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Sambhal News: डाकखाने में बार कोड स्टीकर खत्म, नहीं हो पा रही रजिस्ट्री
Tue, 21 May 2024 05:04 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Tue, 21 May 2024 05:04 AM IST
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संभल। डाकखाने में बार कोड स्टीकर खत्म होने के कारण रजिस्ट्री नहीं हो पा रही हैं। तमाम लोग हर दिन परेशान होकर लौट रहे हैं। जरूरतमंद लोग सिरसी या फिर मुरादाबाद पहुंचकर रजिस्ट्री करा रहे हैं। लोगों का कहना है कि उम्मीद लेकर डाकखाने आते हैं लेकिन यहां से मायूस होकर लौटना पड़ता है।
दरअसल, डाकघरों में ऑनलाइन व्यवस्था की बजह से बगैर बार कोड के रजिस्ट्री व स्पीड पोस्ट के पत्रों को प्रेषित नहीं किया जा सकता। डाकघर में रजिस्ट्री बार कोड नहीं होने के कारण ग्राहक वापस हो रहे हैं। इनमें अधिकांश लोग पैरवी और नोटिस के भी मामलों से जुड़े हैं। पंजीकृत डाक से कोई भी पत्र भेजना चाह रहे हैं तो उनके सामने स्पीड पोस्ट ही एक मात्र विकल्प है। स्पीड पोस्ट को चुनने पर रजिस्ट्री की तुलना में ग्राहकों पर 20 रुपये की अतिरिक्त चपत लग रही है। राजस्व मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार गुप्ता बताते हैं कि न्यायालय की नोटिस पंजीकृत डाक से ही मान्य होती है।डाकघर में रजिस्ट्री पटल देख रहे लिपिक दिनेश कुमार ने बताया कि ऊपर से ही बार कोड कम मिलते हैं। डिमांड हर समय की जाती है। जल्द समस्या का समाधान हो, इसके लिए पत्राचार कर रहे हैं।
बार कोड क्या है-
रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट व पार्सल के लिए डाकघरों में अलग-अलग बार कोड होता है। बार कोड नंबर से पत्र प्रेषण का ब्योरा ऑनलाइन दर्ज हो जाता है। इससे स्थिति ऑनलाइन उपभोक्ताा देख सकता है। बार कोड एक स्टीकर के रूप में होता है, जिसे पत्र भेजने के समय लिफाफे पर चिपका दिया जाता है।
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यह बोले लोग
कोट
रजिस्ट्री करने के लिए जाते हैं तो डाकखाने में बार कोड की कमी मिलती है। कर्मचारियों से पता करते हैं तो वह डिमांड भेजने की बात कहकर इति श्री कर लेते हैं। जरूरी रजिस्ट्री करनी होती है, लेकिन इन दिनों बार कोड न होने के चलते नहीं कर पा रहे हैं।
पुनीत वार्ष्णेय, अधिवक्ता।
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कोट
तमाम सरकारी ऐसे पत्र और नोटिस होते हैं, जो अदालत संबंधी होते हैं और उन्हें सिर्फ रजिस्ट्री के माध्यम से ही भेजा जा सकता है। चेक बाउंस के मामले में नोटिस भेजना बड़ा मुश्किल होता है। बार कोड न होने की बात कहकर कर्मी हाथ खड़े कर देते हैं। मजबूरी में फिर मुरादाबाद पहुंचकर रजिस्ट्री करनी पड़ती है।
मोहम्मद सलीम, अधिवक्ता।
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कोट
वादी को रजिस्ट्री करने के लिए हर दिन भेजना रहता है। लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो पाती। कर्मचारी बार कोड न होने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। यह समस्या डेढ़ माह से बनी हुई है। कोई सुनने को तैयार नहीं है। मजबूरी में दूसरे स्थानों से रजिस्ट्री करानी पड़ रही है।
अजमत रियाज, अधिवक्ता।
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कोट
रजिस्ट्री काउंटर पर बार कोड नहीं मिलता। मजबूरी में रजिस्ट्री कराने के लिए चंदौसी और सिरसी जाना पड़ रहा है। कई माह से समस्या बनी हुई है पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
नरेंद्र सिंह, अधिवक्ता।
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दरअसल, डाकघरों में ऑनलाइन व्यवस्था की बजह से बगैर बार कोड के रजिस्ट्री व स्पीड पोस्ट के पत्रों को प्रेषित नहीं किया जा सकता। डाकघर में रजिस्ट्री बार कोड नहीं होने के कारण ग्राहक वापस हो रहे हैं। इनमें अधिकांश लोग पैरवी और नोटिस के भी मामलों से जुड़े हैं। पंजीकृत डाक से कोई भी पत्र भेजना चाह रहे हैं तो उनके सामने स्पीड पोस्ट ही एक मात्र विकल्प है। स्पीड पोस्ट को चुनने पर रजिस्ट्री की तुलना में ग्राहकों पर 20 रुपये की अतिरिक्त चपत लग रही है। राजस्व मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार गुप्ता बताते हैं कि न्यायालय की नोटिस पंजीकृत डाक से ही मान्य होती है।डाकघर में रजिस्ट्री पटल देख रहे लिपिक दिनेश कुमार ने बताया कि ऊपर से ही बार कोड कम मिलते हैं। डिमांड हर समय की जाती है। जल्द समस्या का समाधान हो, इसके लिए पत्राचार कर रहे हैं।
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बार कोड क्या है-
रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट व पार्सल के लिए डाकघरों में अलग-अलग बार कोड होता है। बार कोड नंबर से पत्र प्रेषण का ब्योरा ऑनलाइन दर्ज हो जाता है। इससे स्थिति ऑनलाइन उपभोक्ताा देख सकता है। बार कोड एक स्टीकर के रूप में होता है, जिसे पत्र भेजने के समय लिफाफे पर चिपका दिया जाता है।
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रजिस्ट्री करने के लिए जाते हैं तो डाकखाने में बार कोड की कमी मिलती है। कर्मचारियों से पता करते हैं तो वह डिमांड भेजने की बात कहकर इति श्री कर लेते हैं। जरूरी रजिस्ट्री करनी होती है, लेकिन इन दिनों बार कोड न होने के चलते नहीं कर पा रहे हैं।
पुनीत वार्ष्णेय, अधिवक्ता।
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कोट
तमाम सरकारी ऐसे पत्र और नोटिस होते हैं, जो अदालत संबंधी होते हैं और उन्हें सिर्फ रजिस्ट्री के माध्यम से ही भेजा जा सकता है। चेक बाउंस के मामले में नोटिस भेजना बड़ा मुश्किल होता है। बार कोड न होने की बात कहकर कर्मी हाथ खड़े कर देते हैं। मजबूरी में फिर मुरादाबाद पहुंचकर रजिस्ट्री करनी पड़ती है।
मोहम्मद सलीम, अधिवक्ता।
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कोट
वादी को रजिस्ट्री करने के लिए हर दिन भेजना रहता है। लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो पाती। कर्मचारी बार कोड न होने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। यह समस्या डेढ़ माह से बनी हुई है। कोई सुनने को तैयार नहीं है। मजबूरी में दूसरे स्थानों से रजिस्ट्री करानी पड़ रही है।
अजमत रियाज, अधिवक्ता।
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रजिस्ट्री काउंटर पर बार कोड नहीं मिलता। मजबूरी में रजिस्ट्री कराने के लिए चंदौसी और सिरसी जाना पड़ रहा है। कई माह से समस्या बनी हुई है पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
नरेंद्र सिंह, अधिवक्ता।