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ओले भी पड़े, सरसों और आलू की फसल को नुकसान
ब्यूरो अमर उजाला / संभ्ाल
Updated Tue, 13 Feb 2018 01:19 AM IST
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potato
- फोटो : amar ujala
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रविवार को देर रात्रि हुई ओलों के साथ हुई बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी। सोमवार को भी बूंदाबांदी होती रही। बच्चों से लेकर महिलाओं और नवयुवक गर्म कपड़े पहनते हुए नजर आए। बारिश से किसानों के माथे पर चिंता की लकारें खिंच की गईं। क्योंकि सरसों और आलू की फसल को मामूली नुकसान हुआ है। सरसों की जिस फसल में फूल आ रहा था, उस फसल को बारिश के साथ आई तेज हवाओं ने नुकसान पहुंचाया है जबकि जिस आलू को खोदा जाना है, उसमें अब देरी के आसार बढ़ गए हैं।
रविवार रात को मौसम के मिजाज के कारण बारिश हुई। सोमबार सुबह भी बूंदाबांदी हुई। रात भर बादलों की गड़गड़ाहट ने लोगों को मौसम के बिगड़े मिजाज का एहसास कराया। बरसात होने से मौसम में ठंडक आ गई है। लोग एक बार फिर गर्म कपड़ों को पहनने लग गए। हालांकि दिन में 11 बजे के करीब कुछ देर के लिए धूप भी निकली लेकिन थोड़ी ही देर बाद मौसम फिर बदल गया।
बारिश की बूंदों और बर्फीली हवाओं ने सर्दी बढ़ाई। सौंधन की ओर रात में ओले पड़े हैं। मौसम खराब होने के कारण आलू, सरसों की फसलों को नुकसान हुआ है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। बरसात के होने से आलू की खुदाई प्रभावित होगी। किसानों का कहना है कि ज्यादा बरसात का होना कृषि के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि बरसात के होने से आलू, सरसों की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान है। आलू के कुछ खेतों में बारिश का पानी भर गया है। आलू गलने की संभावना बढ़ गई है। गेंहू की फसल में ओलों से वाली के टूटने और फसल कमजोर हो जाने की परेशानी हो रही है। चंदौसी मेंरविवार को दिनभर बादल छाए रहने के बाद मध्यरात्रि आकाश में तेज गड़गड़ाहट हुई और झमाझम बारिश शुरू हो गई। कहीं कहीं ओले की बौछारें भी हुई़। जिससे मौसम पहले से अधिक सर्द हो गया। तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, लेकिन इससे गेहूं आदि फसलों को फायदा ही पहुंचा है। जिससे किसानों की चेहरे खिल गए हैं। वहीं दूसरी तरफ कांवड़ियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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रविवार को पूरे दिन तेज हवाएं चलती रही। हल्की बूंदाबांदी बारिश भी होती रही। आकाश में काले बादल छाए रहे। लेकिन मध्यरात्रि के बाद मौसम अधिक तल्ख हो गया। तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। करीब एक घंटे तक बारिश तेज रही। इसके बाद रातभर रिमझिम बारिश होती रही। इससे गेहूं की सिंचाई हो गई। लेकिन जुनावई, गुन्नौर क्षेत्र में कई स्थानों पर ओले की बौछार से कुछ क्षेत्रों में गेहूं और आलू की फसल को नुकसान पहुंचा है। दिन में भी रिमझिम बारिश होती रही। जिससे चंदौसी शहरी क्षेत्र में कई जगहों पर जलभराव हो गया।
खराब मौसम का सर्वाधिक प्रभाव कांवड़ियों पर पड़ा है। उन्हें तेज हवाओं और बारिश में अपनी यात्रा को पूरा करना पड़ा। बाजारों पर भी मौसम का प्रभाव पड़ा। ग्राहक बाजार की ओर नहीं गए, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ।बबराला में बेमौसम हुई बरसात ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। पिछले दो सप्ताह से मिली ठंड से राहत के बाद अब एक बार फिर से सर्दी लौट आई है। और लोगों को गर्म कपड़े पहनने पर मजबूर कर दिया। वहीं इस बारिश ने किसानों के चेहरे पर रौनक ला दी है। डीजल की महगाई के दौर पर ऊपर से बरसे मेघा ने फसल की एक सिचाई का कार्य पूरा कर दिया है। गुन्नौर तहसील क्षेत्र के गांव नूरपुर के किसान योगेश यादव का कहना है कि बारिश से सिचाई की भरपाई हो गई। अगर फसल बड़ी होती तो तेज हवाओं से नुकसान हो सकता था। कैल गांव के किसान जगन्नाथ सिंह ने बताया कि बारिश के बाद चली तेज हवाओं का असर इस समय फसल पर नहीं हुआ है।
