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कीट पतंगों का प्रकोप, घरों में ब्लैक आउट
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Tue, 04 Oct 2016 01:37 AM IST
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सांकेतिक फोटो
- फोटो : LOGO
वायरल, मलेरिया, चिकनगुनिया आदि रोगों का प्रकोप जारी है। रात होते ही बल्बों और सीएफएल की दूधिया रोशनी में कीट पतंगे हमलावर हो जाते हैं। इससे लोगों को लाइट बंद करनी पड़ती है, जिससे घरों में ब्लैक आउट जैसे हालात हैं।
रात करीब आठ बजे से पूरी रात बड़ी संख्या में कीट पतंगे बल्ब व सीएफएल की रोशनी को घेर लेते हैं। इस कारण घरों में बच्चों व महिलाओं को तो भय सा लगने लगता है। बच्चों को अंधेरे कमरे में दुबकना पड़ जाता है। पढ़ाई के लिए भी रोशनी नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि रोशनी होते ही लाखों की संख्या में कीट पतंगे टूट पडते हैं।
शहर में स्ट्रीट लाइटों का तो यह हाल हो जाता है कि सड़क तक कीट पतंगों का एक गोला सा बन जाता है, उसके नीचे से निकलना भी दुश्वार हो जाता है। इनमें कई कीट पतंगे इतने जहरीले होते हैं कि वह काट लेते हैं तो काफी देर तक खुजली व जलन महसूस हो रहती है। लेकिन इसके बावजूद पालिका प्रशासन बेफिक्र है।
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जिलाधिकारी भूपेंद्र एस.चौधरी ने जिले में फैल रही बीमारियों को देखते हुए सभी स्थानीय निकायों को अभियान चलाकर रोजाना दो घंटे फागिंग करने के निर्देश दिए थे। फागिंग शुरू नहीं कराई गई है।
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रात करीब आठ बजे से पूरी रात बड़ी संख्या में कीट पतंगे बल्ब व सीएफएल की रोशनी को घेर लेते हैं। इस कारण घरों में बच्चों व महिलाओं को तो भय सा लगने लगता है। बच्चों को अंधेरे कमरे में दुबकना पड़ जाता है। पढ़ाई के लिए भी रोशनी नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि रोशनी होते ही लाखों की संख्या में कीट पतंगे टूट पडते हैं।
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शहर में स्ट्रीट लाइटों का तो यह हाल हो जाता है कि सड़क तक कीट पतंगों का एक गोला सा बन जाता है, उसके नीचे से निकलना भी दुश्वार हो जाता है। इनमें कई कीट पतंगे इतने जहरीले होते हैं कि वह काट लेते हैं तो काफी देर तक खुजली व जलन महसूस हो रहती है। लेकिन इसके बावजूद पालिका प्रशासन बेफिक्र है।
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जिलाधिकारी भूपेंद्र एस.चौधरी ने जिले में फैल रही बीमारियों को देखते हुए सभी स्थानीय निकायों को अभियान चलाकर रोजाना दो घंटे फागिंग करने के निर्देश दिए थे। फागिंग शुरू नहीं कराई गई है।