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भूल गई मैं सारी बातें एक फसाना याद रहा...
ब्यूरो/अमर उजाला चंदौसी
Updated Wed, 30 Sep 2015 12:45 AM IST
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भूल गई मैं सारी बातें एक फसाना याद रहा। मेरी शादी के दिन उसका शहर से जाना याद रहा। एटा से आईं कवियत्री योगिता चौहान की इन पंक्तियों से माहौल खुशनुमा हो गया। श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं। मंगलवार को मेला गणेश चौथ के नटराज मंच पर कवियों ने अपनी रचनाओं के पाठ से कवि सम्मेलन में समा बांध दिया।
नटराज मंच पर आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ एमएलसी परमेश्वर लाल सैनी ने किया। कवियत्री गौरी मिश्रा ने पतझड़ी रास्तों के किसी मोड़ पे, मखमली साज देके उठा लो मुझे पंक्ति सुनाकर श्रोताओं के मन को मोह लिया। दिल्ली से आए सुनहरीलाल ने बंद पैकेट का नया माल बदल देते हैं, लोग बनते ही बड़े चाल बदल देते हैं।
मोहन मुंतजिर ने तसब्बुर में मेरे हर एक लम्हा खो रही होगी। पानीपत से आए योगेंद्र ने अपनी पंक्तियां कुछ इस तरह पढ़ीं। सर्वेक्षण होने लगा निकली बात अजीब, जितने लोग शरीफ थे उतने लोग गरीब। कानपुर से आए केके अग्निहोत्री ने कहा कि आज कल जो नंगा है, भला है चंगा हैं।
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फक्कड़ मुरादाबादी ने कहा कि जो साधन था मनोरंजन का, वो चला गया साथ तुम्हारे। संचालन करते हुए सौरभकांत शर्मा ने अपनी रचना की पंक्तियां कुछ इस तरह पढ़ीं। झुकने दिया ही नहीं भारती का भाल कभी, राष्ट्रद्रोहियों की तलवार बनी चूड़ियां। रानी अश्व पे सवार दोनों हाथ तलवार, गोरों को तो भाल की पुकार बनीं चूड़ियां।
श्रोताओं के उत्साह और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कवि सम्मेलन देर रात संपन्न हुआ। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता फूल प्रकाश वार्ष्णेय ने की। मेला कमेटी के अधिकांश पदाधिकारी व गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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नटराज मंच पर आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ एमएलसी परमेश्वर लाल सैनी ने किया। कवियत्री गौरी मिश्रा ने पतझड़ी रास्तों के किसी मोड़ पे, मखमली साज देके उठा लो मुझे पंक्ति सुनाकर श्रोताओं के मन को मोह लिया। दिल्ली से आए सुनहरीलाल ने बंद पैकेट का नया माल बदल देते हैं, लोग बनते ही बड़े चाल बदल देते हैं।
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मोहन मुंतजिर ने तसब्बुर में मेरे हर एक लम्हा खो रही होगी। पानीपत से आए योगेंद्र ने अपनी पंक्तियां कुछ इस तरह पढ़ीं। सर्वेक्षण होने लगा निकली बात अजीब, जितने लोग शरीफ थे उतने लोग गरीब। कानपुर से आए केके अग्निहोत्री ने कहा कि आज कल जो नंगा है, भला है चंगा हैं।
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फक्कड़ मुरादाबादी ने कहा कि जो साधन था मनोरंजन का, वो चला गया साथ तुम्हारे। संचालन करते हुए सौरभकांत शर्मा ने अपनी रचना की पंक्तियां कुछ इस तरह पढ़ीं। झुकने दिया ही नहीं भारती का भाल कभी, राष्ट्रद्रोहियों की तलवार बनी चूड़ियां। रानी अश्व पे सवार दोनों हाथ तलवार, गोरों को तो भाल की पुकार बनीं चूड़ियां।
श्रोताओं के उत्साह और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कवि सम्मेलन देर रात संपन्न हुआ। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता फूल प्रकाश वार्ष्णेय ने की। मेला कमेटी के अधिकांश पदाधिकारी व गणमान्य लोग मौजूद रहे।