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रविवार रात को मौसम के मिजाज के कारण बारिश हुई। सोमबार सुबह भी बूंदाबांदी हुई। रात भर बादलों की गड़गड़ाहट ने लोगों को मौसम के बिगड़े मिजाज का एहसास कराया। बरसात होने से मौसम में ठंडक आ गई है। लोग एक बार फिर गर्म कपड़ों को पहनने लग गए। हालांकि दिन में 11 बजे के करीब कुछ देर के लिए धूप भी निकली लेकिन थोड़ी ही देर बाद मौसम फिर बदल गया।
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बारिश की बूंदों और बर्फीली हवाओं ने सर्दी बढ़ाई। सौंधन की ओर रात में ओले पड़े हैं। मौसम खराब होने के कारण आलू, सरसों की फसलों को नुकसान हुआ है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। बरसात के होने से आलू की खुदाई प्रभावित होगी। किसानों का कहना है कि ज्यादा बरसात का होना कृषि के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि बरसात के होने से आलू, सरसों की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान है। आलू के कुछ खेतों में बारिश का पानी भर गया है। आलू गलने की संभावना बढ़ गई है। गेंहू की फसल में ओलों से वाली के टूटने और फसल कमजोर हो जाने की परेशानी हो रही है। चंदौसी मेंरविवार को दिनभर बादल छाए रहने के बाद मध्यरात्रि आकाश में तेज गड़गड़ाहट हुई और झमाझम बारिश शुरू हो गई। कहीं कहीं ओले की बौछारें भी हुई़। जिससे मौसम पहले से अधिक सर्द हो गया। तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, लेकिन इससे गेहूं आदि फसलों को फायदा ही पहुंचा है। जिससे किसानों की चेहरे खिल गए हैं। वहीं दूसरी तरफ कांवड़ियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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रविवार को पूरे दिन तेज हवाएं चलती रही। हल्की बूंदाबांदी बारिश भी होती रही। आकाश में काले बादल छाए रहे। लेकिन मध्यरात्रि के बाद मौसम अधिक तल्ख हो गया। तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। करीब एक घंटे तक बारिश तेज रही। इसके बाद रातभर रिमझिम बारिश होती रही। इससे गेहूं की सिंचाई हो गई। लेकिन जुनावई, गुन्नौर क्षेत्र में कई स्थानों पर ओले की बौछार से कुछ क्षेत्रों में गेहूं और आलू की फसल को नुकसान पहुंचा है। दिन में भी रिमझिम बारिश होती रही। जिससे चंदौसी शहरी क्षेत्र में कई जगहों पर जलभराव हो गया।
खराब मौसम का सर्वाधिक प्रभाव कांवड़ियों पर पड़ा है। उन्हें तेज हवाओं और बारिश में अपनी यात्रा को पूरा करना पड़ा। बाजारों पर भी मौसम का प्रभाव पड़ा। ग्राहक बाजार की ओर नहीं गए, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ।बबराला में बेमौसम हुई बरसात ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। पिछले दो सप्ताह से मिली ठंड से राहत के बाद अब एक बार फिर से सर्दी लौट आई है। और लोगों को गर्म कपड़े पहनने पर मजबूर कर दिया। वहीं इस बारिश ने किसानों के चेहरे पर रौनक ला दी है। डीजल की महगाई के दौर पर ऊपर से बरसे मेघा ने फसल की एक सिचाई का कार्य पूरा कर दिया है। गुन्नौर तहसील क्षेत्र के गांव नूरपुर के किसान योगेश यादव का कहना है कि बारिश से सिचाई की भरपाई हो गई। अगर फसल बड़ी होती तो तेज हवाओं से नुकसान हो सकता था। कैल गांव के किसान जगन्नाथ सिंह ने बताया कि बारिश के बाद चली तेज हवाओं का असर इस समय फसल पर नहीं हुआ है।