{"_id":"5a00c0a94f1c1bd8538bb6e6","slug":"amerika-or-urop-me-nikli-mainthol-utpadon-ki-mang","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमेरिका और यूरोप में निकली मैंथॉल उत्पादों की मांग, बाजार में तेजी का तेवर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमेरिका और यूरोप में निकली मैंथॉल उत्पादों की मांग, बाजार में तेजी का तेवर
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Tue, 07 Nov 2017 02:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पिछले पंद्रह दिन में 300 रुपये प्रति किलोग्राम की तेजी हुई है। वहीं सीजन के शुरूआत में जो मैंथा आयल 950 रुपये प्रति किलोग्राम था वह अब 1550 से 1625 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। इसलिए कारोबारी और किसान दोनों उत्साहित हैं। लेकिन आगे बाजार भाव किस करवट बैठेगा? इस सवाल पर सबके आंकलन अलग अलग हैं और सबके आंकलन करने के आधार भी अलग ही हैं।
व्यापारियों का कहना है कि तेजी बरकरार रहने के बारे में कोई स्पष्ट बात नहीं कही जा सकती है क्योंकि बाजार भाव में जो उतार-चढ़ाव आया है उसके पीछे कुछ बड़े सटोरिये भी हो सकते हैं वहीं कुछ व्यापारियों का कहना है कि बाजार में माल कम है और मांग अधिक है। इसलिए तेजी आई है लेकिन आगे क्या होगा? इसका फैसला मांग और आपूर्ति के सिद्धांत से तय होगी।वहीं वर्तमान में भाव के उतार-चढ़ाव को लेकर कारोबारी और किसान दोनों उत्साहित है।
मैंथा ऑयल का भाव रिकार्ड तेजी की ओर
मैंथा ऑयल के बाजार भाव में तेजी का तेवर है। बाजार भाव रिकार्ड तेजी की ओर जा रहा है। निर्यातक आशुतोष रस्तोगी ने बताया कि मार्च 2012 में मैंथा ऑयल 2700 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक चुका है। उसके बाद पांच वर्ष मंदी के रहे। इसके चलते तमाम कारोबारी दूसरे व्यापार में चले गए। किसानों नेभी दूसरी फसलों को अपना लिया। लेकिन अब तेजी तेवर इसलिए आया क्योंकि बाजार में मांग है और मैंथा आयल की उपलब्धता कम है। भारत में फसल कम हुई है। दूसरी बात यह भी है कि सिंथेटिक मैंथॉल उतना असर नहीं दिखा सका जितनी उम्मीद की जा रही थी। जो खरीदार प्राकृतिक मैंथाल ले रहे थे वे भारत के प्राकृतिक मैंथॉल ही ले रहे हैं। इसलिए खपत बरकरार है।
विज्ञापन
व्यापारियों का कहना है कि तेजी बरकरार रहने के बारे में कोई स्पष्ट बात नहीं कही जा सकती है क्योंकि बाजार भाव में जो उतार-चढ़ाव आया है उसके पीछे कुछ बड़े सटोरिये भी हो सकते हैं वहीं कुछ व्यापारियों का कहना है कि बाजार में माल कम है और मांग अधिक है। इसलिए तेजी आई है लेकिन आगे क्या होगा? इसका फैसला मांग और आपूर्ति के सिद्धांत से तय होगी।वहीं वर्तमान में भाव के उतार-चढ़ाव को लेकर कारोबारी और किसान दोनों उत्साहित है।
विज्ञापन
मैंथा ऑयल का भाव रिकार्ड तेजी की ओर
मैंथा ऑयल के बाजार भाव में तेजी का तेवर है। बाजार भाव रिकार्ड तेजी की ओर जा रहा है। निर्यातक आशुतोष रस्तोगी ने बताया कि मार्च 2012 में मैंथा ऑयल 2700 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक चुका है। उसके बाद पांच वर्ष मंदी के रहे। इसके चलते तमाम कारोबारी दूसरे व्यापार में चले गए। किसानों नेभी दूसरी फसलों को अपना लिया। लेकिन अब तेजी तेवर इसलिए आया क्योंकि बाजार में मांग है और मैंथा आयल की उपलब्धता कम है। भारत में फसल कम हुई है। दूसरी बात यह भी है कि सिंथेटिक मैंथॉल उतना असर नहीं दिखा सका जितनी उम्मीद की जा रही थी। जो खरीदार प्राकृतिक मैंथाल ले रहे थे वे भारत के प्राकृतिक मैंथॉल ही ले रहे हैं। इसलिए खपत बरकरार है।
विज्ञापन