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Saharanpur News: हम रहें या न रहें, बेटा कांवड़ लेकर आते रहना
Sun, 28 Jul 2024 02:07 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 28 Jul 2024 02:07 AM IST
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सहारनपुर। दादा और दादी की भगवान श्री शिव में बेहद आस्था रही। दोनों बुजुर्ग अवस्था से पहले हरिद्वार व गोमुख कांवड़ लाते थे। बुजुर्ग अवस्था में कांवड़ नहीं ला पाए। दादा और दादी ने पोते से कहा था कि बेटे तुम हमेशा कांवड़ लेकर आना है। उनकी इच्छा को पंजाब के राजपुरा निवासी संजू पूरी कर रहा है। वहीं, कांवड़ मार्ग पर भोले बाबा के जयकारों की गूंज है।
पंजाब के राजपुरा निवासी संजू पुत्र नरेश ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि दादा नानक सिंह और दादी श्याम कली का चार वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। उन्होंने कहा था कि बेटे जब तक शरीर में जान है तो कांवड़ लेकर आते रहना। संजू ने बताया कि उसके पिता भी कई बार कांवड़ लेकर आए हैं। यहीं का निवासी कमल कुमार दादी तारादेवी के लिए कांवड़ ला रहा है। इनके दूसरे साथी माता-पिता और देश की खुशहाली के लिए कांवड़ ला रहे हैं। वहीं, अंबाला और देहरादून रोड (कांवड़) मार्ग हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज रहा है। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और स्थानीय शिवभक्त अपने गंतव्य की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
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विश्व में शांति की कामना, 101 कांवड़ लाने का संकल्प
अंबाला निवासी हरिद्वार से सोनू सहगल, प्रमोद गोयल, शिव खन्ना, राजीव कपूर 20 फिट ऊंची शिव परिवार वाली रंग-बिरंगी लाइटों से सजी कांवड़ विश्व शांति की प्रार्थना के साथ लाते हुए मिले। इसी तरह चंडीगढ़ के मलाया निवासी रोबिन शर्मा, पुरुषोत्तम कौशिक, संजीव शर्मा, अरुण शर्मा श्री महाकाल कांवड़ ला रहे हैं। उनके माता-पिता भी कांवड़ लाते रहे हैं। सभी एक परिवार हैं। उनका कहना है कि परिवार संकल्प है कि 101 वर्ष तक कांवड़ लेकर आते रहेंगे। भविष्य में उनके बच्चे कांवड़ लाएंगे। इस बार 57वीं कांवड़ लेकर आ रहे हैं। चंडीगढ़ निवासी मंगलामुखी स्वीटी अपने साथियों के साथ कांवड़ ला रही है।
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झूम रहे शिवभक्त, जयकारों की गूंज
देहरादून रोड और अंबाला रोड रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा रहा है। कांवड़ शिविर में शिवभक्त भोले बाबा के भजनों पर झूम रहे हैं। वहीं, कांवड़ सेवा शिविरों में लोग शिवभक्तों की सेवा कर रहे हैं। कांवड़ मार्ग पर रात में मेले जैसा माहौल बना है।
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पंजाब के राजपुरा निवासी संजू पुत्र नरेश ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि दादा नानक सिंह और दादी श्याम कली का चार वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। उन्होंने कहा था कि बेटे जब तक शरीर में जान है तो कांवड़ लेकर आते रहना। संजू ने बताया कि उसके पिता भी कई बार कांवड़ लेकर आए हैं। यहीं का निवासी कमल कुमार दादी तारादेवी के लिए कांवड़ ला रहा है। इनके दूसरे साथी माता-पिता और देश की खुशहाली के लिए कांवड़ ला रहे हैं। वहीं, अंबाला और देहरादून रोड (कांवड़) मार्ग हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज रहा है। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और स्थानीय शिवभक्त अपने गंतव्य की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
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विश्व में शांति की कामना, 101 कांवड़ लाने का संकल्प
अंबाला निवासी हरिद्वार से सोनू सहगल, प्रमोद गोयल, शिव खन्ना, राजीव कपूर 20 फिट ऊंची शिव परिवार वाली रंग-बिरंगी लाइटों से सजी कांवड़ विश्व शांति की प्रार्थना के साथ लाते हुए मिले। इसी तरह चंडीगढ़ के मलाया निवासी रोबिन शर्मा, पुरुषोत्तम कौशिक, संजीव शर्मा, अरुण शर्मा श्री महाकाल कांवड़ ला रहे हैं। उनके माता-पिता भी कांवड़ लाते रहे हैं। सभी एक परिवार हैं। उनका कहना है कि परिवार संकल्प है कि 101 वर्ष तक कांवड़ लेकर आते रहेंगे। भविष्य में उनके बच्चे कांवड़ लाएंगे। इस बार 57वीं कांवड़ लेकर आ रहे हैं। चंडीगढ़ निवासी मंगलामुखी स्वीटी अपने साथियों के साथ कांवड़ ला रही है।
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झूम रहे शिवभक्त, जयकारों की गूंज
देहरादून रोड और अंबाला रोड रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा रहा है। कांवड़ शिविर में शिवभक्त भोले बाबा के भजनों पर झूम रहे हैं। वहीं, कांवड़ सेवा शिविरों में लोग शिवभक्तों की सेवा कर रहे हैं। कांवड़ मार्ग पर रात में मेले जैसा माहौल बना है।