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Sambhal News: बंदर ने छह वर्षीय बालक को छत से गिराया, मौत

Tue, 01 Oct 2024 05:22 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Tue, 01 Oct 2024 05:22 AM IST
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Monkey drops six-year-old boy from roof, dies
जुनावई(संभल)। गांव असदपुर में रविवार की शाम बंदर ने गांव निवासी सतीश के इकलौते बेटे विराट (6) को रोटी का टुकड़ा छीनने के लिए छत से गिरा दिया। जिससे बालक की मौत हो गई। परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
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जुनावई के गांव असदपुर निवासी सतीश के परिवार में पत्नी बबीता के अलावा दो बच्चों में विराट बड़ा था। विराट गांव के ही प्राइमरी स्कूल में कक्षा एक में पढ़ता था। जबकि बेटी अनुष्का छोटी है। सतीश ने बताया कि रविवार की शाम विराट छत पर खेल रहा था। उसके हाथ मेें एक राेटी का टुकड़ा भी था। बताते हैं कि उसी समय बंदर रोटी छीनने के लिए उस पर झपट पड़ा और धक्के लगने से विराट छत से नीचे सड़क पर जा गिरा। आवाज सुनकर परिजन और आसपड़ोस के लोग पहुंच गए। बालक सड़क पर अचेत पड़ा था। परिजन उसे जुनावई के अस्पताल में लेकर आए। यहां उसे प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद बेहतर उपचार के लिए उसे रेफर कर दिया गया। अलीगढ़ जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। इकलौते बेटे की मौत से परिवार गमजदा है। मां बबीता का रो रोककर बुरा हाल है।
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दस माह पहले भी बंदर के हमले से गई थी बालिका की जान
करीब 10 माह पहले सिरसी के मोहल्ला गिन्नौरी में कमलदीप की छह वर्षीय बेटी कीर्ति की बंदरों के हमले में मौत हुई थी। नौ दिसंबर की सुबह कीर्ति अपने मकान की दूसरी मंजिल पर अपने दादा चंद्रपाल के साथ धूप में बैठी थी। इसी दौरान बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। बंदरों से बचने के लिए भागते समय बच्ची छत से गिर गई। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
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तीन दिन पहले घायल हुई थी महिला

चंदौसी के कैथल गांव में तीन दिन पहले बंदरों ने दीवार की ईंट गिरा दी। जिसमें गांव निवासी माया देवी सिर में ईंट लगने से गंभीर रूप से घायल हो गई। कई टांके सिर में आए थे। अब भी उनका उपचार चल रहा है। वहीं अप्रैल में बहजोई के इस्लामनगर बस अड्डा निवासी गुड्डू का 11 वर्षीय बेटा खुश मोहम्मद भी बंदराें के हमले में गंभीर रूप से हमला हुआ था। वह अपने घर के बाहर खेल रहा था। उसी समय बंदरों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया था।
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बंदरों का बढ़ रहा आतंक
शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में दिनों दिन बंदराें का आतंक बढ़ता जा रहा है। बंदर लोगों पर हमलावर हो रहे हैं। खासकर बच्चों को यह ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसका आंकलन इस बात से कर सकते हैं कि हर रोज चंदौसी अस्पताल में एंटी रेबीज लगवाने वाले लोगाें में 35 से अधिक संख्या बंदर के काटने वालों की हैं। उसमें सबसे ज्यादा शिकार बच्चे होते हैं। यहीं स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में है। गुन्नौर सीएचसी में रोजाना 40 से अधिक मरीज बंदरों के हमले में घायल होने वालों की है। यहां भी बच्चों की संख्या अधिक है। कुल मिलाकर बंदर बच्चों पर सबसे ज्यादा हमला कर रहे हैं।

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घर से निकलने से डरते हैं बच्चे
बंदरों का आतंक इस कदर है कि शहर में बच्चों ने घर से अकेले निकलना बंद कर दिया है। सुबह से सुबह शहर की अधिकांश सड़कों पर बंदराें की झुंड दिखाई देते हैं। ये बच्चों और बड़ों पर हमला कर देते है। साथ ही खाने पीने की चीजें पर छीन लेते हैं। यहां तक लोगों ने बंदरों के डर से छतों पर कपड़े सुखाने बंद कर दिए हैं। बंदर नए नए कपड़ों को फाड़ देते हैं।
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