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देखते-देखते शहर के बड़े हिस्से में फैल गया धुआं
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चंदौसी में शू कंपनी में लगी आग बुझाते दमकल कर्मी
- फोटो : CHANDAUSI
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चंदौसी। शू कंपनी की तीसरी मंजिल पर आग धधकी तो उससे निकला धुआं शहरभर में फैलने लगा। जूता चप्पल की प्लास्टिक व चमड़ा जलने की बदबू फैलने लगी। शोरूम कर्मियों ने देखा तो खलबली मच गई। शोरूम का सामान निकाला जाने लगा। लेकिन दूसरी मंजिल तक पहुंच गई। सूचना के करीब एक घंटे के बाद दो बजे चंदौसी फायर स्टेशन से दमकल मौके पर पहुंची। आग बुझाने के प्रयास शुरू किए गए लेकिन भवन में अंदर जाने का कोई और रास्ता नहीं होने के कारण सामने की खिड़की से पानी फेंका गया।
2.36 बजे दमकल का पानी खत्म हो गया। बिजली नहीं होने के कारण लोग सबमर्सिबल नहीं चला सके। जनरेटर से पड़ोसियों से सबमर्सिबल चलाकर किसी तरह दमकल के टैंकर में पानी भरा। 3.02 बजे दूसरी दमकल संभल से पहुंची। 3.10 बजे बबराला से दमकल पहुंची। 3.20 बजे बिलारी व चार बजे मुरादाबाद से दमकल पहुंची। लगातार आग बुझाने का सिलसिला जारी रहा। लेकिन आग और विकराल रूप धारण करती रही थी।
सबसे पहले सीओ पूनम मिश्रा, कोतवाली जितेंद्र सिंह ने पहुंचकर भीड़ को संभालना शुरू किया। आलम यह हो गया कि मकान की दीवार चटखने लगी और उनसे धुआं और आग निकलने लगी। खिड़कियों की सरियां लाल हो गई। देर शाम को एडीएम लवकुश त्रिपाठी भी मौके पर पहुंच गए। लगातार प्रयासों के बावजूद आग पर काबू पाना काफी मुश्किल हो रहा था।
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आसपास के मकानों में भी आग फैलने का खतरा उत्पन्न हो गया। करीब साढ़े छह घंटे के बाद शाम को 7.35 बजे आग पर काबू पाया जा सका। लेकिन तेज धुआं भरा होने के कारण लोग अभी तक अंदर नहीं जा पा रहे थे। आग लगने का अभी सही कारण ज्ञात नहीं हो सका है लेकिन आशंका है कि गोदाम में कहीं शार्ट सर्किट से आग लगी है।
पड़ोसियों से सबमर्शिबल से भरा दमकल का टैंकर
चंदौसी बिजली ने सोमवार को आपत्तिकाल में भी लोगों को परेशानी में डाला। यहां दिनभर ट्रिपिंग होती है। लोगों के पानी के टैंकर खाली थे। आखिरकार, पड़ोसी संजीव कुमार, सुनील कुमार अग्रवाल, फकीरचंद्र यादव, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, मनोज कुमार, नीरज पाल, डा.आहूजा आदि के सबमर्शिबल को जनरेटर से चलाकर किसी तरह दमकल के टैंकर में पानी भरा गया। आग पर सीधे में बौछार करके बुझाने का प्रयास किया गया।
आग लगी तो खुद ही तैयार रहें, दमकल विभाग अधिक मदद नहीं कर पाएगा
जिलेभर में चंदौसी, संभल व बबराला में तीन अग्रिशमन केंद्र हैं लेकिन तीनों की हालत खस्ता है। तीनों के पास सिर्फ एक एक गाड़ी ही है। सिर्फ 2700 लीटर वाली चंदौसी की दमकल सोमवार को लगी आग के बीच ही दम तोड़ गई।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रताप सिंह दो दिन के अवकाश पर है। चंदौसी अग्निशमन केंद्र के पास एक फायर इंजिन (घोल का फव्वारा फेंकने वाला) है लेकिन वह आज असमोली गया हुआ है। केंद्र पर सिर्फ 2700 लीटर क्षमता वाली एक ही दमकल थी। पहले जिसमें पानी भरा गया। उसके बाद गाड़ी मौके पर पहुंची। मौके पर पहुंचने पर उसे करीब एक घंटे के समय लगा। लेकिन कुछ देर बाद उसका पानी खत्म हो गया। संभल व बबराला के पास भी 5500-5500 लीटर क्षमता वाली एक एक दमकल ही है। सीएफओ ने बताया कि संभल व चंदौसी के पास एक एक गाड़ी पुरानी थी, जो कंडम होकर नीलाम हो चुकी है, नई गाड़ियों के लिए प्रस्ताव भेजा गया है लेकिन अभी तक गाड़ियां मिली नहीं है। इसलिए दमकल विभाग पर किसी बड़ी आग लगने पर अधिक भरोसा नहीं किया जा सकता है। लोगों को ऐसे आपत्तिकाल के लिए स्वयं ही तैयार रहना होगा।
चंदौसी के आसमान पर छाया काला धुआं, फैली दहशत
