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अमेरिका-इरान में खींचतान से वुडकार्विंग निर्यातक परेशान
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वुडकार्विंग निर्यातक शेख फैजान
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। अमेरिका और ईरान के बीच जारी खींचतान ने यहां विश्वविख्यात वुडकार्विग उद्योग से जुड़े निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही हालात सामान्य न हुए तो सहारनपुर वुडकार्विंग उत्पादों के निर्यात को करोड़ों का फटका लग सकता है। दरअसल, खाड़ी देशों में पिछले कुछ साल से गृह युद्ध जैसे हालात के कारण पहले ही इस उद्योग को 150 से 200 करोड़ रुपये सालाना की चपत लग चुकी है। ऐसे में वुडकार्विंग निर्यातक इस समय सबसे अधिक अमेरिका सहित अन्य यूरोपियन देशों पर ही निर्भर है।
- वुडकार्विंग मैन्युफैक्चरिंग एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष फैजान अहमद कहते हैं कि करीब दस साल पहले तक निर्यात और घरेलू वुडकार्विंग कारोबार करीब 2000 करोड़ रुपये सालाना तक होता था। उस समय यूरोपियन देशों के साथ ही खाड़ी देशों में निर्यात से वुडकार्विंग कारोबार पूरी चमक पर था, लेकिन इराक सहित अन्य खाड़ी देशों में गृह युद्ध और अन्य कारणों से अशांति का ऐसा असर पड़ा कि निर्यात में ही हर साल 150 से 200 करोड़ रुपये का नुकसान होने लगा। खाड़ी देशों के बाद अमेरिका के राज्यों पर ही 55 फीसदी से भी ज्यादा निर्यात की निर्भरता है। इन हालात में अमेरिका और ईरान के बीच खींचतान बढ़ती है या युद्ध जैसे हालात बनते हैं तो निश्चित रूप से निर्यात पर गंभीर असर पड़ेगा।
- एसोसिएशन के महासचिव एवं निर्यातक मोहम्मद औसाफ कहते हैं कि घरेलू स्तर पर ही यहां का वुडकार्विंग कारोबार दिल्ली, राजस्थान सहित अन्य हिस्सों में स्थानांतरित हो गया है। इसके चलते उत्पादों के निर्यात से मिलने वाली विदेशी मुद्रा पर निर्भरता बढ़ गई है। इस समय अमेरिका और यूरोपियन देशों में ही सबसे ज्यादा 500 से 600 करोड़ रुपये सालाना का निर्यात होता है, जबकि कुल निर्यात ही अब सिमटकर 900 से 1000 करोड़ सालाना तक आ गया है। इसलिए अमेरिका-ईरान के बीच खींचतान ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
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- एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और निर्यातक इरफान उल हक कहते हैं कि ऐसे हालात में यदि डॉलर बढ़ता है तो भी उससे अधिक फायदा नहीं होगा क्योंकि डॉलर तो तब मिलेंगे जब अन्य देशों से वुडकार्विंग उत्पादों के लिए आर्डर जारी रहेंगे। इनमें कोई ब्रेक आया तो निर्यात का संतुलन बिगड़ जाएगा। वे कहते हैं कि खाड़ी देशों से लगी चपत के बाद अमेरिका या अन्य यूरोपियन देशों में निर्यात प्रभावित हुआ तो कारोबार को फिर से सामान्य करने में लंबा वक्त लग सकता है। इसलिए वे तो यही दुआ कर रहे हैं कि यह खींचतान जल्द बंद हो ताकि निर्यात पर आगे कोई असर न हो।
वुडकार्विग कारोबार और निर्यात की सालाना स्थिति-
- वुडकार्विंग का कुल कारोबार 1400 से 1500 करोड़ रुपये
- वुडकार्विंग का कुल निर्यात 900 से 1000 करोड़ रुपये
- अमेरिका के राज्यों में निर्यात 400 से 500 करोड़ रुपये
- आस्ट्रेलिया में निर्यात 100 से 150 डरोड़ रुपये
- जर्मनी में निर्यात 150 से 160 करोड़ रुपये
- स्पेन में निर्यात 100 से 150 करोड़ रुपये
अमेरिका को बंद करनी होगी मनमानी
- कुछ दिन पहले ही ईरान में तेहरान सहित अन्य शहरों में भ्रमण कर लौटे नानौता क्षेत्र के निवासी इस्लामिक स्कालर मौलाना असद अली कहते हैं कि अमेरिका की यह पुरानी रीति रही है कि किसी भी देश में ऐसी अशांति पैदा कर अपने रक्षा उद्योग के साथ ही अपनी अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता रहा है। इस समय राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर भी वहां की स्थानीय जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। अमेरिका को यह मनमानी बंद करनी चाहिए। वैसे भी ईरान ऐसा इस्लामिक देश है जहां आतंक का भी ज्यादा असर नहीं रहा है। मगर अब वहां के हालात चिंताजनक हो रहे हैं। इन हालात का सामान्य होना जरूरी है। हमारे जिले के कुछ युवा भी वहां के इस्लामिक संस्थानों में अध्ययन करते हैं।
