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Sambhal News: नाै वर्ष पहले प्रधान और उनके परिवार का हुआ था नरसंहार, दहल उठा था जिला
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नरसंहार के आरोपी।
- फोटो : नरसंहार के आरोपी।
संभल। कुढ़फतेहगढ़ थाना क्षेत्र के गांव छाबड़ा में नाै वर्ष पहले उस समय की ग्राम प्रधान शकुंतला और उनके पति विशंबर व दो बेटे सुशील और सुनील की हत्या कर दी गई थी। मुरादाबाद की अदालत ने वर्ष 2023 में दो सगे भाई समेत चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। एक महिला समेत छह आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिए गए थे। शकुंतला देवी के बेटे कौशल चौहान ने बरी हो चुके लोगों के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है।
कौशल चौहान का कहना है कि अभी अपील सुनवाई में नहीं आई है लेकिन वह इंसाफ के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। घटना हुए भले नाै वर्ष होने को हैं लेकिन पीड़ित परिवार घटना को भूल नहीं पाया है। इस नरसंहार को शकुंतला देवी की दो बेटियों रुचि और सुरुचि ने अपनी आंखों से देखा था। वहीं दोनों बेटियां गवाह बनीं और चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा हो सकी। हालांकि बेटियां भी मिले इंसाफ से संतुष्ट नहीं है।
कौशल चौहान ने बताया कि 9 नवंबर 2016 को उनकी मां, पिता और दो सगे भाइयों की हत्या की गई थी। यह नरसंहार ग्राम प्रधान के चुनाव के दौरान हुई रंजिश के चलते अंजाम दी थी। बताया कि इसमें उनकी बहन रुचि ने कुढ़फतेहगढ़ थाने में एक नाबालिग समेत 13 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें 23 दिसंबर 2023 को चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा हुई थी, बाकी अन्य छह आरोपी बरी कर दिए गए। एक नाबालिग का मामला विचाराधीन है। दो आरोपी सुनवाई के दौरान मर गए थे। कौशल का कहना है कि उन्होंने हाईकोर्ट में जनवरी 2024 में अपील दायर की थी। अभी सुनवाई नहीं हो सकी है। कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी मां, पिता और दोनों भाइयों की हत्या का पूरा इंसाफ होगा।
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ग्राम प्रधानी के चुनाव से पैदा हुई थी रंजिश
शकुंतला और दूसरे पक्ष की महिला के बीच ग्राम प्रधान के चुनाव में मुकाबला हुआ था। दूसरा पक्ष गांव में दबदबा रखता था लेकिन जब शकुंतला चुनाव जीत गई तो रंजिश पैदा हो गई। कौशल चौहान ने बताया कि उनकी मां, पिता और दोनों भाइयों के शरीर में कई कई गोलियां मारी गई थीं। एक-एक शव में सात-आठ गोलियां पोस्टमार्टम के दौरान मिली थीं। बताया कि वह चौहान ठाकुर हैं, जबकि गांव छाबड़ा में ज्यादातर कठेरिया ठाकुर रहते हैं। उनके पिता विशंबर बदायूं के गांव केरई के रहने वाले थे। ननिहाल गांव छाबड़ा में थी तो वर्षों पहले यहीं आकर बस गए थे। इसके बाद राजनीति में सक्रिय हुए तो दूसरे पक्ष को यह बात हजम नहीं हुई।
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गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल गया था गांव
गांव छाबड़ा में जब यह नरसंहार किया गया था तो गोलियों की तड़तड़ाहट से गांव गूंज गया था। लोग घरों में कैद हो गए थे। सभी जानते थे कि यह नरसंहार चुनावी रंजिश में किया जा रहा है। पुलिस को गवाही भी शकुंतला की दोनों बेटियों ने दी थी। वह चश्मदीद थीं। अभी भी गांव के लोगों की जुबान पर यह घटना रहती है।
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अदालत के निर्णय के बाद से हटा ली गई थी सुरक्षा, अब मांग के बाद भी नहीं मिली
