फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sambhal News ›   Committee claims that Neja fair has been held for nearly a thousand years

Sambhal News: कमेटी का दावा, करीब एक हजार साल से लग रहा नेजा मेला

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 18 Mar 2025 01:17 AM IST
विज्ञापन
Committee claims that Neja fair has been held for nearly a thousand years
नेजा मेला कमेटी के पदा​धिकारियों से बात करते एएसपी। - फोटो : नेजा मेला कमेटी के पदा​धिकारियों से बात करते एएसपी।
संभल। करीब एक हजार वर्ष से आयोजित होने वाले संभल के नेजा मेले का आयोजन इस बार नहीं होगा। पुलिस की ओर से कानून व्यवस्था न बिगड़े इसको देखते हुए अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। यह दावा है धार्मिक नगर नेजा कमेटी के अध्यक्ष शाहिद हुसैन मसूदी का। अध्यक्ष शाहिद हुसैन मसूदी का दावा है कि करीब एक हजार वर्ष से नेजे की ढाल लगाने और नेजा मेला करने की परंपरा चली आ रही है। अध्यक्ष ने बताया कि नेजा मेला सैयद सालार मसूद गाजी की याद में लगता चला आ रहा है।
विज्ञापन

हालांकि दूसरे समुदाय के द्वारा इसका विरोध कई वर्षों से लगातार किया जाता रहा है। एएसपी ने भी नेजा मेला कमेटी से स्पष्ट कहा है कि जिसने लूट की और हत्याएं की। उसकी याद में कोई भी आयोजन नहीं होने दिया जाएगा।
विज्ञापन

इस मेले के आयोजन के पीछे की वजह बताते हुए बताया कि संभल वर्ष 1015 के आसपास पृथ्वीराज चौहान की राजधानी थी। कहा जाता है कि वर्ष 1030 के आसपास पृथ्वीराज चौहान के बेटे की नजर संभल के शेख पचासे मियां की बेटी पर पड़ गई थी। शेख पचासे मियां की बेटी शादी करना नहीं चाहती थीं इसलिए उन्होंने सैयद सालार मसूद गाजी को इसकी सूचना भेजी थी। वह अपनी सेना के साथ संभल आए थे और पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध किया था। जिसमें पृथ्वीराज चौहान की पराजय हो गई थी। कमेटी अध्यक्ष ने बताया कि इस युद्ध में सैयद सालार मसूद गाजी के साथियों ने भी जान गंवाई थी। उनकी मजार संभल के आसपास बनाई गई हैं। उन्हीं मजार के आसपास मेले आयोजित किए जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

00000000000000
इन मजारों पर लगते हैं नेजा मेला
संभल, शहबाजपुरा सूरा नगला और बादल गुंबद पर एक-एक दिन का मेला लगता है। पहले दिन शाहबाजपुर सूरा नगला में हजरत भोले शाह भोले के मजार पर नेजा मेले का आयोजन किया जाता है। अगले दिन नगर पालिका परिसर में हजरत अहमद शाह के मजार पर नेजा मेला लगता है। तीसरे दिन हसनपुर रोड स्थित बादल गुंबद पर मेला आयोजित होता है। इन तीनों ही स्थानों पर चादरपोशी कर दुआएं मांगी जाती हैं।

000000000
होली से जुड़ा है इस मेले का इतिहास
होली के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को नेजा मेले की ढाल और झंडा लगाए जाने की परंपरा रही है। होली के बाद पड़ने वाले दूसरे मंगलवार को शहबाजपुर सूरानगला का मेला लगता है। इस मेले के लिए होली के बाद का ही समय तय है। इसी परंपरा से यह मनाते रहे हैं। कमेटी के अध्यक्ष ने बताया कि होली के बाद ही नेजा मेला की ढाल लगती आ रही है और दूसरे मंगलवार से नेजा मेला लगता चला आ रहा है। यह परंपरा ही शुरुआत से होने की जानकारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed