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Sambhal News: बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद की शिकायत के मामले में जांच कल से
Fri, 04 Sep 2026 01:57 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Fri, 04 Sep 2026 01:57 AM IST
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संभल। शहर के चौधरी सराय में स्थित बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद को अवैध निर्माण बताते हुए शिकायत की गई है। इसकी जांच शनिवार से शुरू होगी।
श्रीकल्कि सेना (निष्कलंक दल) के राष्ट्रीय संयोजक सुभाष चंद्र त्यागी ने यह शिकायत 31 अगस्त को डीएम अंकित खंडेलवाल से की थी। जिसमें दावा किया गया है कि 10 से 15 वर्ष के अंदर इस मस्जिद का विस्तार अवैध तरीके से किया गया है। साथ ही यह मस्जिद जामा मस्जिद की संपत्ति बताई गई है। संभल एसडीएम विकास चंद्र ने बताया कि इस मामले की जानकारी सामने आई है। इसकी जांच शनिवार से कराएंगे। जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई होगी।
वहीं, शिकायतकर्ता ने बताया है कि मस्जिद के निर्माण को किले जैसी संरचना का रूप दिया गया है। यह संपत्ति जामा मस्जिद की है। शिकायतकर्ता का दावा है कि जामा मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित इमारत है। गाटा संख्या 170/1 की 121 एयर और 170/3 की 61 एयर जमीन का उल्लेख है। राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन जामा मस्जिद के नाम दर्ज है। वहीं, मुतवल्ली इरशाद ने बताया कि वह 25 वर्ष से इस मस्जिद के मुतवल्ली हैं और यह जामा मस्जिद की संपत्ति नहीं है। यह वक्फ की संपत्ति है और सैकड़ों वर्ष पुरानी मस्जिद है।
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श्रीकल्कि सेना (निष्कलंक दल) के राष्ट्रीय संयोजक सुभाष चंद्र त्यागी ने यह शिकायत 31 अगस्त को डीएम अंकित खंडेलवाल से की थी। जिसमें दावा किया गया है कि 10 से 15 वर्ष के अंदर इस मस्जिद का विस्तार अवैध तरीके से किया गया है। साथ ही यह मस्जिद जामा मस्जिद की संपत्ति बताई गई है। संभल एसडीएम विकास चंद्र ने बताया कि इस मामले की जानकारी सामने आई है। इसकी जांच शनिवार से कराएंगे। जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई होगी।
वहीं, शिकायतकर्ता ने बताया है कि मस्जिद के निर्माण को किले जैसी संरचना का रूप दिया गया है। यह संपत्ति जामा मस्जिद की है। शिकायतकर्ता का दावा है कि जामा मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित इमारत है। गाटा संख्या 170/1 की 121 एयर और 170/3 की 61 एयर जमीन का उल्लेख है। राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन जामा मस्जिद के नाम दर्ज है। वहीं, मुतवल्ली इरशाद ने बताया कि वह 25 वर्ष से इस मस्जिद के मुतवल्ली हैं और यह जामा मस्जिद की संपत्ति नहीं है। यह वक्फ की संपत्ति है और सैकड़ों वर्ष पुरानी मस्जिद है।
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