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- वुडकार्विंग मैन्युफैक्चरिंग एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष फैजान अहमद कहते हैं कि करीब दस साल पहले तक निर्यात और घरेलू वुडकार्विंग कारोबार करीब 2000 करोड़ रुपये सालाना तक होता था। उस समय यूरोपियन देशों के साथ ही खाड़ी देशों में निर्यात से वुडकार्विंग कारोबार पूरी चमक पर था, लेकिन इराक सहित अन्य खाड़ी देशों में गृह युद्ध और अन्य कारणों से अशांति का ऐसा असर पड़ा कि निर्यात में ही हर साल 150 से 200 करोड़ रुपये का नुकसान होने लगा। खाड़ी देशों के बाद अमेरिका के राज्यों पर ही 55 फीसदी से भी ज्यादा निर्यात की निर्भरता है। इन हालात में अमेरिका और ईरान के बीच खींचतान बढ़ती है या युद्ध जैसे हालात बनते हैं तो निश्चित रूप से निर्यात पर गंभीर असर पड़ेगा।
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- एसोसिएशन के महासचिव एवं निर्यातक मोहम्मद औसाफ कहते हैं कि घरेलू स्तर पर ही यहां का वुडकार्विंग कारोबार दिल्ली, राजस्थान सहित अन्य हिस्सों में स्थानांतरित हो गया है। इसके चलते उत्पादों के निर्यात से मिलने वाली विदेशी मुद्रा पर निर्भरता बढ़ गई है। इस समय अमेरिका और यूरोपियन देशों में ही सबसे ज्यादा 500 से 600 करोड़ रुपये सालाना का निर्यात होता है, जबकि कुल निर्यात ही अब सिमटकर 900 से 1000 करोड़ सालाना तक आ गया है। इसलिए अमेरिका-ईरान के बीच खींचतान ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
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- एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और निर्यातक इरफान उल हक कहते हैं कि ऐसे हालात में यदि डॉलर बढ़ता है तो भी उससे अधिक फायदा नहीं होगा क्योंकि डॉलर तो तब मिलेंगे जब अन्य देशों से वुडकार्विंग उत्पादों के लिए आर्डर जारी रहेंगे। इनमें कोई ब्रेक आया तो निर्यात का संतुलन बिगड़ जाएगा। वे कहते हैं कि खाड़ी देशों से लगी चपत के बाद अमेरिका या अन्य यूरोपियन देशों में निर्यात प्रभावित हुआ तो कारोबार को फिर से सामान्य करने में लंबा वक्त लग सकता है। इसलिए वे तो यही दुआ कर रहे हैं कि यह खींचतान जल्द बंद हो ताकि निर्यात पर आगे कोई असर न हो।
वुडकार्विग कारोबार और निर्यात की सालाना स्थिति-
- वुडकार्विंग का कुल कारोबार 1400 से 1500 करोड़ रुपये
- वुडकार्विंग का कुल निर्यात 900 से 1000 करोड़ रुपये
- अमेरिका के राज्यों में निर्यात 400 से 500 करोड़ रुपये
- आस्ट्रेलिया में निर्यात 100 से 150 डरोड़ रुपये
- जर्मनी में निर्यात 150 से 160 करोड़ रुपये
- स्पेन में निर्यात 100 से 150 करोड़ रुपये
अमेरिका को बंद करनी होगी मनमानी
- कुछ दिन पहले ही ईरान में तेहरान सहित अन्य शहरों में भ्रमण कर लौटे नानौता क्षेत्र के निवासी इस्लामिक स्कालर मौलाना असद अली कहते हैं कि अमेरिका की यह पुरानी रीति रही है कि किसी भी देश में ऐसी अशांति पैदा कर अपने रक्षा उद्योग के साथ ही अपनी अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता रहा है। इस समय राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर भी वहां की स्थानीय जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। अमेरिका को यह मनमानी बंद करनी चाहिए। वैसे भी ईरान ऐसा इस्लामिक देश है जहां आतंक का भी ज्यादा असर नहीं रहा है। मगर अब वहां के हालात चिंताजनक हो रहे हैं। इन हालात का सामान्य होना जरूरी है। हमारे जिले के कुछ युवा भी वहां के इस्लामिक संस्थानों में अध्ययन करते हैं।

वुडकार्विंग निर्यातक इरफान उल हक- फोटो : SAHARANPUR

वुड कार्विंग निर्यातक मौ ओसाफ- फोटो : SAHARANPUR

वुड कार्विंग का फर्नीचर- फोटो : SAHARANPUR

वुड कार्विंग का फर्नीचर- फोटो : SAHARANPUR