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पहले सिलाई फिर पढ़ाई, अनमता परवीन हाईस्कूल की मेरिट में नवें स्थान पर आई
Updated Sat, 10 Jun 2017 01:19 AM IST
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पहले सिलाई फिर पढ़ाई, अनमता हाईस्कूल की मेरिट में नवें पर आई
टॉपर बनने में आड़े नहीं आती गरीबी, अनमता ने कर दिखाया
पैरेंट्स और टीचर्स के मोटिवेशन से मिलता कामयाबी का रास्ता
अमर उजाला ब्यूरो
संभल। टॉपर बनने में साधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती है। फैमिली और टीचर्स का मोटिवेशन हो तो गांव गरीब के बच्चे भी कामयाबी की बुलंदियों को छू सकते हैं। बशर्ते उनकी स्कूलिंग रेगुलर हो और वे खुद पढ़ने के साथ आगे बढ़ने का जज्बा रखते हों। ऐसा ही कुछ संभल के अलकदीर हायर सेेंकेंड्री स्कूल की छात्रा अनमता परवीन से बातचीत में सामने आया है। अनमता परवीन का परिवार मजदूरपेशा है। लेकिन आर्थिक दिक्कतों के बाद भी उसकी पढ़ाई प्रभावित नहीं हुई। वह अपने स्कूल की रेगुलर छात्रा है। स्कूल के प्रिंसिपल शान मियां बताते हैं कि कितनी भी सर्दी गर्मी हो अनमता परवीन ने कभी स्कूल मिस नहीं किया। वैसे ही उनके स्कूल में एक घंटे का समय मोटिवेशन के लिए दिया जाता है। विषयवार पढ़ाई अपनी जगह है लेकिन जब बच्चों को आगे बढ़ने का हौसला मिलता है वे उम्मीद से ज्यादा रिजल्ट देते हैं। अनमता परवीन के माता-पिता सिलाई करते हैं। परिवार की तरक्की में अपना योगदान करने के लिए अनमता भी अपने हाथों से सिलाई करती है। वह स्कूल जाने से पहले और स्कूल आने के बाद भी सिलाई का काम भी करती है। परिवार और अपने लिए कमाई करने के बाद भी वह हाईस्कूल की मेरिट में नवें स्थान पर आई है। मंडी किशनदास सराय निवासी जियाउद्दीन और आसमां परवीन और इनके परिजन अपनी बेटी की कामयाबी पर खुश हैं। वे बेटी को डाक्टर बनाना चाहते हैं।
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टॉपर बनने में आड़े नहीं आती गरीबी, अनमता ने कर दिखाया
पैरेंट्स और टीचर्स के मोटिवेशन से मिलता कामयाबी का रास्ता
अमर उजाला ब्यूरो
संभल। टॉपर बनने में साधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती है। फैमिली और टीचर्स का मोटिवेशन हो तो गांव गरीब के बच्चे भी कामयाबी की बुलंदियों को छू सकते हैं। बशर्ते उनकी स्कूलिंग रेगुलर हो और वे खुद पढ़ने के साथ आगे बढ़ने का जज्बा रखते हों। ऐसा ही कुछ संभल के अलकदीर हायर सेेंकेंड्री स्कूल की छात्रा अनमता परवीन से बातचीत में सामने आया है। अनमता परवीन का परिवार मजदूरपेशा है। लेकिन आर्थिक दिक्कतों के बाद भी उसकी पढ़ाई प्रभावित नहीं हुई। वह अपने स्कूल की रेगुलर छात्रा है। स्कूल के प्रिंसिपल शान मियां बताते हैं कि कितनी भी सर्दी गर्मी हो अनमता परवीन ने कभी स्कूल मिस नहीं किया। वैसे ही उनके स्कूल में एक घंटे का समय मोटिवेशन के लिए दिया जाता है। विषयवार पढ़ाई अपनी जगह है लेकिन जब बच्चों को आगे बढ़ने का हौसला मिलता है वे उम्मीद से ज्यादा रिजल्ट देते हैं। अनमता परवीन के माता-पिता सिलाई करते हैं। परिवार की तरक्की में अपना योगदान करने के लिए अनमता भी अपने हाथों से सिलाई करती है। वह स्कूल जाने से पहले और स्कूल आने के बाद भी सिलाई का काम भी करती है। परिवार और अपने लिए कमाई करने के बाद भी वह हाईस्कूल की मेरिट में नवें स्थान पर आई है। मंडी किशनदास सराय निवासी जियाउद्दीन और आसमां परवीन और इनके परिजन अपनी बेटी की कामयाबी पर खुश हैं। वे बेटी को डाक्टर बनाना चाहते हैं।