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अब गोरखपुर के रेलयात्री पर बरसी ‘प्रभु कृपा’
अमर उजाला ब्यूरो/चंदौसी
Updated Sat, 16 Apr 2016 01:03 AM IST
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भारतीय रेल
- फोटो : PTI
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रेलयात्रियों के ट्वीट पर रेलमंत्री सुरेश प्रभु की मेहरबानियों का सिलसिला जारी है। अब ‘प्रभु कृपा’ गोरखपुर के रेलयात्री पर बरसी है। मैकेनिकल इंजीनियर को चंदौसी रेलवे स्टेशन पर नेट बुकिंग के बावजूद रिटायरिंग रूम (विश्रामालय) नहीं मिल पाया।
रेल कर्मियों से जिरह के बाद जब रेलमंत्री सुरेश प्रभु के ट्विटर एकाउंट पर ट्वीट करने के बाद इंजीनियर को रिटायरिंग रूम दिलाने का फरमान मिला तो आधी रात को स्टेशन पर खलबली मच गई। वहां आराम फरमा रहे एक टीटीई को बाहर करके इंजीनियर को जगह दिलाई गई।
टाटा केमिकल्स फैक्ट्री बबराला में मशीनी खराबी के लिए गोरखपुर से मैकेनिकल एक्सपर्ट रामगोपाल पटेल को बुलाया गया था। जिनके लिए 13 अप्रैल को इंटरनेट पर टिकट व रिटायरिंग रूम बुक कर दिया गया था। बताते हैं कि ई-टिकट का तो एसएमएस आ गया था लेकिन विश्रामालय का एसएमएस नहीं आया।
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अलबत्ता, नेट पर रिटायरिंग रूम की बुकिंग रामगोपाल पटेल के नाम दर्शाई जा रही थी। 14 अप्रैल की रात को करीब नौ बजे इंजीनियर रामगोपाल पटेल टीसीएल में कार्य कर रहे राकेश पाठक के साथ पहुंचे। तो रिटायरिंग रूम में ताला बंद था। स्टेशन अधीक्षक तो नहीं थे।
तो वहां मौजूद टीटीई व अन्य कर्मचारियों को बताया लेकिन उन्होंने कहा कि रिटायरिंग रूम बुक ही नहीं है, यदि है तो दिखाओ। रात को ही राकेश पाठक ने अपने घर से लैपटॉप मंगवाया, जिसमें वेबसाइट पर बुकिंग दिखाई लेकिन रेलवे कर्मचारी मानने को तैयार नहीं हुए।
परेशान होकर राकेश पाठक ने केंद्रीय रेलमंत्री सुरेश प्रभु के ट्विटर एकाउंट पर शिकायत दर्ज करा दी। बताते है कि पंद्रह मिनट बात ही रेल मंत्रालय से कॉल आई, जिसमें पूरी डिटेल पूछी और उसके बाद तो रेलवे प्रशासन में खलबली मच गई।
आनन-फानन में विश्रामालय का ताला खोला गया। राकेश पाठक ने बताया कि बाहर ताला बंद होने के बावजूद अंदर एक टीटीई नींद ले रहे थे। करीब रात्रि 11.10 बजे इंजीनियर रामगोपाल पटेल को रिटायरिंग रूम मिल सका। उनकी ट्रेन इंटरसिटी 2.58 बजे थी।
रामगोपाल पटेल, इंजीनियर गोरखपुर ने बताया इंटरनेट बुकिंग से आने जाने का टिकट व रिटायरिंग रूम दोनों बुक किए गए थे, टिकट के अलावा रिटायरिंग रूम का दो सौ रुपये शुल्क भी कट गया था लेकिन एसएमएस नहीं आया तो यह रेलवे प्रशासन की कमी है। नेट पर रिटायरिंग रूम की बुकिंग दर्शाई गई थी तो रेलवे कर्मचारियों को मानना चाहिए था या फिर विभागीय तौर पर कंफर्म करना चाहिए। बिना वजह मुझे दो घंटे से अधिक समय तक परेशान किया गया।
