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संभल के 80 मकानों पर लाल निशान: फिलहाल बुलडोजर चलने का खतरा टला, हाईकोर्ट ने लगाई रोक, चार सप्ताह का समय मिला

Wed, 15 Oct 2025 03:44 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, संभल
अमर उजाला नेटवर्क, संभल Published by: विमल शर्मा Updated Wed, 15 Oct 2025 03:44 PM IST
सार

संभल के हातिम सराय में सरकारी जमीन पर बने 80 मकानों पर बुलडोजर की कार्रवाई फिलहाल टल गई है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद ध्वस्तीकरण पर रोक लगाते हुए तहसील प्रशासन को चार सप्ताह के भीतर दस्तावेजों की जांच करने और लोगों को जवाब दाखिल करने का समय दिया है। 

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Red marks 80 houses in Sambhal, Bulldozer threat averted for now, High Court imposes stay
हाकिम सराय के घरों में लगाए गए लाल निशान - फोटो : संवाद

विस्तार

रायसत्ती थाना क्षेत्र के मोहल्ला हातिम सराय में बने 80 मकानों पर बुलडोजर चलने का खतरा फिलहाल टल गया है। हाईकोर्ट ने लोगों की याचिका पर सुनवाई करते हुए रोक लगा दी है। साथ ही चार सप्ताह के अंदर तहसील प्रशासन को अपने-अपने दस्तावेज दिखाने का आदेश दिए हैं।

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इसके बाद अगली सुनवाई भी की जानी है। हालांकि प्रशासन से होने वाली वार्ता अभी तक नहीं हो सकी है। शनिवार को डीएम से लोगों ने मुलाकात की थी तो डीएम ने तहसील प्रशासन को अपने-अपने दस्तावेज दिखाने के निर्देश दिए थे। यह दस्तावेज सोमवार या मंगलवार में दिखाने के निर्देश दिए थे लेकिन लोग तहसीलदार के पास दस्तावेज लेकर नहीं पहुंचे।
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तहसील प्रशासन ने दावा किया था कि यह 80 मकान तालाब की जमीन पर बनाए गए हैं। इन्हें हटाने के लिए नोटिस भी जारी किए गए थे। इसमें 15 दिन के अंदर अपने दस्तावेज दिखाने के लिए कहा गया था। वहीं लोगों ने दावा किया कि यह जमीन हातिम सराय निवासी राम सुनीति देवी से वर्ष 2005 के बाद से खरीदनी शुरू की थी।
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जो 2012 तक खरीदी गई थी। इसके बाद ही लोगों ने मकानों का निर्माण किया। कुछ लोगों ने कहा कि उनके पास बैनामा कॉपी के साथ मकान का नक्शा पास होने का प्रमाण है। आठ अक्तूबर को टीम के साथ पहुंचे तहसीलदार ने 40 मकानों पर लाल निशान लगवा दिए थे।

इसके बाद ही यहां के मकान मालिक हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के लिए पहुंचे। साथ ही शनिवार को डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई थी। मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को रोकने का स्टे कर दिया।

इसके साथ ही चार सप्ताह के अंदर तहसील प्रशासन के नोटिस के मुताबिक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब लोगों को चार सप्ताह के अंदर नोटिस का जवाब दाखिल करना है। फिलहाल चार सप्ताह तक प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

एडीएम के 2009 के आदेश से भी प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल
हातिम सराय में स्थित जिस जमीन पर मकानों का निर्माण किया गया है। उस जमीन का गाटा संख्या 84, 85व और 86 अंकित है। इस जमीन को लेकर वर्ष 2009 में तत्कालीन एडीएम हरज्ञान सिंह पुंडीर की कोर्ट में सुनवाई हुई थी। 14 सितंबर 2009 को राम सुनीति देवी की निजी संपत्ति होने का आदेश किया गया था।

इसमें कहा गया था कि पीपी एक्ट के तहत जारी किए गए 35 नोटिस वापस किए जाएं। एडीएम की कोर्ट में यह मामला 35 नोटिस जारी होने के बाद पहुंचा था लेकिन जांच पड़ताल हुई तो निजी जमीन होने के प्रमाण पाए गए थे। वर्तमान में चल रही कार्रवाई पर इस आदेश के सामने आने के बाद सवाल खड़े हो गए थे।

राम सुनीति देवी की पोती ने भी कहा, उनकी दादी ने बेची थी जमीन
हातिम सराय निवासी राम सुनीति देवी की पोती सरायतरीन निवासी पूर्वी वार्ष्णेय ने कहा कि जिस जमीन पर 80 मकानों का निर्माण किया गया है। वह उनकी दादी की जमीन थी। जो उनकी दादी ने ही बेची थी। सरकारी तालाब नहीं था। साथ ही बताया था कि 12 बीघा जमीन लोगों को बेची थी। इसमें आठ बीघा जमीन पर यह मकान बने हैं। इस दावे के बाद भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे थे। इसके बाद ही डीएम ने सभी से अपने-अपने प्रमाण दिखाने के लिए कहा था।

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