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जल भराव और दूषित पेयजल की समस्या का कराएंगे निदान
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नकुड़ (सहारनपुर)। ग्राम पंचायत पिलखना में इस बार संजय चौधरी गांव प्रधान पद निर्वाचित हुए हैं। संजय चौधरी ने बताया कि उनकी प्राथमिकताओं में गांव में स्वच्छ पेयजल हेतु पानी की टंकी का निर्माण कराना, पानी की निकासी के लिए सांसद या विधायक निधि से नाले का निर्माण कराना, गांव में बारात घर बनवाना, गांव के बीच में खाद के गड्ढों को हटवाना, तालाब की खोदाई व सुंदरीकरण कराना तथा बिना किसी भेदभाव के गांव में चहुंओर विकास कार्य कराना है। उनका कहना है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को पात्रों तक पूरी ईमानदारी के साथ पहुंचाने का काम किया जाएगा। साथ ही कार्य योजना बनाते वक्त पक्ष विपक्ष का भेद किए बिना ग्रामीणों की राय भी ली जाएगी।
प्रधान का प्रोफाइल
ग्राम प्रधान संजय चौधरी इंटर पास हैं। दो बार कोऑपरेटिव सोसायटी साल्हापुर व एक बार गन्ना सोसायटी सहारनपुर के डायरेक्टर रह चुके हैं। वे वर्ष 2010 में ग्राम प्रधानी चुनाव लड़े थे, लेकिन बराबर मत मिलने के चलते डली गोली में नाम न निकलने के चलते हार गए थे। संजय चौधरी एक अग्रणी किसान के साथ-साथ नकुड़ में आईटीआई भी चलाते हैं।
नकुड़ विकास खंड के गांव पिलखना की आबादी करीब ढाई हजार है। यहां स्वच्छ पेयजल व पानी की निकासी न होना सबसे बड़ी समस्या है। गांव नीचे में होने के कारण बरसात में जलभराव हो जाता है, जिससे ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आबादी के बीच पड़े कूडे़ के ढेरों से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। करीब डेढ़ सौ फीट गहराई तक भूजल प्रदूषित हो चुका है।
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प्रधान का प्रोफाइल
ग्राम प्रधान संजय चौधरी इंटर पास हैं। दो बार कोऑपरेटिव सोसायटी साल्हापुर व एक बार गन्ना सोसायटी सहारनपुर के डायरेक्टर रह चुके हैं। वे वर्ष 2010 में ग्राम प्रधानी चुनाव लड़े थे, लेकिन बराबर मत मिलने के चलते डली गोली में नाम न निकलने के चलते हार गए थे। संजय चौधरी एक अग्रणी किसान के साथ-साथ नकुड़ में आईटीआई भी चलाते हैं।
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नकुड़ विकास खंड के गांव पिलखना की आबादी करीब ढाई हजार है। यहां स्वच्छ पेयजल व पानी की निकासी न होना सबसे बड़ी समस्या है। गांव नीचे में होने के कारण बरसात में जलभराव हो जाता है, जिससे ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आबादी के बीच पड़े कूडे़ के ढेरों से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। करीब डेढ़ सौ फीट गहराई तक भूजल प्रदूषित हो चुका है।
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