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शिक्षा के लिए नहीं छोड़ना पड़ेगा घर, बेटियां भी जारी रख सकेंगी पढ़ाई

Thu, 02 Dec 2021 11:46 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 02 Dec 2021 11:46 PM IST
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Will not have to leave home for education, daughters will also be able to continue studies
पुवांरका मे शांकभरी देवी विश्वविद्यालय का शिलान्यास कार्यक्रम में शमिल महिलाएं व छात्राएं - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। मां शाकंभरी विश्वविद्यालय में सत्र शुरू होने के बाद उच्च शिक्षा के लिए पलायन करने वालों की संख्या में कमी आएगी। साथ ही उच्च शिक्षा के लिए शहर की बजाय पढ़ाई छोड़ने वाली बेटियां भी उच्च शिक्षित बन सकेंगी।
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जनपद में महाविद्यालयों और उनमें स्नातक व स्नातकोत्तर की सीटें सीमित संख्या में होने की वजह से प्रत्येक वर्ष 12वीं पास करने वाले हजारों युवाओं को दाखिला नहीं मिल पाता है। ऐसी स्थिति में उच्च शिक्षा के लिए युवाओं को जनपद से बाहर जाना पड़ता है। ज्यादातर युवा हरियाणा के यमुनानगर और कुरुक्षेत्र जाते हैं। यमुनानगर के कॉलेजों में पढ़ने वालों की संख्या अधिक है, क्योंकि यमुनानगर सहारनपुर के नजदीक होने के साथ ही दिन भर ट्रेनों की आवाजाही भी रहती है। ऐसे में उन्हें सस्ती यातायात सुविधा मिल जाती है। वह सुबह कॉलेज जाकर शाम तक लौट भी आते हैं। इसके बाद यहां के युवा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय को अधिक महत्व देते हैं, मगर मेरठ के सहारनपुर से 110 किमी दूर होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए भेज नहीं पाते हैं। आर्थिक रूप से थोड़ा सक्षम लोग अपने बच्चों को दिल्ली और देहरादून जैसी जगहों पर भेज देते हैं। सक्षम घरों की बेटियां भी पढ़ने के लिए घर छोड़ देती हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां जनपद के महाविद्यालयों में दाखिला नहीं मिलने के बाद 12वीं के बाद पढ़ाई ही छोड़ देती है या फिर व्यक्तिगत छात्रा के रूप में पढ़ाई जारी रखती हैं। माना जा रहा है कि विश्वविद्यालय के शुरू होने के बाद एक ओर जहां उच्च शिक्षा के लिए होने वाले पलायन में कमी आएगी। दूसरी ओर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को अपने ही जनपद में उच्च शिक्षा का बड़ा विकल्प मिल सकेगा। संवाद
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व्यवस्था में होगा सुधार, लेट नहीं होगा सत्र
जनपद के सभी महाविद्यालय चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्घ हैं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्घ महाविद्यालयों की संख्या 500 से अधिक होने के कारण व्यवस्था गड़बड़ाई रहती है। बीते वर्षों में देखा गया है कि सत्र दो-दो साल तक लेट हुए हैं, इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है। इसके लिए कोई भी सुधार या काम के लिए युवाओं को परेशान होते हुए मेरठ जाना पड़ता था।
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उच्च शिक्षण संस्थाओं की स्थिति
अभी तक जनपद में दो निजी विश्वविद्यालयों के तौर पर ग्लोकल विश्वविद्यालय और शोभित विश्वविद्यालय हैं। सात राजकीय महाविद्यालय हैं, इनमें राजकीय पीजी कॉलेज देवबंद, राजकीय महाविद्यालय पुंवारका, राजकीय महिला महाविद्यालय बेहट, राजकीय महाविद्यालय नानौता, राजकीय महिला महाविद्यालय कोटा, लाला किशन चंद राजकीय महाविद्यालय गंगोह, राजकीय मॉडल महाविद्यालय कपूरी गोविंदपुर। इनके अलावा चार सहायता प्राप्त महाविद्यालय हैं, इनमें जेवी जैन कॉलेज सहारनपुर, महाराज सिंह कॉलेज सहारनपुर, मुन्ना लाल एंड जयनारायण खेमका गर्ल्स कॉलेज सहारनपुर, गोचर महाविद्यालय रामपुर मनिहारान। साथ ही जिले में 29 निजी महाविद्यालय भी हैं।

क़ॉलेजों में सीटों की स्थिति
जनपद में प्रत्येक वर्ष यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के करीब 40,000 विद्यार्थी 12वीं पास करते हैं, लेकिन राजकीय और सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में स्नातक प्रथम वर्ष की सीटों की बात करें तो उनकी संख्या 5,420 ही है। राजकीय महाविद्यालयों में बीए की 420, बीकॉम की 300 और बीएससी की 720 सीट हैं। सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में बीए की 1940, बीकॉम की 480 और बीएससी की 1560 सीटें हैं।

पुवांरका मे शांकभरी देवी विश्वविद्यालय का शिलान्यास कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार

पुवांरका मे शांकभरी देवी विश्वविद्यालय का शिलान्यास कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार- फोटो : SAHARANPUR

सहारनपुर के पुवांरका मे शांकभरी देवी विश्वविद्यालय का शिलान्यास कार्यक्रम में भाजपा कार्यकर्त

सहारनपुर के पुवांरका मे शांकभरी देवी विश्वविद्यालय का शिलान्यास कार्यक्रम में भाजपा कार्यकर्त- फोटो : SAHARANPUR

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