कौशल चौहान ने बताया कि दोनों भाइयों की हत्या के बाद वह अकेले बचे हैं। बहनों की शादी हो चुकी है। घटना के बाद तो सुरक्षा रही थी। जब निर्णय हुआ तो सुरक्षा वापस ले ली गई। जबकि गांव में रहते हुए उनके लिए असुरक्षा का माहौल है। वर्ष 2024 में कई बार डीएम और एसपी से सुरक्षा की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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कौशल चौहान का कहना है कि अभी अपील सुनवाई में नहीं आई है लेकिन वह इंसाफ के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। घटना हुए भले नाै वर्ष होने को हैं लेकिन पीड़ित परिवार घटना को भूल नहीं पाया है। इस नरसंहार को शकुंतला देवी की दो बेटियों रुचि और सुरुचि ने अपनी आंखों से देखा था। वहीं दोनों बेटियां गवाह बनीं और चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा हो सकी। हालांकि बेटियां भी मिले इंसाफ से संतुष्ट नहीं है।
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कौशल चौहान ने बताया कि 9 नवंबर 2016 को उनकी मां, पिता और दो सगे भाइयों की हत्या की गई थी। यह नरसंहार ग्राम प्रधान के चुनाव के दौरान हुई रंजिश के चलते अंजाम दी थी। बताया कि इसमें उनकी बहन रुचि ने कुढ़फतेहगढ़ थाने में एक नाबालिग समेत 13 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें 23 दिसंबर 2023 को चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा हुई थी, बाकी अन्य छह आरोपी बरी कर दिए गए। एक नाबालिग का मामला विचाराधीन है। दो आरोपी सुनवाई के दौरान मर गए थे। कौशल का कहना है कि उन्होंने हाईकोर्ट में जनवरी 2024 में अपील दायर की थी। अभी सुनवाई नहीं हो सकी है। कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी मां, पिता और दोनों भाइयों की हत्या का पूरा इंसाफ होगा।
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ग्राम प्रधानी के चुनाव से पैदा हुई थी रंजिश
शकुंतला और दूसरे पक्ष की महिला के बीच ग्राम प्रधान के चुनाव में मुकाबला हुआ था। दूसरा पक्ष गांव में दबदबा रखता था लेकिन जब शकुंतला चुनाव जीत गई तो रंजिश पैदा हो गई। कौशल चौहान ने बताया कि उनकी मां, पिता और दोनों भाइयों के शरीर में कई कई गोलियां मारी गई थीं। एक-एक शव में सात-आठ गोलियां पोस्टमार्टम के दौरान मिली थीं। बताया कि वह चौहान ठाकुर हैं, जबकि गांव छाबड़ा में ज्यादातर कठेरिया ठाकुर रहते हैं। उनके पिता विशंबर बदायूं के गांव केरई के रहने वाले थे। ननिहाल गांव छाबड़ा में थी तो वर्षों पहले यहीं आकर बस गए थे। इसके बाद राजनीति में सक्रिय हुए तो दूसरे पक्ष को यह बात हजम नहीं हुई।
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गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल गया था गांव
गांव छाबड़ा में जब यह नरसंहार किया गया था तो गोलियों की तड़तड़ाहट से गांव गूंज गया था। लोग घरों में कैद हो गए थे। सभी जानते थे कि यह नरसंहार चुनावी रंजिश में किया जा रहा है। पुलिस को गवाही भी शकुंतला की दोनों बेटियों ने दी थी। वह चश्मदीद थीं। अभी भी गांव के लोगों की जुबान पर यह घटना रहती है।
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अदालत के निर्णय के बाद से हटा ली गई थी सुरक्षा, अब मांग के बाद भी नहीं मिली
कौशल चौहान ने बताया कि दोनों भाइयों की हत्या के बाद वह अकेले बचे हैं। बहनों की शादी हो चुकी है। घटना के बाद तो सुरक्षा रही थी। जब निर्णय हुआ तो सुरक्षा वापस ले ली गई। जबकि गांव में रहते हुए उनके लिए असुरक्षा का माहौल है। वर्ष 2024 में कई बार डीएम और एसपी से सुरक्षा की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।