जगदंबा शू कंपनी के गोदाम में आग लगी तो जूता चप्पलों के जलने से धुएं का गुबार उठा तो आसमान पर धुआं ही धुआं नजर आने लगा। वातावरण में प्लास्टिक और चमड़ा आदि जलने की बदबू बिखर गई। धीरेंद्र वार्ष्णेय के मकान चारो ओर से मकानों से घिरा हुआ है। इसके कारण उनके मकान पर पहुंचना मुश्किल हो रहा था। लगातार जूता चप्पलों की प्लास्टिक, चमड़ा, रेक्सीन आदि जला तो माहौल बदबूदार हो गया। आसमान पर ऊंचाई तक धुआं ही धुआं नजर आने लगा। जिससे पूरे शहर में दहशत का माहौल हो गया। गनीमत रही कि इस समय हवा तेज नहीं चल रही थी, अन्यथा आग की लपटे दूसरे घरों तक भी पहुंच सकती थी।
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2.36 बजे दमकल का पानी खत्म हो गया। बिजली नहीं होने के कारण लोग सबमर्सिबल नहीं चला सके। जनरेटर से पड़ोसियों से सबमर्सिबल चलाकर किसी तरह दमकल के टैंकर में पानी भरा। 3.02 बजे दूसरी दमकल संभल से पहुंची। 3.10 बजे बबराला से दमकल पहुंची। 3.20 बजे बिलारी व चार बजे मुरादाबाद से दमकल पहुंची। लगातार आग बुझाने का सिलसिला जारी रहा। लेकिन आग और विकराल रूप धारण करती रही थी।
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सबसे पहले सीओ पूनम मिश्रा, कोतवाली जितेंद्र सिंह ने पहुंचकर भीड़ को संभालना शुरू किया। आलम यह हो गया कि मकान की दीवार चटखने लगी और उनसे धुआं और आग निकलने लगी। खिड़कियों की सरियां लाल हो गई। देर शाम को एडीएम लवकुश त्रिपाठी भी मौके पर पहुंच गए। लगातार प्रयासों के बावजूद आग पर काबू पाना काफी मुश्किल हो रहा था।
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आसपास के मकानों में भी आग फैलने का खतरा उत्पन्न हो गया। करीब साढ़े छह घंटे के बाद शाम को 7.35 बजे आग पर काबू पाया जा सका। लेकिन तेज धुआं भरा होने के कारण लोग अभी तक अंदर नहीं जा पा रहे थे। आग लगने का अभी सही कारण ज्ञात नहीं हो सका है लेकिन आशंका है कि गोदाम में कहीं शार्ट सर्किट से आग लगी है।
पड़ोसियों से सबमर्शिबल से भरा दमकल का टैंकर
चंदौसी बिजली ने सोमवार को आपत्तिकाल में भी लोगों को परेशानी में डाला। यहां दिनभर ट्रिपिंग होती है। लोगों के पानी के टैंकर खाली थे। आखिरकार, पड़ोसी संजीव कुमार, सुनील कुमार अग्रवाल, फकीरचंद्र यादव, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, मनोज कुमार, नीरज पाल, डा.आहूजा आदि के सबमर्शिबल को जनरेटर से चलाकर किसी तरह दमकल के टैंकर में पानी भरा गया। आग पर सीधे में बौछार करके बुझाने का प्रयास किया गया।
आग लगी तो खुद ही तैयार रहें, दमकल विभाग अधिक मदद नहीं कर पाएगा
जिलेभर में चंदौसी, संभल व बबराला में तीन अग्रिशमन केंद्र हैं लेकिन तीनों की हालत खस्ता है। तीनों के पास सिर्फ एक एक गाड़ी ही है। सिर्फ 2700 लीटर वाली चंदौसी की दमकल सोमवार को लगी आग के बीच ही दम तोड़ गई।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रताप सिंह दो दिन के अवकाश पर है। चंदौसी अग्निशमन केंद्र के पास एक फायर इंजिन (घोल का फव्वारा फेंकने वाला) है लेकिन वह आज असमोली गया हुआ है। केंद्र पर सिर्फ 2700 लीटर क्षमता वाली एक ही दमकल थी। पहले जिसमें पानी भरा गया। उसके बाद गाड़ी मौके पर पहुंची। मौके पर पहुंचने पर उसे करीब एक घंटे के समय लगा। लेकिन कुछ देर बाद उसका पानी खत्म हो गया। संभल व बबराला के पास भी 5500-5500 लीटर क्षमता वाली एक एक दमकल ही है। सीएफओ ने बताया कि संभल व चंदौसी के पास एक एक गाड़ी पुरानी थी, जो कंडम होकर नीलाम हो चुकी है, नई गाड़ियों के लिए प्रस्ताव भेजा गया है लेकिन अभी तक गाड़ियां मिली नहीं है। इसलिए दमकल विभाग पर किसी बड़ी आग लगने पर अधिक भरोसा नहीं किया जा सकता है। लोगों को ऐसे आपत्तिकाल के लिए स्वयं ही तैयार रहना होगा।
चंदौसी के आसमान पर छाया काला धुआं, फैली दहशत
जगदंबा शू कंपनी के गोदाम में आग लगी तो जूता चप्पलों के जलने से धुएं का गुबार उठा तो आसमान पर धुआं ही धुआं नजर आने लगा। वातावरण में प्लास्टिक और चमड़ा आदि जलने की बदबू बिखर गई। धीरेंद्र वार्ष्णेय के मकान चारो ओर से मकानों से घिरा हुआ है। इसके कारण उनके मकान पर पहुंचना मुश्किल हो रहा था। लगातार जूता चप्पलों की प्लास्टिक, चमड़ा, रेक्सीन आदि जला तो माहौल बदबूदार हो गया। आसमान पर ऊंचाई तक धुआं ही धुआं नजर आने लगा। जिससे पूरे शहर में दहशत का माहौल हो गया। गनीमत रही कि इस समय हवा तेज नहीं चल रही थी, अन्यथा आग की लपटे दूसरे घरों तक भी पहुंच सकती थी।