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खेल खेल में बच्चियों ने लगाई झोपड़ी में आग, नौ माह के शिशु की जलकर मौत
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गुन्नौर (संभल)। गांव गंगावास के जंगल में खेत पर खेल खेल में दो बच्चों ने झोपड़ी में आग लगा दी। आग से झोपड़ी में इन्हें बच्चों के नौ माह के भाई की जलकर मौत हो गई। बच्चे की मौत से परिजनों का रो- रोकर बुरा है। मृतक अपने माता पिता का अकेला बेटा था।
थाना गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के गांव गंगावास निवासी कल्याण सिंह अपनी पत्नी व पिता के साथ गेहूं की फसल की कटाई कर रहा था। खेत में बैठने के लिए एक झोपड़ी बना रखी थी। झोपड़ी में पड़ी चारपाई पर कल्याण सिंह का नौ माह का बेटा राघव सो रहा था। दो व चार साल की दो बेटियां वहीं खेल रही थीं। शाम करीब चार बजे कल्याण सिंह किसी काम से गांव आ गया। दोनों बेटियां वहीं खेल रही थीं। इस दौरान ही झोपड़ी में आग लग गई।
आग लगने पर दोनों बच्ची झोपड़ी से बाहर आ गईं और रोने लगीं। झोपड़ी में आग की लपटें उठती देखकर कल्याण सिंह की पत्नी व पिता की चीख निकल गई। दोनों झोपड़ी की ओर दौड़ पड़े। झोपड़ी के पास तक आने से पहले ही मासूम राघव की चारपाई आग से घिर गई। शोर सुनकर और आग की लपटें देखकर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण भी आ गए। बमुश्किल लोगों ने आग पर काबू पाया और राघव को झोपड़ी से बाहर निकाला। बाहर निकालने पर देखा तो राघव की मौत हो गई थी। राघव की मौत से परिजनों का रो- रो बुुरा हाल है।
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माता-पिता का अकेला बेटा था राघव
कल्याण की दो बड़ी बेटी हैं। एक बेटी चार वर्ष की व दूसरी बेटी दो वर्ष की है। तीसरे नंबर का सबसे छोटा बेटा राघव था। बच्चे की मौत के बाद उसकी मां बदहवास हालत में है। उसके आंसू रोके नहीं रूक रहे हैं। पिता कल्याण की हालत भी ठीक नहीं है।
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थाना गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के गांव गंगावास निवासी कल्याण सिंह अपनी पत्नी व पिता के साथ गेहूं की फसल की कटाई कर रहा था। खेत में बैठने के लिए एक झोपड़ी बना रखी थी। झोपड़ी में पड़ी चारपाई पर कल्याण सिंह का नौ माह का बेटा राघव सो रहा था। दो व चार साल की दो बेटियां वहीं खेल रही थीं। शाम करीब चार बजे कल्याण सिंह किसी काम से गांव आ गया। दोनों बेटियां वहीं खेल रही थीं। इस दौरान ही झोपड़ी में आग लग गई।
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आग लगने पर दोनों बच्ची झोपड़ी से बाहर आ गईं और रोने लगीं। झोपड़ी में आग की लपटें उठती देखकर कल्याण सिंह की पत्नी व पिता की चीख निकल गई। दोनों झोपड़ी की ओर दौड़ पड़े। झोपड़ी के पास तक आने से पहले ही मासूम राघव की चारपाई आग से घिर गई। शोर सुनकर और आग की लपटें देखकर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण भी आ गए। बमुश्किल लोगों ने आग पर काबू पाया और राघव को झोपड़ी से बाहर निकाला। बाहर निकालने पर देखा तो राघव की मौत हो गई थी। राघव की मौत से परिजनों का रो- रो बुुरा हाल है।
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माता-पिता का अकेला बेटा था राघव
कल्याण की दो बड़ी बेटी हैं। एक बेटी चार वर्ष की व दूसरी बेटी दो वर्ष की है। तीसरे नंबर का सबसे छोटा बेटा राघव था। बच्चे की मौत के बाद उसकी मां बदहवास हालत में है। उसके आंसू रोके नहीं रूक रहे हैं। पिता कल्याण की हालत भी ठीक नहीं है।