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वेद ही मिटा सकते हैं राष्ट्र का अंधियारा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 01 May 2017 12:02 AM IST
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संत को सम्मानित करते बाबा रामदेव और भारत भूषण जी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में मोक्षायतन योग संस्थान के 44वें स्थापना दिवस पर रविवार को जनमंच सभागार में आयोजित संगच्छध्वं कार्यक्रम में योगगुरु बाबा रामदेव ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ा व्यक्ति ही सफल होता है और परमएश्वर्य को प्राप्त करता है।
सारा जगत भौतिकवाद की ओर भाग रहा है। योगी ही आत्म अनुभव कर पाता है। उन्होंने कहा कि योग और वेदों का अनुसरण जरूरी है। वेद ही राष्ट्र का अंधियारा मिटा सकते हैं।
उन्होंने मोक्षायतन के संस्थापक और पद्मश्री भारत भूूषण को योग का भीष्म पितामह बताया और कहा कि इन्होंने को योग को जिया है। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने सभी को सुंदर और ज्ञानवान बनाया है। मगर विरले होते हैं जो जीवन का सदुपयोग करते हैं।
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इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ योग गुरु स्वामी बाबा रामदेव, पद्म भारत भूषण, महामंडेलश्वर दांती महाराज, आचार्य लोकेश मुनि, स्वामी चिंदानंद सरस्वती, देवी चित्रलेखा, महामंडलेश्वर बाबा रिजकदास, स्वामी विशालानंद, कमिश्रर एमपी अग्रवाल, डीआई जके शाही ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
कार्यक्रम में बाबा रामदेव ने कहा कि पंतजलि ने लाखों बेरोजगारों को रोजगार देने का काम किया है और अभी कई हजार शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने का काम करेगी। इस मौके पर मंत्रों के साथ पद्म श्री भारत भूषण को बधाई दी गई और स्मृति चिन्ह देकर दीर्घायु होने की कामना की।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। इस दौरान सांसद राघव लखनपाल शर्मा सहित जनपद कई हस्तियां मौजूद रही। इसके बाद बाबा रामदेव कामधेनु उद्योग नगर स्थित विवेक गुप्ता के संस्थान पर स्वागत समारोह में पहुंचे। यहां सचिन गुप्ता, अंशुल गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
स्वामी चिदांनद सरस्वती ने कहा कि मुस्कान प्रदान करने के लिए पहलवान होना जरूरी नहीं। इसके लिए इंसान होना जरूरी है। आचार्य लोकेश मुनि ने समाज में दूरियां कम करने पर जोर दिया।
देवी चित्रलेखा ने कहा कि संतों का हो संग तो जीने का ढंग आ ही जाता है। स्वामी विशालानद कहा कि संतों ने हमेशा कर्म किया, फल की चिंता नहीं की।
ये हुए सम्मानित, कार्यक्रम में मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल, कर्नल जेएस मान, जीकेवीवी एचओडी ईश्वर भारद्वाज, शोभित यूनिवर्सिटी के चांसलर कुंवर शेखर विजयेंद्र, विजय शंकर तिवारी, विनोद इलाहाबादी, राजेश चेतन आदि को सम्मानित किया गया।
अंत में पद्म श्री भारत भूषण ने कहा कि प्रतिष्ठा एवं निष्ठा का सम्मान तो हुआ है। लेकिन योग गुरु स्वामी बाबा रामदेव ने योग गुरु की बेटी प्रतिष्ठा एवं निष्ठा की माता को बुलाया और सम्मानित किया।
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सारा जगत भौतिकवाद की ओर भाग रहा है। योगी ही आत्म अनुभव कर पाता है। उन्होंने कहा कि योग और वेदों का अनुसरण जरूरी है। वेद ही राष्ट्र का अंधियारा मिटा सकते हैं।
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उन्होंने मोक्षायतन के संस्थापक और पद्मश्री भारत भूूषण को योग का भीष्म पितामह बताया और कहा कि इन्होंने को योग को जिया है। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने सभी को सुंदर और ज्ञानवान बनाया है। मगर विरले होते हैं जो जीवन का सदुपयोग करते हैं।
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इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ योग गुरु स्वामी बाबा रामदेव, पद्म भारत भूषण, महामंडेलश्वर दांती महाराज, आचार्य लोकेश मुनि, स्वामी चिंदानंद सरस्वती, देवी चित्रलेखा, महामंडलेश्वर बाबा रिजकदास, स्वामी विशालानंद, कमिश्रर एमपी अग्रवाल, डीआई जके शाही ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
कार्यक्रम में बाबा रामदेव ने कहा कि पंतजलि ने लाखों बेरोजगारों को रोजगार देने का काम किया है और अभी कई हजार शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने का काम करेगी। इस मौके पर मंत्रों के साथ पद्म श्री भारत भूषण को बधाई दी गई और स्मृति चिन्ह देकर दीर्घायु होने की कामना की।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। इस दौरान सांसद राघव लखनपाल शर्मा सहित जनपद कई हस्तियां मौजूद रही। इसके बाद बाबा रामदेव कामधेनु उद्योग नगर स्थित विवेक गुप्ता के संस्थान पर स्वागत समारोह में पहुंचे। यहां सचिन गुप्ता, अंशुल गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
स्वामी चिदांनद सरस्वती ने कहा कि मुस्कान प्रदान करने के लिए पहलवान होना जरूरी नहीं। इसके लिए इंसान होना जरूरी है। आचार्य लोकेश मुनि ने समाज में दूरियां कम करने पर जोर दिया।
देवी चित्रलेखा ने कहा कि संतों का हो संग तो जीने का ढंग आ ही जाता है। स्वामी विशालानद कहा कि संतों ने हमेशा कर्म किया, फल की चिंता नहीं की।
ये हुए सम्मानित, कार्यक्रम में मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल, कर्नल जेएस मान, जीकेवीवी एचओडी ईश्वर भारद्वाज, शोभित यूनिवर्सिटी के चांसलर कुंवर शेखर विजयेंद्र, विजय शंकर तिवारी, विनोद इलाहाबादी, राजेश चेतन आदि को सम्मानित किया गया।
अंत में पद्म श्री भारत भूषण ने कहा कि प्रतिष्ठा एवं निष्ठा का सम्मान तो हुआ है। लेकिन योग गुरु स्वामी बाबा रामदेव ने योग गुरु की बेटी प्रतिष्ठा एवं निष्ठा की माता को बुलाया और सम्मानित किया।