर्मेंद्र, प्रहलाद और मोईन को गलत तरीके से प्रमोशन कर दिया। और यह सफाई कर्मचारी बाबू के पद पर कार्य रहे थे। वर्ष 2011 में अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता आए तो उन्होंने इस मामले को देखा। जिसके बाद इन सभी कर्मचारियों का प्रमोशन निरस्त करते हुए मूल तैनाती पर तैनात करने के आदेश कर दिए थे। तत्कालीन अधिशासी अधिकारी का तबादला होने के बाद नए अधिशासी अधिकारी ने कार्रवाई को स्वीकार किया पर मूल तैनाती पर नहीं भेजा। बल्कि इन्हें ही बाबू माना गया और अटैचमेंट के रूप में यह कार्य करते रहे। हालांकि वेतन सफाई कर्मचारी का ही मिलता है लेकिन रसूख के चलते यह तीनों कर्मचारी बाबू होने का रौब झाड़ते रहे। अब जिलाधिकारी मनीष बंसल से इसकी शिकायत हुई तो मामले का अपर जिलाधिकारी केके अवस्थी ने संज्ञान लिया। ईओ रामपाल यादव ने बताया कि प्रभारी/एडीएम केके अवस्थी की ओर से धर्मेंद्र, प्रहलाद और मोईन को मूल पदों पर भेजने का आदेश किया गया है। यह तीनों कर्मचारी सफाई कर्मचारी हैं और जिन पदों पर काम कर रहे थे उस पर यह काम नहीं कर सकते।
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मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं था। जिलाधिकारी से शिकायत की गई। जिसके बाद यह मेरे संज्ञान में आया। यह तीनों सफाई कर्मचारी हैं और बाबू का काम नहीं कर सकते। इसलिए कार्रवाई की गई है। और इनके मूल पदों पर तैनाती के आदेश किए हैं।
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केके अवस्थी, एडीएम/ प्रभारी, नगर पालिका परिषद, संभल