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महिलाओं ने दिखाया हुनर, राखी बना कमा रही मुनाफा
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महिलाओं ने दिखाया हुनर, राखी बना कमा रही मुनाफा
सहारनपुर। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चल रहे अभियान के तहत स्वयं सहायता समूहों की 77 सदस्यों ने रंग-बिरंगी राखियां तैैयार कर हुनर दिखाया। इनकी राखियों को बाजार में खूब पसंद किया जा रहा है। प्रत्येक राखी पर 20 से 30 प्रतिशत मुनाफा मिल रहा है।
रक्षा बंधन से पूर्व विकासखंड बलियाखेड़ी, नागल, सरसावा, देवबंद सहित सभी 11 ब्लॉकों की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने 5000 आकर्षक रंग-बिरंगी राखियां बनाई हैं। ये महिलाएं बाजार से कच्चे माल के रूप में रेशमी व सूती धागे, मोती, लैस, गोटा, मेटल, देवी-देवताओं की फोटो आदि लाईं और राखियां बनाईं।
गांव बेहड़ी निवासी निक्की ने बताया कि एक राखी बनाने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है, अच्छा मुनाफा मिल रहा है। गांव आभा निवासी भारती ने बताया कि व्यापारियों से आर्डर लेकर उन्होंने राखियां तैयार की हैं। रेशमी व सूती धागे के साथ मेटल वाली राखी की मांग ज्यादा है। गांव उमाही निवासी जूली का कहना है कि उनकी राखी 40 से 50 रुपये तक बिक रही है। उन्हें 20 से 30 प्रतिशत तक फायदा हो रहा है।
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निशुल्क बांट रहे गोबर से बनी राखियां
गोबर से तैैयार राखियां बाजार में हैं। वहीं, नुमाइश कैंप स्थित श्रीश्री गोदेवी मंदिर से गोबर से तैयार राखियां निशुल्क वितरित की जा रही हैं। वंदे मातरम चिंगारी एक ट्रस्ट के अध्यक्ष व श्री गो-देवी मंदिर नुमाइश कैंप के संस्थापक विजयकांत चौहान ने बताया कि इन राखियों को मंदिर से निशुल्क वितरित किया जा रहा है।
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने सुंदर और आकर्षक राखियां तैयार की हैं। बाजार में अब तक पांच हजार से अधिक राखियां सप्लाई की जा चुकी हैं।
- अरुण कुमार उपाध्याय, उपायुक्त स्वत: रोजगार
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सहारनपुर। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चल रहे अभियान के तहत स्वयं सहायता समूहों की 77 सदस्यों ने रंग-बिरंगी राखियां तैैयार कर हुनर दिखाया। इनकी राखियों को बाजार में खूब पसंद किया जा रहा है। प्रत्येक राखी पर 20 से 30 प्रतिशत मुनाफा मिल रहा है।
रक्षा बंधन से पूर्व विकासखंड बलियाखेड़ी, नागल, सरसावा, देवबंद सहित सभी 11 ब्लॉकों की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने 5000 आकर्षक रंग-बिरंगी राखियां बनाई हैं। ये महिलाएं बाजार से कच्चे माल के रूप में रेशमी व सूती धागे, मोती, लैस, गोटा, मेटल, देवी-देवताओं की फोटो आदि लाईं और राखियां बनाईं।
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गांव बेहड़ी निवासी निक्की ने बताया कि एक राखी बनाने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है, अच्छा मुनाफा मिल रहा है। गांव आभा निवासी भारती ने बताया कि व्यापारियों से आर्डर लेकर उन्होंने राखियां तैयार की हैं। रेशमी व सूती धागे के साथ मेटल वाली राखी की मांग ज्यादा है। गांव उमाही निवासी जूली का कहना है कि उनकी राखी 40 से 50 रुपये तक बिक रही है। उन्हें 20 से 30 प्रतिशत तक फायदा हो रहा है।
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निशुल्क बांट रहे गोबर से बनी राखियां
गोबर से तैैयार राखियां बाजार में हैं। वहीं, नुमाइश कैंप स्थित श्रीश्री गोदेवी मंदिर से गोबर से तैयार राखियां निशुल्क वितरित की जा रही हैं। वंदे मातरम चिंगारी एक ट्रस्ट के अध्यक्ष व श्री गो-देवी मंदिर नुमाइश कैंप के संस्थापक विजयकांत चौहान ने बताया कि इन राखियों को मंदिर से निशुल्क वितरित किया जा रहा है।
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने सुंदर और आकर्षक राखियां तैयार की हैं। बाजार में अब तक पांच हजार से अधिक राखियां सप्लाई की जा चुकी हैं।
- अरुण कुमार उपाध्याय, उपायुक्त स्वत: रोजगार

स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार की गई राखी।- फोटो : SAHARANPUR