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UP: नकली दवाएं बनाने की फैक्टरी का भंडाफोड़, मौके से 10 लाख का माल बरामद, जांच में खुलेंगे बड़े राज

Mon, 06 Jun 2022 08:51 PM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Mon, 06 Jun 2022 08:51 PM IST
सार

एसटीएफ की टीम ने छापा मारकर बड़ा खुलासा किया है। टीम ने नकली दवाएं बनाने की अवैध फैक्टरी का भंडाफोड़ किया है। 

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UP News: STF Uttarakhand team has busted illegal medicine factory in Saharanpur
नकली दवाएं बनाने की फैक्टरी का भंडाफोड़। - फोटो : amar ujala

विस्तार

एसटीएफ उत्तराखंड और औषधि विभाग सहारनपुर ने कैलाशपुर के औद्योगिक क्षेत्र में नकली और अधोमानक दवाएं बनाने वाली अवैध फैक्टरी पकड़ी है। दवाएं बनाने के लिए मशीन और अन्य उपकरण व करीब दस लाख रुपये की दवाएं भी बरामद की गई हैं। फैक्टरी संचालक मौके से पकड़ा गया। चार दवाओं के नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। फैक्टरी संचालक और भवन स्वामी सहित करीब आधा दर्जन लोगों के विरुद्ध एसटीएफ उत्तराखंड के द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी चल रही है।

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औषधि निरीक्षक संदीप कुमार ने बताया कि रविवार की देर रात एसटीएफ उत्तराखंड के प्रभारी अब्दुल कलाम ने प्रशासन के बाद उनसे संपर्क किया। सूचना मिली थी कि कैलाशपुर के औद्योगिक क्षेत्र में दवा बनाने की अवैध फैक्टरी चल रही है। मौके पर जाकर देखा तो पता चला कि रुड़की निवासी नितिन कुमार नाम का व्यक्ति यहां किराए पर बिल्डिंग लेकर इस कार्य को कर रहा है। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। तमाम जानकारी लेने के बाद यह कहा जा सकता है कि यहां बन रहीं दवाएं न केवल अधोमानक थीं, बल्कि नकली भी थी। 
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वहीं फैक्टरी से दवाएं बनाने के लिए कच्चा माल, प्रिंटेड कार्टन, एल्युमीनियम प्रिंटेड फाइल, कंप्रेशन मशीन, ब्लिस्टर पैक मशीन, ट्रे ड्रायर, गैस सिलिंडर, चूल्हा आदि मिले हैं। करीब दस लाख रुपये की दवाएं भी मिली हैं, जिनमें एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हैं। जैसे मैकसेल एलबी ओ, मैकसेल एलबी 200, मैकसेल एजैड एलबी, मैकपोड सीवी आदि। जिनकी कीमत करीब दस लाख रुपये है। सभी दवाएं जब्त करने के बाद चार प्रकार की दवाओं के नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं।
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संदीप ने बताया कि नितिन ने उन्हें बताया है कि वह इन दवाओं को उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में सप्लाई कर रहा था। उक्त प्रकरण में एसटीएफ उत्तराखंड की ओर से फैक्टरी संचालक नितिन कुमार, परिसर मालिक राजेंद्र सिंह, अश्वनी, विशाल, पंकज, अजय रुड़की के विरुद्घ संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। जांच में औषधि के नमूने अधोमानक पाए जाने के बाद विवेचना पूर्ण कर औषधि अधिनियम 1940 के तहत न्यायालय में परिवाद दायर किया जाएगा। 

कई राज्यों में सप्लाई हो रही थीं दवाएं
एसटीएफ और औषधि विभाग के अधिकारियों द्वारा पूछताछ में नितिन ने दवाएं उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में सप्लाई करने की बात कबूल की है, जबकि चर्चा है कि दवाएं उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा सहित कई राज्यों में सप्लाई की जा रही थी। उत्तराखंड में दवाएं जा रही थी, तभी तो वहां की टीम आई। 

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क्या कर रहा था औषधि विभाग 
कैलाशपुर के औद्योगिक क्षेत्र में नकली और अधोमानक दवाएं बनाने की अवैध फैक्टरी दस माह से चल रही थी, लेकिन औषधि विभाग को इसकी कानो कान खबर तक नहीं लगी। खास बात यह है कि यदि एसटीएफ उत्तराखंड की टीम को पता ना चलता तो नकली दवाएं बनाने का काम पता नहीं कब तक चलता रहता। ऐसे में औषधि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। 

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