मुकेश कुमार वार्ष्णेय, मुख्य टिकट निरीक्षक ने कहा इंजीनियर रामगोपाल पटेल सिर्फ अपना टिकट दिखा रहे थे, उनके लिए रिटायरिंग रूम बुक ही नहीं था, न तो उनके पास एसएमएस था और न ही रेलवे स्टेशन को कोई कंफर्मेशन थी। वह सिर्फ टीटीई पर दबाव बनाकर रिटर्निंग रूम लेना चाह रहे थे।
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रेल कर्मियों से जिरह के बाद जब रेलमंत्री सुरेश प्रभु के ट्विटर एकाउंट पर ट्वीट करने के बाद इंजीनियर को रिटायरिंग रूम दिलाने का फरमान मिला तो आधी रात को स्टेशन पर खलबली मच गई। वहां आराम फरमा रहे एक टीटीई को बाहर करके इंजीनियर को जगह दिलाई गई।
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टाटा केमिकल्स फैक्ट्री बबराला में मशीनी खराबी के लिए गोरखपुर से मैकेनिकल एक्सपर्ट रामगोपाल पटेल को बुलाया गया था। जिनके लिए 13 अप्रैल को इंटरनेट पर टिकट व रिटायरिंग रूम बुक कर दिया गया था। बताते हैं कि ई-टिकट का तो एसएमएस आ गया था लेकिन विश्रामालय का एसएमएस नहीं आया।
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अलबत्ता, नेट पर रिटायरिंग रूम की बुकिंग रामगोपाल पटेल के नाम दर्शाई जा रही थी। 14 अप्रैल की रात को करीब नौ बजे इंजीनियर रामगोपाल पटेल टीसीएल में कार्य कर रहे राकेश पाठक के साथ पहुंचे। तो रिटायरिंग रूम में ताला बंद था। स्टेशन अधीक्षक तो नहीं थे।
तो वहां मौजूद टीटीई व अन्य कर्मचारियों को बताया लेकिन उन्होंने कहा कि रिटायरिंग रूम बुक ही नहीं है, यदि है तो दिखाओ। रात को ही राकेश पाठक ने अपने घर से लैपटॉप मंगवाया, जिसमें वेबसाइट पर बुकिंग दिखाई लेकिन रेलवे कर्मचारी मानने को तैयार नहीं हुए।
परेशान होकर राकेश पाठक ने केंद्रीय रेलमंत्री सुरेश प्रभु के ट्विटर एकाउंट पर शिकायत दर्ज करा दी। बताते है कि पंद्रह मिनट बात ही रेल मंत्रालय से कॉल आई, जिसमें पूरी डिटेल पूछी और उसके बाद तो रेलवे प्रशासन में खलबली मच गई।
आनन-फानन में विश्रामालय का ताला खोला गया। राकेश पाठक ने बताया कि बाहर ताला बंद होने के बावजूद अंदर एक टीटीई नींद ले रहे थे। करीब रात्रि 11.10 बजे इंजीनियर रामगोपाल पटेल को रिटायरिंग रूम मिल सका। उनकी ट्रेन इंटरसिटी 2.58 बजे थी।
रामगोपाल पटेल, इंजीनियर गोरखपुर ने बताया इंटरनेट बुकिंग से आने जाने का टिकट व रिटायरिंग रूम दोनों बुक किए गए थे, टिकट के अलावा रिटायरिंग रूम का दो सौ रुपये शुल्क भी कट गया था लेकिन एसएमएस नहीं आया तो यह रेलवे प्रशासन की कमी है। नेट पर रिटायरिंग रूम की बुकिंग दर्शाई गई थी तो रेलवे कर्मचारियों को मानना चाहिए था या फिर विभागीय तौर पर कंफर्म करना चाहिए। बिना वजह मुझे दो घंटे से अधिक समय तक परेशान किया गया।
मुकेश कुमार वार्ष्णेय, मुख्य टिकट निरीक्षक ने कहा इंजीनियर रामगोपाल पटेल सिर्फ अपना टिकट दिखा रहे थे, उनके लिए रिटायरिंग रूम बुक ही नहीं था, न तो उनके पास एसएमएस था और न ही रेलवे स्टेशन को कोई कंफर्मेशन थी। वह सिर्फ टीटीई पर दबाव बनाकर रिटर्निंग रूम लेना चाह रहे थे।