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अनदेखी : 15 लाख से बनी सैनेटरी-नेपकिन यूनिट फांक रही धूल
Mon, 30 Sep 2024 02:58 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Mon, 30 Sep 2024 02:58 AM IST
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चंदौसी (संभल)। बनियाखेड़ा ब्लॉक पसिर में 15 लाख रुपये की लागत से स्थापित सैनेटरी नेपकिन उत्पादन यूनिट धूल फांक रही है। अधिकारियों की अनदेखी और बाजार के अभाव में कई साल से इस प्रोजेक्ट पर ताला लटका है।
सपा सरकार 2016 में पंचायत उद्योग के तहत बनियाखेड़ा ब्लॉक परिसर में सैनेटरी नेपकिन उत्पादन इकाई प्रोजेक्ट लेकर आई थी।। इसका उद्देश्य महिलाओं को बीमारियों से बचाव के लिए सस्ते पैड और रोजगार उपलब्ध कराना था। प्रत्येक जिले में प्रोजेक्ट के तौर पर एक-एक ब्लॉक में यह इकाई स्थापित की गई। जनपद के बनियाखेड़ा ब्लॉक में यह इकाई करीब 15 लाख रुपये की लागत से स्थापित की गई। साल 2017 में यूनिट बनकर तैयार हुई। आवश्यक मशीनें लगाने के बाद साल 2018 में इसका संचालन शुरू कर दिया गया। साथ ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को इससे जोड़ा गया। शुरुआत में पैड और नेपकिन तैयार कर बाजार में बेचा गया। लेकिन सही से मार्केटिंग नहीं हो पाई। नतीजतन तैयार माल को बाजार नहीं मिला। एक साल के भीतर ही प्रोजेक्ट पर ताला लग गया। साथ ही महिलाओं को बीमारियों से बचाव के लिए सस्ते पैड उपलब्ध कराने की शासन की मंशा भी अधूरी रह गई। हैरानी की बात है कि इसके संचालन के लिए एक बार भी मॉनीटरिंग और समीक्षा नहीं हुई। जिम्मेदारों ने भी दोबारा इसके संचालन के लिए कोई योजना नहीं बनाई। न ही किसी एनजीओ को जिम्मेदारी दी गई।
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9 व 11 रुपये में उपलब्ध कराए जा रहे थे पैड
यूनिट में तैयार पैड बाजार में नौ व ग्यारह रुपये में उपलब्ध कराए जा रहे थे। इनका दाम बाजार के पैड के मूल्य से कम था। लागत से ऊपर के लाभांश को यूनिट पर काम करने वाले कर्मचारियों को दिया जाना था।
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एक पैड बनाने में सात रुपये की लागत
विभाग से जुड़े लोगों ने बताया कि उत्पादन इकाई में दो मशीनें हैं। एक मशीन कपड़ों की कतरन को बिल्कुल बारीक कर देती है। दूसरी मशीन उसे कॉटन यानी रूई का रूप देती है। इसके बाद कारीगर हाथ से पैड तैयार करते हैं। एक पैड को तैयार करने में साढ़े छह से सात रुपये तक लागत आती है।
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वर्जन
सैनेटरी व नेपकिन उत्पादन यूनिट क्यों बंद पड़ी है, इसकी जानकारी की जाएगी। साथ ही दोबारा से संचालित कराने का प्रयास किया जाएगा। -कमलकांत, बीडीओ बनियाखेड़ा
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सपा सरकार 2016 में पंचायत उद्योग के तहत बनियाखेड़ा ब्लॉक परिसर में सैनेटरी नेपकिन उत्पादन इकाई प्रोजेक्ट लेकर आई थी।। इसका उद्देश्य महिलाओं को बीमारियों से बचाव के लिए सस्ते पैड और रोजगार उपलब्ध कराना था। प्रत्येक जिले में प्रोजेक्ट के तौर पर एक-एक ब्लॉक में यह इकाई स्थापित की गई। जनपद के बनियाखेड़ा ब्लॉक में यह इकाई करीब 15 लाख रुपये की लागत से स्थापित की गई। साल 2017 में यूनिट बनकर तैयार हुई। आवश्यक मशीनें लगाने के बाद साल 2018 में इसका संचालन शुरू कर दिया गया। साथ ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को इससे जोड़ा गया। शुरुआत में पैड और नेपकिन तैयार कर बाजार में बेचा गया। लेकिन सही से मार्केटिंग नहीं हो पाई। नतीजतन तैयार माल को बाजार नहीं मिला। एक साल के भीतर ही प्रोजेक्ट पर ताला लग गया। साथ ही महिलाओं को बीमारियों से बचाव के लिए सस्ते पैड उपलब्ध कराने की शासन की मंशा भी अधूरी रह गई। हैरानी की बात है कि इसके संचालन के लिए एक बार भी मॉनीटरिंग और समीक्षा नहीं हुई। जिम्मेदारों ने भी दोबारा इसके संचालन के लिए कोई योजना नहीं बनाई। न ही किसी एनजीओ को जिम्मेदारी दी गई।
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9 व 11 रुपये में उपलब्ध कराए जा रहे थे पैड
यूनिट में तैयार पैड बाजार में नौ व ग्यारह रुपये में उपलब्ध कराए जा रहे थे। इनका दाम बाजार के पैड के मूल्य से कम था। लागत से ऊपर के लाभांश को यूनिट पर काम करने वाले कर्मचारियों को दिया जाना था।
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एक पैड बनाने में सात रुपये की लागत
विभाग से जुड़े लोगों ने बताया कि उत्पादन इकाई में दो मशीनें हैं। एक मशीन कपड़ों की कतरन को बिल्कुल बारीक कर देती है। दूसरी मशीन उसे कॉटन यानी रूई का रूप देती है। इसके बाद कारीगर हाथ से पैड तैयार करते हैं। एक पैड को तैयार करने में साढ़े छह से सात रुपये तक लागत आती है।
वर्जन
सैनेटरी व नेपकिन उत्पादन यूनिट क्यों बंद पड़ी है, इसकी जानकारी की जाएगी। साथ ही दोबारा से संचालित कराने का प्रयास किया जाएगा। -कमलकांत, बीडीओ बनियाखेड़ा