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ोरोना काल में गिलोय की मांग बढ़ी मांग, अब जंगलों में तलाश रहे गिलोय

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2020 11:45 PM IST
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demand of giloy in corona period
संभल। गिलोय की मौजूदा समय में बढ़ी मांग सामने आ रही है। कोरोना काल से पहले गिलोय को कम ही लोग पूछते थे लेकिन अब कुछ लोगों के लिए यह रोजगार का जरिया है। ई-रिक्शों में भरकर जंगलों से गिलोय काटकर लाई जा रही है। कुछ लोग हाथों हाथ बेच रहे हैं। गिलोय खरीदारी संभल के एक दो लोग कर रहे हैं। इसलिए लोग गिलोय को तलाश कर बेच रहे हैं। इसकी बिक्री 400-500 रुपये प्रति क्विंटल बेची जा रही है।
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गिलोय की लकड़ी को आयुर्वेद में रोग प्रतिरोधक माना गया है। वैैसे आम बोलचाल में लोग जंगली बेल की लकड़ी कहते हैं। इसको कुछ लोग बुखार होने पर इस्तेमाल करते हैं। इसका रस निकाल कर पीया जाता है। बताते हैं कि इससे बुखार और अन्य कई बीमारियों से राहत मिलती है। हालांकि बुखार होने पर कम ही लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। इन दिनों तमाम लोग जंगलों में गिलोय की लकड़ी की तलाश में जुटे हुए हैं। यह गिलोय की बेल अक्सर पेड़ों से लिपटी होती है जिसको तोड़ने पर तरल पदार्थ निकलता है। कोरोना का संक्रमण बढ़ने के साथ ही गिलोय की मांग बढ़ गई। लोगों को इसकी जानकारी हुई तो जंगलों में तलाश शुरू कर द। जिसको भी गिलोय की लकड़ी मिल रही है। वह बेचने को ले जा रहा है। चंदौसी से हिंदुस्तान मिंट के एमडी फूल प्रकाश ने कहा कि गिलोय का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है। उनकी फैक्टरी 400 रुपये प्रति क्विंटल में गिलोय खरीदती है। इसके बाद गिलोय का रस निकाला जाता है जो दवा बनाने वाली कंपनियों को भेजा जाता है।
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