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Saharanpur News: धक्के खा रहे पीड़ित, 984 फाइलें दबाए बैठा तहसील प्रशासन
Mon, 29 Sep 2025 12:43 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Mon, 29 Sep 2025 12:43 AM IST
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सहारनपुर। सरकार आमजन को सुविधा देने के लिए तमाम दावे कर रही हैं लेकिन सरकारी नुमाइंदे ही उन दावों को झुठला रहे हैं। जन्म प्रमाणपत्र के लिए पीड़ित पिछले एक-एक साल से नगर निगम में चक्कर काट रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि तहसील प्रशासन जन्म प्रमाणपत्र की 984 फाइलें दबाए बैठा है, जो आगे नहीं बढ़ रही। इसी तरह सीएमओ कार्यालय में भी करीब 100 फाइलें अटकी हैं।
दरअसल, नियम यह है कि यदि बच्चा पैदा होने के बाद 30 दिन के अंदर जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया जाता है, तो प्रमाणपत्र एक से दो दिन में मिल जाता है। 30 दिन के बाद एक साल के अंदर आवेदन करने पर फाइल जांच के लिए सीएमओ कार्यालय जाती है, जबकि जन्म के बाद एक साल से अधिक समय पर आवेदन करने पर फाइल एसडीएम के यहां जाती है।
एसडीएम नगर निगम को जांच के लिए निर्देश करते हैं। इसके बाद नगर निगम जांच करता है। उसकी रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ही जन्म प्रमाणपत्र की स्वीकृति देते हैं। फिलहाल तहसील में ही करीब 984 फाइलें पड़ी हुई है, जो सत्यापन की बांट जोह रही हैं। सीएमओ कार्यालय में भी बड़ी संख्या में फाइलें विचाराधीन हैं।
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रोजाना पहुंच रहे 100 से ज्यादा पीड़ित
सत्यापन नहीं होने की वजह से जन्म प्रमाणपत्र नहीं बन रहे। नगर निगम के जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र अनुभाग में जन्म प्रमाण पत्र के लिए प्रतिदिन 100 से अधिक लोग पहुंच रहे हैं, जिनमें 50 फीसदी संख्या उनकी होती है, जिन्होंने आवेदन किया हुआ है और फाइल सत्यापन में अटकी है। कई ऐसे भी लोग मिले हैं, जिन्होंने दस से 12 महीने पहले आवेदन किया था लेकिन अभी तक जन्म प्रमाण पत्र हाथ में नहीं आया है।
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कुछ ऐसा है पीड़ितों का दर्द
-हसनपुर निवासी प्रिंस कुमार ने बताया कि जन्म प्रमाणपत्र के लिए दस महीने पहले आवेदन किया था। अभी तक जन्म प्रमाणपत्र नहीं बना है। दस महीने में 20 से अधिक चक्कर सीएमओ कार्यालय और नगर निगम के लगा चुके हैं।
-मानकमऊ निवासी साहिल खान ने बताया कि जन्म प्रमाणपत्र के लिए उन्हें करीब ढाई महीने का इंतजार करना पड़ा है। इसके लिए नगर निगम के करीब एक दर्जन चक्कर लगाने पड़े। प्रक्रिया सरल होनी चाहिए।
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वर्जन
नगर निगम के स्तर से प्रमाण पत्र जारी करने में कोई देरी नहीं की जा रही। प्रशासनिक स्तर पर जो भी विलंब हो रहा है उसे लेकर मंथन चल रहा है। जल्दी ही ऐसी व्यवस्था की जाएगी, जिससे प्रमाण पत्र जारी होने में ज्यादा समय न लगे। - डॉ. अजय कुमार, महापौर
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दरअसल, नियम यह है कि यदि बच्चा पैदा होने के बाद 30 दिन के अंदर जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया जाता है, तो प्रमाणपत्र एक से दो दिन में मिल जाता है। 30 दिन के बाद एक साल के अंदर आवेदन करने पर फाइल जांच के लिए सीएमओ कार्यालय जाती है, जबकि जन्म के बाद एक साल से अधिक समय पर आवेदन करने पर फाइल एसडीएम के यहां जाती है।
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एसडीएम नगर निगम को जांच के लिए निर्देश करते हैं। इसके बाद नगर निगम जांच करता है। उसकी रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ही जन्म प्रमाणपत्र की स्वीकृति देते हैं। फिलहाल तहसील में ही करीब 984 फाइलें पड़ी हुई है, जो सत्यापन की बांट जोह रही हैं। सीएमओ कार्यालय में भी बड़ी संख्या में फाइलें विचाराधीन हैं।
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रोजाना पहुंच रहे 100 से ज्यादा पीड़ित
सत्यापन नहीं होने की वजह से जन्म प्रमाणपत्र नहीं बन रहे। नगर निगम के जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र अनुभाग में जन्म प्रमाण पत्र के लिए प्रतिदिन 100 से अधिक लोग पहुंच रहे हैं, जिनमें 50 फीसदी संख्या उनकी होती है, जिन्होंने आवेदन किया हुआ है और फाइल सत्यापन में अटकी है। कई ऐसे भी लोग मिले हैं, जिन्होंने दस से 12 महीने पहले आवेदन किया था लेकिन अभी तक जन्म प्रमाण पत्र हाथ में नहीं आया है।
कुछ ऐसा है पीड़ितों का दर्द
-हसनपुर निवासी प्रिंस कुमार ने बताया कि जन्म प्रमाणपत्र के लिए दस महीने पहले आवेदन किया था। अभी तक जन्म प्रमाणपत्र नहीं बना है। दस महीने में 20 से अधिक चक्कर सीएमओ कार्यालय और नगर निगम के लगा चुके हैं।
-मानकमऊ निवासी साहिल खान ने बताया कि जन्म प्रमाणपत्र के लिए उन्हें करीब ढाई महीने का इंतजार करना पड़ा है। इसके लिए नगर निगम के करीब एक दर्जन चक्कर लगाने पड़े। प्रक्रिया सरल होनी चाहिए।
वर्जन
नगर निगम के स्तर से प्रमाण पत्र जारी करने में कोई देरी नहीं की जा रही। प्रशासनिक स्तर पर जो भी विलंब हो रहा है उसे लेकर मंथन चल रहा है। जल्दी ही ऐसी व्यवस्था की जाएगी, जिससे प्रमाण पत्र जारी होने में ज्यादा समय न लगे। - डॉ. अजय कुमार, महापौर