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स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारी हड़ताल पर, मरीज भटकते दिखे
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संभल। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर संविदा कर्मी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। इसी क्रम में जिले भर के संविदा स्वास्थ्य कर्मी और आशाएं भी हड़ताल पर चले गए। जिससे जिले की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज दवाई लेने के लिए भटकते दिखाई दिए। बुधवार को जिला अस्पताल में दर्जनों मरीज दवाई लेने के लिए भटकते दिखे।
राजकीय चिकित्सालयों में अधिकांश कर्मचारी संविदा पर हैं। उनके हड़ताल पर जाने से व्यवस्था चौपट हो गई है। संगठन का दावा है कि हड़ताल में प्रदेश भर के 75 हजार संविदा कर्मचारी और दो लाख आशाएं शामिल हैं। जनपद संभल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ की ओर से चार सूत्री मांगों को पूरा करने के लिए कई बार ज्ञापन सौंपा जा चुका है।
इसके बाद भी मांगों को लेकर शासन-प्रशासन की ओर से कोई संज्ञान नहीं लिया गया। इसी के चलते संविदा कर्मचारी और आशाएं हड़ताल पर चले गए। जिससे जिले भर की स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई। इससे चिकित्सकीय सेवाएं, टीकाकरण, परीक्षण रिपोर्ट व अन्य कामकाज पटरी से उतर गया है। दर्जनों मरीज दवाई लेने के लिए परेशान होते रहे।
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इन मांगों को लेकर है हड़ताल संविदा कर्मियों की
संभल। संविदा कर्मी और आशाओं की प्रदेश व्यापी हड़ताल का मुख्य कारण मांगों को पूरा नहीं करना है। दरअसल संविदा कर्मचारी संघ की मांग है कि समान कार्य समान वेतन एवं विशिष्ट सेवा नीति लागू की जाए। आउट सोर्सिंग और ठेका प्रथा पर पूरी तरह रोकथाम की जाए। संविदा कार्मिकों का स्थायी समायोजन एवं नवीन पद सृजन हो, और आशा बहुओं का मानदेय निर्धारित किया जाए। जिससे वह अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें।
नियमित कर्मचारी भी रहे गैर-हाजिर
संभल। संविदा कर्मी प्रदेश भर में 21 जनवरी से हड़ताल पर हैं। इसी क्रम में बुधवार को संभल के समस्त संविदा कर्मी और आशाएं हड़ताल पर चले गए। जिससे कामकाज प्रभावित रहा। साथ ही संविदा कर्मियों के साथ नियमित कर्मचारी भी गायब दिखाई दिए। कई कक्षों में कुर्सियां ही सजी नजर आईं। जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस हड़ताल में सबसे अधिक परेशानी दूर-दराज से आए ग्रामीणों को हुई जो मायूस होकर अपने घरों को लौटे।
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राजकीय चिकित्सालयों में अधिकांश कर्मचारी संविदा पर हैं। उनके हड़ताल पर जाने से व्यवस्था चौपट हो गई है। संगठन का दावा है कि हड़ताल में प्रदेश भर के 75 हजार संविदा कर्मचारी और दो लाख आशाएं शामिल हैं। जनपद संभल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ की ओर से चार सूत्री मांगों को पूरा करने के लिए कई बार ज्ञापन सौंपा जा चुका है।
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इसके बाद भी मांगों को लेकर शासन-प्रशासन की ओर से कोई संज्ञान नहीं लिया गया। इसी के चलते संविदा कर्मचारी और आशाएं हड़ताल पर चले गए। जिससे जिले भर की स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई। इससे चिकित्सकीय सेवाएं, टीकाकरण, परीक्षण रिपोर्ट व अन्य कामकाज पटरी से उतर गया है। दर्जनों मरीज दवाई लेने के लिए परेशान होते रहे।
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इन मांगों को लेकर है हड़ताल संविदा कर्मियों की
संभल। संविदा कर्मी और आशाओं की प्रदेश व्यापी हड़ताल का मुख्य कारण मांगों को पूरा नहीं करना है। दरअसल संविदा कर्मचारी संघ की मांग है कि समान कार्य समान वेतन एवं विशिष्ट सेवा नीति लागू की जाए। आउट सोर्सिंग और ठेका प्रथा पर पूरी तरह रोकथाम की जाए। संविदा कार्मिकों का स्थायी समायोजन एवं नवीन पद सृजन हो, और आशा बहुओं का मानदेय निर्धारित किया जाए। जिससे वह अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें।
नियमित कर्मचारी भी रहे गैर-हाजिर
संभल। संविदा कर्मी प्रदेश भर में 21 जनवरी से हड़ताल पर हैं। इसी क्रम में बुधवार को संभल के समस्त संविदा कर्मी और आशाएं हड़ताल पर चले गए। जिससे कामकाज प्रभावित रहा। साथ ही संविदा कर्मियों के साथ नियमित कर्मचारी भी गायब दिखाई दिए। कई कक्षों में कुर्सियां ही सजी नजर आईं। जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस हड़ताल में सबसे अधिक परेशानी दूर-दराज से आए ग्रामीणों को हुई जो मायूस होकर अपने घरों को लौटे।