{"_id":"62645a13ec1af325b9447117","slug":"due-to-lack-of-awareness-children-s-beds-are-lying-vacant-in-the-district-hospital-reaching-private-hospitals-for-treatment-sambhal-news-mbd425752921","type":"story","status":"publish","title_hn":"जागरूकता के अभाव में जिला अस्पताल में खाली पड़े हैं बच्चों के बेड, निजी अस्पतालों में पहुंच रहे इलाज कराने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जागरूकता के अभाव में जिला अस्पताल में खाली पड़े हैं बच्चों के बेड, निजी अस्पतालों में पहुंच रहे इलाज कराने
विज्ञापन
संभल। मौसम परिवर्तित होने के साथ ही मौसमी बीमारियों का दौर शुरू हो गया है। इसमें बड़ों से ज्यादा बच्चे बीमार पड़ रहें हैं। ऐसे में सदर अस्पताल में बेहतर सुविधा होने के बाद भी अभिभावक बच्चों का उपचार कराने के लिए निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। यह दावा पिडियाट्रिक विभाग के डॉ.रामलाल यादव और डा. मोहम्मद सरताज ने किया। बोले सरकारी अस्पताल में व्याप्त सुविधाओं से अनभिज्ञ होने के कारण अभिभावकों को निजी अस्पतालों में उपचार के नाम पर अच्छा खासा धन खर्च करना पड़ रहा।
बोले जिला अस्पताल के पिडियाट्रिक विभाग में दो -दो बाल रोग विशेषज्ञों के साथ-साथ बच्चों के इलाज के लिए बेहतर सुविधाएं मौजूद हैं। बच्चों के उपचार के लिए अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध होने के बाद भी सदर अस्पताल का बच्चा वार्ड खाली पड़ा है, वहीं निजी अस्पतालों में मौसमी बीमारी से पीड़ित बच्चों से बेड भरे पड़े हैं। प्रतिदिन 80 से 100 बच्चे मौसमी बीमारी से ग्रस्त निजी अस्पतालों में उपचार कराने पहुंच रहे हैं। इन निजी अस्पतालों में पांच से छह बच्चे डायरिया रोग से पीड़ित पहुंच रहे हैं। इन अस्पतालों में दो से तीन दिन में छुट्टी करने के बाद बच्चों के अभिभावकों से मोटी रकम वसूली जाती है। वहीं जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 40 से 50 बच्चे पहुंच रहे हैं, जिसमें 30 से 35 बच्चों में वायरल बुखार, सर्दी, खांसी, उल्टी, दस्त के मरीज रहते हैं। लेकिन भर्ती नहीं हो पाते हैं। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. मोहम्मद सरताज ने बताया कि जिला अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए बेहतर सुविधाएं हैं। लेकिन जागरूकता के अभाव के चलते बच्चों के अभिभावक बच्चों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों में ले जाते हैं।
-----------------------------
जिला अस्पताल में मौजूद है ये सुविधाएं
संभल। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. रामलाल यादव और डा. मोहम्मद सरताज ने बताया कि पिडियाट्रिक वार्ड में दो बाल रोग विशेषज्ञ के साथ पीकू वार्ड भी बनकर तैयार हो चुका है। गंभीर बच्चों के लिए वेंटिलेटर की भी व्यवस्था है। सबसे महत्वपूर्ण दवाएं भी उपलब्ध हैं। इसके बाद भी अभिभावक अपने बच्चों का उपचार कराने के लिए निजी अस्पताल का रुख कर रहें हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बोले जिला अस्पताल के पिडियाट्रिक विभाग में दो -दो बाल रोग विशेषज्ञों के साथ-साथ बच्चों के इलाज के लिए बेहतर सुविधाएं मौजूद हैं। बच्चों के उपचार के लिए अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध होने के बाद भी सदर अस्पताल का बच्चा वार्ड खाली पड़ा है, वहीं निजी अस्पतालों में मौसमी बीमारी से पीड़ित बच्चों से बेड भरे पड़े हैं। प्रतिदिन 80 से 100 बच्चे मौसमी बीमारी से ग्रस्त निजी अस्पतालों में उपचार कराने पहुंच रहे हैं। इन निजी अस्पतालों में पांच से छह बच्चे डायरिया रोग से पीड़ित पहुंच रहे हैं। इन अस्पतालों में दो से तीन दिन में छुट्टी करने के बाद बच्चों के अभिभावकों से मोटी रकम वसूली जाती है। वहीं जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 40 से 50 बच्चे पहुंच रहे हैं, जिसमें 30 से 35 बच्चों में वायरल बुखार, सर्दी, खांसी, उल्टी, दस्त के मरीज रहते हैं। लेकिन भर्ती नहीं हो पाते हैं। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. मोहम्मद सरताज ने बताया कि जिला अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए बेहतर सुविधाएं हैं। लेकिन जागरूकता के अभाव के चलते बच्चों के अभिभावक बच्चों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों में ले जाते हैं।
विज्ञापन
-----------------------------
जिला अस्पताल में मौजूद है ये सुविधाएं
संभल। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. रामलाल यादव और डा. मोहम्मद सरताज ने बताया कि पिडियाट्रिक वार्ड में दो बाल रोग विशेषज्ञ के साथ पीकू वार्ड भी बनकर तैयार हो चुका है। गंभीर बच्चों के लिए वेंटिलेटर की भी व्यवस्था है। सबसे महत्वपूर्ण दवाएं भी उपलब्ध हैं। इसके बाद भी अभिभावक अपने बच्चों का उपचार कराने के लिए निजी अस्पताल का रुख कर रहें हैं।
विज्ञापन