संभल में सनसनीखेज घटना: थाने में खुद को लगाई आग, एम्स में मौत; परिजनों ने पुलिस की जिद को ठहराया जिम्मेदार
संभल के धनारी थाने में खुद को आग लगाने वाले बगढेर गांव निवासी मोरध्वज की दिल्ली एम्स में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि गांव के विवाद में हिरासत में लिए गए उनके चचेरे भाई लखपत सिंह और रिश्ते के भतीजे भारत सिंह को समझौते के बावजूद पुलिस छोड़ने के बजाय शांतिभंग में चालान करने पर अड़ी थी, जबकि दूसरे पक्ष के व्यक्ति को छोड़ दिया गया था। इसी से नाराज होकर मोरध्वज ने थाने पहुंचकर खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली।
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धनारी थाने पहुंचकर पुलिस के प्रति नाराजगी जताते हुए खुद को आग लगाने वाले गांव बगढेर निवासी मोरध्वज के इस कदम की वजह दरोगा और सिपाहियों की जिद बताई जा रही है। मृतक के परिजनों का कहना है कि गांव में झगड़े पर मोरध्वज के चचेरे भाई लखपत सिंह और रिश्ते के भतीजे भारत सिंह को पकड़कर पुलिस थाने लाई थी।
दोनों पक्षों में समझौते के लिए रजामंदी बनने पर भी पुलिस दोनों को छोड़ने के बजाय शांतिभंग में चालान की तैयारी कर रही थी, जबकि दूसरे पक्ष से हिरासत में लिए शख्स को छोड़ दिया था। इस बात से नाराज होकर ही मोरध्वज ने खुद को आग लगा ली।
इलाज के दौरान दिल्ली एम्स में उसकी मौत हो गई। मोरध्वज के आग लगाते ही लखपत और भारत को थाने से रिहा कर दिया गया। रविवार को जहां पुलिस-पीएसी की मौजूदगी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मोरध्वज का अंतिम संस्कार हुआ, वहीं लखपत सिंह ने आपबीती के साथ पूरा वाकया बयां किया।
लखपत सिंह के मुताबिक बुधवार की रात गांव बगढेर में एक ग्रामीण के घर बच्चे के मुंडन की दावत में उनका गांव के ही तीन लोगों से विवाद हो गया था। इसमें दूसरे पक्ष के सुरेंद्र के सिर में चोट लगी थी। मौके पर पहुंची यूपी 112 पुलिस उन्हें (लखपत सिंह) और मोरध्वज के रिश्ते के भतीजे भारत सिंह को पकड़कर थाने ले गई थी। दूसरे पक्ष से भी एक को पकड़ा था। बृहस्पतिवार दोपहर में दोनों पक्षों के बीच समझौते के प्रयास शुरू हुए थे।
शाम तक प्रयास से समझौते के लिए आपसी रजामंदी बन रही थी। यह जानने पर भी पुलिस उन्हें और भारत को छोड़ने के स्थान पर शांतिभंग में कार्रवाई की बात कह रही थी। शाम को ही मोरध्वज थाने पर पहुंचा और खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली और जलती हुई अवस्था में परिसर के भीतर घुस आया। इस दौरान वह पुलिस पर परेशान करने का आरोप लगा रहा था, जो किसी के द्वारा बनाई गई वीडियो में रिकॉर्ड हुआ है। लखपत सिंह का कहना है कि इससे अफरा तफरी में आए पुलिसकर्मियों ने कंबल आदि डालकर आग बुझाई और उसे इलाज के लिए पहुंचाया।
दूसरी ओर पुलिस ने उन दोनों को थाने से ही छोड़ दिया, जबकि दूसरे पक्ष के आरोपी को पहले ही छोड़ चुकी थी। गंभीर रूप से झुलसे होने के कारण मेरठ और दिल्ली एम्स तक इलाज कराने पर भी मोरध्वज को बचाया नहीं जा सका। शनिवार को उसने दम तोड़ दिया।
दूसरे पक्ष ने बताया फैसला करना चाहते हैं
मृतक के भाई राकेश कुमार ने भी लखपत सिंह की तरह दो पक्षों में झगड़े के बाद समझौते की कोशिशों पर भी अपने लोगों की रिहाई के बजाय कार्रवाई की बात कहे जाने को मोरध्वज के गुस्से का कारण बताया है। राकेश का कहना है कि दूसरे पक्ष के व्यक्ति ने मोरध्वज को बताया था कि वह तो फैसला करना चाहते हैं लेकिन पुलिस कार्रवाई करने के लिए ही कह रही है। इससे परेशान होकर मोरध्वज ने आग लगा ली थी। राकेश का कहना है कि मृतक की दो पत्नियां हैं और पांच वर्ष का बेटा है। इन तीनों के सामने जीवन यापन का संकट आ गया है। इसलिए इनकी आर्थिक मदद होनी चाहिए।
परिजन उठा रहे सवाल
लखपत सिंह और मोरध्वज के परिजनों की इस तरह की बातें सामने आने पर सवाल उठ रहे हैं कि दोनों पक्षों में समझौते की कोशिशों के बाद भी जो पुलिस उन दोनों को छोड़ने को तैयार नहीं थी उसने मोरध्वज के आग लगाते ही दोनों को कैसे रिहा कर दिया। इन सवालों के सीधे जवाब पुलिसकर्मियों के पास नहीं हैं। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई का कहना है कि मृतक के परिवार की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है, क्योंकि किसी उकसाने में मोरध्वज के यह कदम उठाने की बात भी कही जा रही है।
मृतक के परिवार की ओर से कार्रवाई की कोई मांग नहीं की गई है। पुलिस अपने स्तर से जांच कर रही है। यदि किसी ने उकसाया है और पेट्रोल उपलब्ध कराया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी, संभल