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Saharanpur News: ... जब पाकिस्तान की चौकी पर फहरा दिया था तिरंगा

Thu, 08 May 2025 12:40 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 08 May 2025 12:40 AM IST
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... when the tricolor was hoisted on the Pakistani post

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सहारनपुर। पाकिस्तान के खिलाफ आपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना ने आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया है। इसके बाद से सभी सुरक्षा बल अलर्ट पर है। ऐसे में वर्ष 1971 की लड़ाई को याद कर अभी भी मन जोश से भर जाता है। उस समय लड़ते हुए भारतीय सेना की एक कंपनी ने पाकिस्तान की चौकी पर तिरंगा फहरा दिया था। उसमें जिले के भी कई सैनिक शामिल थे। पेश है उनकी जुंबानी।
सरसावा निवासी पूर्व सैनिक जनेश्वर सिंह पंवार वर्ष 1971 की लड़ाई में शामिल रहे। उन्होंने बताया कि वह भारतीय थल सेना की सी-3 राजपूत बटालियन में तैनात थे, जब युद्ध शुरू हुआ तो उन्हें मोर्चे पर भेजा गया। उनकी कंपनी ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया। उनकी पलटन ने पाकिस्तान की चौकी पर कब्जा किया। इसकी जानकारी जब हेडक्वार्टर दी गई तो सभी ने कंपनी के हौसले की दाद दी। पहलगाम में हुआ आतंकी घटना से वर्तमान सैनिक हो या पूर्व। सभी का खून खौल रहा है। सरकार ने एकदम सही कदम उठाया है। सरकार आदेश देती है तो वह पुराने जोश के साथ बंदूक उठाने के लिए तैयार है।
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- आत्मसमर्पण करने वाले सैनिकों पर देते थे पहरा

सहारनपुर के ब्रिजेश नगर निवासी पूर्व सैनिक सुरेश वत्स ने बताया कि युद्ध के दौरान हर समय मुस्तैद रहना पड़ता था। वह वर्ष 1970 में सेना में भर्ती हुए थे। उनकी तैनाती रुड़की में थी। उस समय हर सैनिक मोर्चे पर जाकर देश की सेवा करने को आतुर था। युद्ध में पाकिस्तान के सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। वह और उनकी कंपनी आत्मसमर्पण करने वाले सैनिकों के पहरेदारी में रहते थे। सेना ने हमेशा साहस और शौर्य का परिचय दिया है।
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वर्ष 1971 की लड़ाई में सांबा सेक्टर में थे तैनात

सरसावा निवासी सरदार महेंद्र सिंह ने बताया कि वह 1971 में सिग्नल कोर में सांबा में तैनात थे। युद्ध के समय भारी बमबारी और गोलीबारी होती थी। हमारे सैनिक भी मुंहतोड़ जवाब देते थे। भारत सरकार का निर्णय देश हित में है। सरकार को जनता के साथ सैनिकों की हिफाजत का भी ख्याल रखना पड़ता है। कहा कि नापाक हरकत करने वाले आतंकवादियों को सबक सिखाना जरूरी था।

- फिर से सेवा देने को हूं तैयार

सरसावा निवासी पूर्व सैनिक लोकेश कुमार ने बताया कि वह सेना में 26 वर्षों तक तैनात रहे। पहलगाम हमले के विरुद्ध जो सरकार ने कदम उठाया है। वह बहुत ही काबिले तारीफ है। हम सभी इस कदम की सराहना करते हैं। मैं देश की रक्षा के लिए फिर से मोर्चे पर तैनात होने के लिए तैयार हूं। भारत सरकार का आदेश जैसे ही आता है हम सब उसके लिए तैयार है।
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