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मानसिक तनाव की चपेट में आ रहे युवा-अधेड़ उम्र के लोग
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सहारनपुर। जनपद के युवा और अधेड़ उम्र के लोग मानसिक तनाव की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल में मानसिक रोग ओपीडी में रोजाना 40 से 50 मानसिक रोगी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकांश युवा और अधेड़ उम्र के लोग शामिल हैं। यहां चिकित्सक ऐसे मरीजों को सकारात्मक सोच रखने और खुद को ज्यादा से ज्यादा समय देने की सलाह दे रहे हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल में पैथालॉजी के पास मनोरोग ओपीडी संचालित हैं। यहां सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को मानसिक रोगी देखे जाते हैं। 25 से 55 साल के लोग मनोरोगों की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। मानसिक तनाव से पीड़ित युवा अक्सर कोई गलत कदम उठा लेते हैं। ओपीडी में पहुंचने वाले मानसिक रोगियों को चिकित्सक और काउंसलर समय पर इलाज कराने की सलाह दे रहे हैं। ताकि समय रहते उसका सही उपचार हो सके और उसे मानसिक तनाव से छुटकारा दिलाया जा सके। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संजीव मांगलिक ने बताया कि मानसिक रोगों से पीड़ित व्यक्ति हमेशा परेशान या व्याकुल रहता है। इसके साथ ही उसमें उदासीनता, चिड़चिड़ापन, चिंताग्रस्त, खाने और सोने के व्यवहार में परिवर्तन, गुस्सा या अधिक ज्यादा बोझ, अकेले रहना आदि लक्षण देखने को मिलते हैं। उन्होंने लक्षण पाए जाने पर परिवार सदस्यों से व्यक्ति को मनो चिकित्सक के पास दिखाने का आग्रह किया है।
इस प्रकार तनाव को करें कम
मानसिक तनाव को कम करने के लिए सकारात्मक सोच रखें। खुद को ज्यादा से ज्यादा समय दें। उन लोगों से ज्यादा संपर्क में रहें जिन पर आपको भरोसा हो। सोशल मीडिया पर नकारात्मक संदेशों पर ध्यान न दें। योग और व्यायाम करें। पौष्टिकता युक्त भोजन का सेवन करें।
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एसबीडी जिला अस्पताल में पैथालॉजी के पास मनोरोग ओपीडी संचालित हैं। यहां सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को मानसिक रोगी देखे जाते हैं। 25 से 55 साल के लोग मनोरोगों की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। मानसिक तनाव से पीड़ित युवा अक्सर कोई गलत कदम उठा लेते हैं। ओपीडी में पहुंचने वाले मानसिक रोगियों को चिकित्सक और काउंसलर समय पर इलाज कराने की सलाह दे रहे हैं। ताकि समय रहते उसका सही उपचार हो सके और उसे मानसिक तनाव से छुटकारा दिलाया जा सके। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संजीव मांगलिक ने बताया कि मानसिक रोगों से पीड़ित व्यक्ति हमेशा परेशान या व्याकुल रहता है। इसके साथ ही उसमें उदासीनता, चिड़चिड़ापन, चिंताग्रस्त, खाने और सोने के व्यवहार में परिवर्तन, गुस्सा या अधिक ज्यादा बोझ, अकेले रहना आदि लक्षण देखने को मिलते हैं। उन्होंने लक्षण पाए जाने पर परिवार सदस्यों से व्यक्ति को मनो चिकित्सक के पास दिखाने का आग्रह किया है।
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इस प्रकार तनाव को करें कम
मानसिक तनाव को कम करने के लिए सकारात्मक सोच रखें। खुद को ज्यादा से ज्यादा समय दें। उन लोगों से ज्यादा संपर्क में रहें जिन पर आपको भरोसा हो। सोशल मीडिया पर नकारात्मक संदेशों पर ध्यान न दें। योग और व्यायाम करें। पौष्टिकता युक्त भोजन का सेवन करें।
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