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पथरी की सर्जरी में काट दी आंत, जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Sun, 16 Apr 2017 12:49 AM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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चंदौसी शहर के एक प्रसिद्ध हास्पिटल को चिकित्सीय लापरवाही काफी महंगी पड़ गई। महिला को पथरी की सर्जरी में आंतों के कट जाने पर जिला उपभोक्ता फोरम संभल ने चार लाख रुपये की क्षतिपूर्ति अदा करने का आदेश दिया है।
शहर के मुहल्ला बड़ा बाजार चंदौसी निवासी आशा पत्नी नवनीत कुमार के पेट में पथरी बताई गई थी। पेट में बार बार दर्ज होने पर उसने वर्ष-2012 के दिसंबर में पार्थ हास्पिटल मल्टी स्पेशलिटी एवं ट्रामा सेंटर चंदौसी में कार्यरत एक डाक्टर को दिखाया। चिकित्सक ने दूरबीन विधि से पथरी निकालने की सलाह दी।
आरोप है कि, दो जनवरी-2013 को हास्पिटल के काउंटर पर उसने दूरबीन विधि से पथरी निकालने के लिए दस हजार जमा कराए। लेकिन चिकित्सक ने दूरबीन विधि से पथरी न निकालकर पेट में चीरा लगाकर आपरेशन किया। चिकित्सक काशीपुर से आते थे, आपरेशन के बाद वह मरीज को छोड़कर चले गए। टांकों की जगह पस व खून रिसने लगा। बदबूदार मैला निकलने लगा।
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हास्पिटल से शिकायत की लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। परामर्श शुल्क व दवाइयों आदि के नाम पर भारी धनराशि वसूली की गई। दस दिन के बाद मरीज मरणासन्न स्थिति में आ गया। 15 जनवरी-2013 को उसे एम्स में ले जाया गया। बेड खाली न होने पर सफदरजंग हास्पिटल दिल्ली में भर्ती कराया। वहां चिकित्सकों ने बताया कि आपरेशन के दौरान आंत कट गई है।
आंत कटने की जानकारी पर मरीज ने अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के माध्यम से जिला उपभोक्ता फोरम में हास्पिटल की चिकित्सा व्यवस्था को चुनौती दी। उपभोक्ता फोरम ने दोनों पक्षों की बात सुनी। हास्पिटल की ओर से चिकित्सीय लापरवाही पाए जाने पर हास्पिटल पर चार लाख रुपये मरीज को अदा करने का आदेश दिया। चूंकि हास्पिटल ने क्षतिपूर्ति से बचने का बीमा कराया था, इसलिए क्षतिपूर्ति धनराशि बीमा कंपनी अदा करेगी।
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शहर के मुहल्ला बड़ा बाजार चंदौसी निवासी आशा पत्नी नवनीत कुमार के पेट में पथरी बताई गई थी। पेट में बार बार दर्ज होने पर उसने वर्ष-2012 के दिसंबर में पार्थ हास्पिटल मल्टी स्पेशलिटी एवं ट्रामा सेंटर चंदौसी में कार्यरत एक डाक्टर को दिखाया। चिकित्सक ने दूरबीन विधि से पथरी निकालने की सलाह दी।
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आरोप है कि, दो जनवरी-2013 को हास्पिटल के काउंटर पर उसने दूरबीन विधि से पथरी निकालने के लिए दस हजार जमा कराए। लेकिन चिकित्सक ने दूरबीन विधि से पथरी न निकालकर पेट में चीरा लगाकर आपरेशन किया। चिकित्सक काशीपुर से आते थे, आपरेशन के बाद वह मरीज को छोड़कर चले गए। टांकों की जगह पस व खून रिसने लगा। बदबूदार मैला निकलने लगा।
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हास्पिटल से शिकायत की लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। परामर्श शुल्क व दवाइयों आदि के नाम पर भारी धनराशि वसूली की गई। दस दिन के बाद मरीज मरणासन्न स्थिति में आ गया। 15 जनवरी-2013 को उसे एम्स में ले जाया गया। बेड खाली न होने पर सफदरजंग हास्पिटल दिल्ली में भर्ती कराया। वहां चिकित्सकों ने बताया कि आपरेशन के दौरान आंत कट गई है।
आंत कटने की जानकारी पर मरीज ने अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के माध्यम से जिला उपभोक्ता फोरम में हास्पिटल की चिकित्सा व्यवस्था को चुनौती दी। उपभोक्ता फोरम ने दोनों पक्षों की बात सुनी। हास्पिटल की ओर से चिकित्सीय लापरवाही पाए जाने पर हास्पिटल पर चार लाख रुपये मरीज को अदा करने का आदेश दिया। चूंकि हास्पिटल ने क्षतिपूर्ति से बचने का बीमा कराया था, इसलिए क्षतिपूर्ति धनराशि बीमा कंपनी अदा करेगी।