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वुडकार्विंग कारोबार को मिल रही पाकिस्तान की टक्कर

Tue, 03 Jan 2017 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Tue, 03 Jan 2017 12:00 AM IST
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Vudkarving business getting hit Pakistan
furniture
सहारनपुर में नोटबंदी से प्रभावित वुडकार्विंग उद्योग को पाकिस्तान सहित अन्य देशों के कड़ी टक्कर मिलने लगी है। कारण, नोट बंदी से सहारनपुर का कारोबार प्रभावित हुआ है और माल की आपूर्ति नहीं होने से अब पाकिस्तान सहारनपुर के कारोबार क्षेत्र वाले देशों में दखल देने लगा है।
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नोट बंदी के चलते यहां के निर्यातक आर्डर पूरा नहीं कर पा रहे हैं और पाकिस्तान आसानी से अपनी पैठ बढ़ा रहा है। सहारनपुर की तर्ज पर ही पाकिस्तान के कई शहरों में बड़े पैमाने पर वुडकार्विंग का काम होता है।
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नवंबर महीने में नोट बंदी के बाद से सहारनपुर में कैश की कमी के चलते यह कारोबार प्रभावित हुआ। पैसे की कमी के चलते कच्चा माल लाने में दिक्कत हो रही है। उधर, कारीगर भी नकदी नहीं मिलने से दूसरी जगहों पर शिफ्ट हो गए हैं।
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इस माहौल में पाकिस्तान ने वुडकार्विंग एक्सपोर्ट में अपना दखल बढ़ाया है। पाकिस्तान के पंजाब और कश्मीर में अखरोट और शीशम की लकड़ी नक्काशी होती है और उसकी मांग गल्फ देशों में रहती है।

सहारनपुर के वुडकार्विंग में आर्डर पूरा नहीं हो पाने से अब यूरोप, अमेरिका के साथ ही आस्ट्रेलिया, जापान में भी पाकिस्तान का एक्सपोर्ट शुरू हो गया है। 
बता दें कि सहारनपुर का वुडकार्विंग उद्योग करीब सौ साल पुराना है।

वर्तमान में यहां सौ से अधिक बड़े अंतर्राष्ट्रीय निर्यातक, करीब 1300 मैन्यूफैक्चरर और 80 हजार से अधिक कारीगर सीधे तौर पर जुड़े हैं। पुराने शहर खासकर मंडी क्षेत्र में यह काम घर-घर में होता हैै।

निर्यातकों को इस बात की चिंता है कि उन्होंने वर्ष 2017 में माल निर्यात करने के जो करोड़ों रुपये के ऑर्डर लिए हैं। यदि यह पूरा नहीं हुआ तो वह कैंसल हो जाएगा।

                
वुडकार्विंग एसोसिएशन के परविंदर सिंह का कहना है कि सहारनपुर प्रत्येक वर्ष 600 करोड़ रुपये से अधिक का आयात और निर्यात करता है। इनमें अमेरिका और यूरोप में 35-35 फीसदी निर्यात किया जाता है, जबकि बाकी सामान एशिया के देशों में जाता है।

वर्तमान में हैंडीक्राफ्ट के सामान की छह हजार वैराइटी हैं। पाकिस्तान अब एक्सपोर्ट की कोशिश में है।
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