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संभल जिले में फिर शुरू हो रहे हैं उद्योग, मिलेगा रोजगार
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संभल/सरायतरीन। जिले की 41 इकाइयों ने उद्योग विभाग में निर्धारित प्रारूप पर उद् घोषणा दाखिल करके अपने उद्योग चालू करने का एलान कर दिया है। उद्योग चालू होने से उन तमाम लोगों रोजगार मिलेगा जो लॉकडाउन की वजह अपने घरों में खाली बैठे थे। संभल जनपद ऑरेंज जोन में है। इस जोन के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित तमाम उद्योगों को कुछ प्रतिबंधों के साथ उत्पादक गतिविधियां शुरू करने के आदेश हैं।
सरायतरीन में क्राफ्ट इंडिया, मून लाइट एक्सपोर्ट और नीलकंठ इंटर प्राइजेस को अनुमति दी गई है। यह तीनों इकाइयां हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात से जुड़ीं हैं। इन तीनों इकाइयों में काम चालू हो गया है। कारीगरों को सीमित संख्या में बुलाया जा रहा है। सोशल डिस्टेंस का पालन कराया जा रहा है। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही कारीगरों को प्रवेश दिया जाता है। कारखानों में साबुन और सैनिटाइजर का इंतजाम किया गया है।
अधिकतर कारखानों में एक तिहाई संख्या में ही कारीगरों को बुलाया जा रहा है। जिला उद्योग के सहायक उपायुक्त अमित मोहन मिश्रा ने बताया कि संभल जिले में ऑरेंज जोन होने के बाद 41 इकाइयों ने उनके कार्यालय में उद् घोषणा दाखिल की थी। कोरोना से बचाव के उपाय करते हुए काम चालू करने की अनुमति मांगी थी। सभी को अनुमति दी गई है। उन्होंने बताया कि चंदौसी में पैकेजिंग से जुड़ी इकाइयों और कोल्ड स्टोरेज को भी काम चालू करने की अनुमति दी गई है जबकि संभल तहसील क्षेत्र में एक प्लाइवुड इंडस्ट्री को भी चालू कराया गया है।
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ट्रांसपोर्ट में दिक्कत, नहीं मिल रहा है कच्चा माल
संभल। हस्तशिल्प निर्यातकों के पास अपने ट्रांसपोर्ट का कोई इंतजाम नहीं है। लॉक डाउन की वजह से ट्रक बहुत संख्या में चल रहे हैं। इसलिए मुरादाबाद कंटेनर डिपो तक माल पहुंचाने में दिक्कत आ रही है। हस्तशिल्प बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल अलग-अलग प्रांतों से आता है।
संभल और सरायतरीन हड्डी सींग के हस्तशिल्प के लिए मशहूर है। इसे तैयार करने के लिए यादातर हड्डी सींग दूसरे राज्यों से आता है लेकिन जब से लॉक डाउन हुआ है तब से हड्डी सींग नहीं आया है। दूसरे कच्चे माल का अभाव है। अगर सरकार ने यह इंडस्ट्री चालू कराई है तो इसके लिए कच्चे माल की समस्या पर भी ध्यान देने की जरूरत है। निर्यातक कमल कौशल ने बताया कि हस्तशिल्प उद्योग चालू होते ही मजदूरों के चेहरे पर खुशी लौट आई है। वहीं विदेशों से आए आर्डर भी पूरे हो सकेंगे।
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सरायतरीन में क्राफ्ट इंडिया, मून लाइट एक्सपोर्ट और नीलकंठ इंटर प्राइजेस को अनुमति दी गई है। यह तीनों इकाइयां हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात से जुड़ीं हैं। इन तीनों इकाइयों में काम चालू हो गया है। कारीगरों को सीमित संख्या में बुलाया जा रहा है। सोशल डिस्टेंस का पालन कराया जा रहा है। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही कारीगरों को प्रवेश दिया जाता है। कारखानों में साबुन और सैनिटाइजर का इंतजाम किया गया है।
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अधिकतर कारखानों में एक तिहाई संख्या में ही कारीगरों को बुलाया जा रहा है। जिला उद्योग के सहायक उपायुक्त अमित मोहन मिश्रा ने बताया कि संभल जिले में ऑरेंज जोन होने के बाद 41 इकाइयों ने उनके कार्यालय में उद् घोषणा दाखिल की थी। कोरोना से बचाव के उपाय करते हुए काम चालू करने की अनुमति मांगी थी। सभी को अनुमति दी गई है। उन्होंने बताया कि चंदौसी में पैकेजिंग से जुड़ी इकाइयों और कोल्ड स्टोरेज को भी काम चालू करने की अनुमति दी गई है जबकि संभल तहसील क्षेत्र में एक प्लाइवुड इंडस्ट्री को भी चालू कराया गया है।
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ट्रांसपोर्ट में दिक्कत, नहीं मिल रहा है कच्चा माल
संभल। हस्तशिल्प निर्यातकों के पास अपने ट्रांसपोर्ट का कोई इंतजाम नहीं है। लॉक डाउन की वजह से ट्रक बहुत संख्या में चल रहे हैं। इसलिए मुरादाबाद कंटेनर डिपो तक माल पहुंचाने में दिक्कत आ रही है। हस्तशिल्प बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल अलग-अलग प्रांतों से आता है।
संभल और सरायतरीन हड्डी सींग के हस्तशिल्प के लिए मशहूर है। इसे तैयार करने के लिए यादातर हड्डी सींग दूसरे राज्यों से आता है लेकिन जब से लॉक डाउन हुआ है तब से हड्डी सींग नहीं आया है। दूसरे कच्चे माल का अभाव है। अगर सरकार ने यह इंडस्ट्री चालू कराई है तो इसके लिए कच्चे माल की समस्या पर भी ध्यान देने की जरूरत है। निर्यातक कमल कौशल ने बताया कि हस्तशिल्प उद्योग चालू होते ही मजदूरों के चेहरे पर खुशी लौट आई है। वहीं विदेशों से आए आर्डर भी पूरे हो सकेंगे।