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डाक्टर ही नहीं हैं तो कैसे चालू हो कोरोना से बचाव का लेवल टू अस्पताल
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संभल। कोरोना से जंग में संसाधनों की कमी आड़े आ रही है। लेवल टू का कोरोना अस्पताल सिर्फ इसलिए चालू नहीं हो सका क्योंकि डॉक्टर और चिकित्साकर्मी कम पड़ गए। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अजय कुमार सक्सेना ने बताया कि लेवल टू का अस्पताल नरौली में बनाया गया था लेकिन इसे बंद करना पड़ा क्योंकि फिजीशियन और एनेस्थेटिस्ट नहीं थे। इस विषय में स्वास्थ्य महानिदेशक को अवगत कराया गया है। जब तक यहां लेवल टू का अस्पताल चालू नहीं है तब तक कोरोना संक्रमित मरीजों को मुरादाबाद के टीएमयू ही भेजा जाएगा।
जिले में डाक्टरों के पद 123 स्वीकृत हैं। तैनाती केवल 42 डॉक्टरों की है लेकिन फिजीशियन एक भी नहीं है। एनेस्थेटिस्ट एक है। वह जिला अस्पताल में तैनात हैं जबकि कोरोना के लेवल टू अस्पताल का संचालन कराने के लिए तीन एनेस्थेटिस्ट चाहिए। तीन फिजीशियन भी होने चाहिए। सीएमओ का कहना है कि दवाएं तो हैं। सुविधाएं भी हैं। अस्पताल के भवन भी हैं लेकिन डाक्टरों के पद खाली होने से चिकित्सा सेवाओं के लिए दूसरे जनपदों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
एक दिन भी काम नहीं आए वेंटिलेटर
स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में वेंटिलेटर मंगाने में बड़ी जल्दी दिखाई थी। कोरोना काल शुरू होने पर बीते वर्ष 24 वेटिंलेटर मंगाए गए थे लेकिन एक भी वेंटिलेटर एक दिन भी नहीं चला। जिला अस्पताल में वेटिंलेटर रखे गए हैं। नरौली के अस्पताल में भी चार वेंटिलेटर रखे गए। आईसीयू बनाया गया लेकिन फिजीशियन न होने की वजह से इसका इस्तेमाल जिले का स्वास्थ्य विभाग नहीं कर सका।
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दवाई और चिकित्सा साधनों की कमी नहीं है लेकिन चिकित्सकों की संख्या कम होने की वजह से कोरोना की चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होती हैं। पड़ोसी जिले मुरादाबाद की मदद लेनी पड़ती है। अगर डॉक्टरों की पोस्टिंग हो जाए तो मरीजों को फायदा मिलेगा। कोरोना पर काबू पाना आसान होगा। डा. अजय कुमार सक्सेना, मुख्य चिकित्साधिकारी, संभल
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जिले में डाक्टरों के पद 123 स्वीकृत हैं। तैनाती केवल 42 डॉक्टरों की है लेकिन फिजीशियन एक भी नहीं है। एनेस्थेटिस्ट एक है। वह जिला अस्पताल में तैनात हैं जबकि कोरोना के लेवल टू अस्पताल का संचालन कराने के लिए तीन एनेस्थेटिस्ट चाहिए। तीन फिजीशियन भी होने चाहिए। सीएमओ का कहना है कि दवाएं तो हैं। सुविधाएं भी हैं। अस्पताल के भवन भी हैं लेकिन डाक्टरों के पद खाली होने से चिकित्सा सेवाओं के लिए दूसरे जनपदों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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एक दिन भी काम नहीं आए वेंटिलेटर
स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में वेंटिलेटर मंगाने में बड़ी जल्दी दिखाई थी। कोरोना काल शुरू होने पर बीते वर्ष 24 वेटिंलेटर मंगाए गए थे लेकिन एक भी वेंटिलेटर एक दिन भी नहीं चला। जिला अस्पताल में वेटिंलेटर रखे गए हैं। नरौली के अस्पताल में भी चार वेंटिलेटर रखे गए। आईसीयू बनाया गया लेकिन फिजीशियन न होने की वजह से इसका इस्तेमाल जिले का स्वास्थ्य विभाग नहीं कर सका।
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दवाई और चिकित्सा साधनों की कमी नहीं है लेकिन चिकित्सकों की संख्या कम होने की वजह से कोरोना की चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होती हैं। पड़ोसी जिले मुरादाबाद की मदद लेनी पड़ती है। अगर डॉक्टरों की पोस्टिंग हो जाए तो मरीजों को फायदा मिलेगा। कोरोना पर काबू पाना आसान होगा। डा. अजय कुमार सक्सेना, मुख्य चिकित्साधिकारी, संभल