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32 साल में संघ कार्यकर्ता से बने आयोग के अध्यक्ष
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सहारनपुर। उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष बनाए गए जसवंत सैनी की ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं। उन्होंने 1989 में संघ कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया और फिर छात्र राजनीति की और पढ़ाई पूरी करने के बाद सियासी सफर पर निकल पड़े। करीब 32 साल के सफर में संगठन के भीतर तमाम उच्च पद हासिल किए, लेकिन एकमात्र 2009 में लड़ा लोकसभा का चुनाव नहीं जीत पाए।
जसवंत सैनी रामपुर मनिहारान क्षेत्र के गांव आजमपुर के रहने वाले हैं और अब रामपुर मनिहारान में बड़गांव मार्ग पर रहते हैं। यहां उन्होंने शाकंभरी टेंट हाउस के नाम से अपना कारोबार किया हुआ है। वह छह भाइयों में सबसे बड़े हैं तथा दो बहनें भी हैं। रामपुर मनिहारान स्थित महाविद्यालय से उन्होंने ग्रेजुएशन किया तो सहारनपुर स्थित जैन डिग्री कॉलेज से एमए और एलएलबी की पढ़ाई की। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान से पहले वह संघ के शाखा कार्यवाह और मुख्य शिक्षक रहे। इसके बाद देवबंद तहसील प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। जब पढ़ाई पूरी हो गई तो भाजपा में सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने लगे और धीरे धीरे भाजपा के उच्च पदों पर आसीन हुए। तीन साल तक भाजपा के सहारनपुर जिलाध्यक्ष रहे।
बधाई देने वालों का लगा रहा तांता
जैसे ही लोगों को पता चला कि जसवंत सैनी को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बना दिया गया है तो उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। भाजपा पदाधिकारियों ने उन्हें फूल माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर इस जिम्मेदारी के लिए बधाई दी। इस दौरान डाक्टर किरनपाल, अजीत राणा, बिजेंद्र सैनी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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दादा सुरजन सैनी से सीखा सियासी ककहरा
जसवंत सैनी बताते हैं कि उनके दादा सुरजन सिंह भी संघ में रहे और जनसंघ के जिलाध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा 1975 में इमरजेंसी के समय में नौ महीने तक जेल में भी रहे। उनसे ही सियासी ककहरा सीखा। जसवंत सैनी कहते हैं कि दादाजी की भी इच्छा थी कि मैं राजनीति में आऊं।
लोकसभा चुनाव में रहे थे तीसरे नंबर पर
वर्ष 2009 में जसवंत सैनी को भाजपा ने सहारनपुर लोकसभा से प्रत्याशी बनाया था। उस चुनाव में बसपा के जगदीश सिंह राणा (स्वर्गीय) 3,54,807 वोट लेकर विजयी रहे थे, जबकि सपा प्रत्याशी रशीद मसूद (मरहूम) 2,69,934 वोटों के साथ दूसरे और जसवंत सिंह सैनी 99,894 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे।
32 साल का सफर
- 1989 में संघ के शाखा कार्यवाह और मुख्य शिक्षक रहे।
- 1991 में देवबंद तहसील प्रमुख बने और अभाविप के जिला प्रमुख
- 1997 में भाजयुमो महामंत्री बन सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।
- 2001 में भाजयुमो के जिलाध्यक्ष बनाए गए।
- 2004 में भाजपा के जिला महामंत्री बनाए गए।
- 2007 से 2010 तक भाजपा जिलाध्यक्ष रहे
- 2009 में सहारनपुर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा।
- 2010 से 2014 तक भाजपा प्रदेश मंत्री रहे
- 2017 से 2020 तक प्रदेश उपाध्यक्ष रहे।
- 2019 में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष बने।
- 2021 में राज्य पिछड़ा वर्ग का अध्यक्ष बनाया गया।
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जसवंत सैनी रामपुर मनिहारान क्षेत्र के गांव आजमपुर के रहने वाले हैं और अब रामपुर मनिहारान में बड़गांव मार्ग पर रहते हैं। यहां उन्होंने शाकंभरी टेंट हाउस के नाम से अपना कारोबार किया हुआ है। वह छह भाइयों में सबसे बड़े हैं तथा दो बहनें भी हैं। रामपुर मनिहारान स्थित महाविद्यालय से उन्होंने ग्रेजुएशन किया तो सहारनपुर स्थित जैन डिग्री कॉलेज से एमए और एलएलबी की पढ़ाई की। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान से पहले वह संघ के शाखा कार्यवाह और मुख्य शिक्षक रहे। इसके बाद देवबंद तहसील प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। जब पढ़ाई पूरी हो गई तो भाजपा में सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने लगे और धीरे धीरे भाजपा के उच्च पदों पर आसीन हुए। तीन साल तक भाजपा के सहारनपुर जिलाध्यक्ष रहे।
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बधाई देने वालों का लगा रहा तांता
जैसे ही लोगों को पता चला कि जसवंत सैनी को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बना दिया गया है तो उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। भाजपा पदाधिकारियों ने उन्हें फूल माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर इस जिम्मेदारी के लिए बधाई दी। इस दौरान डाक्टर किरनपाल, अजीत राणा, बिजेंद्र सैनी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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दादा सुरजन सैनी से सीखा सियासी ककहरा
जसवंत सैनी बताते हैं कि उनके दादा सुरजन सिंह भी संघ में रहे और जनसंघ के जिलाध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा 1975 में इमरजेंसी के समय में नौ महीने तक जेल में भी रहे। उनसे ही सियासी ककहरा सीखा। जसवंत सैनी कहते हैं कि दादाजी की भी इच्छा थी कि मैं राजनीति में आऊं।
लोकसभा चुनाव में रहे थे तीसरे नंबर पर
वर्ष 2009 में जसवंत सैनी को भाजपा ने सहारनपुर लोकसभा से प्रत्याशी बनाया था। उस चुनाव में बसपा के जगदीश सिंह राणा (स्वर्गीय) 3,54,807 वोट लेकर विजयी रहे थे, जबकि सपा प्रत्याशी रशीद मसूद (मरहूम) 2,69,934 वोटों के साथ दूसरे और जसवंत सिंह सैनी 99,894 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे।
32 साल का सफर
- 1989 में संघ के शाखा कार्यवाह और मुख्य शिक्षक रहे।
- 1991 में देवबंद तहसील प्रमुख बने और अभाविप के जिला प्रमुख
- 1997 में भाजयुमो महामंत्री बन सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।
- 2001 में भाजयुमो के जिलाध्यक्ष बनाए गए।
- 2004 में भाजपा के जिला महामंत्री बनाए गए।
- 2007 से 2010 तक भाजपा जिलाध्यक्ष रहे
- 2009 में सहारनपुर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा।
- 2010 से 2014 तक भाजपा प्रदेश मंत्री रहे
- 2017 से 2020 तक प्रदेश उपाध्यक्ष रहे।
- 2019 में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष बने।
- 2021 में राज्य पिछड़ा वर्ग का अध्यक्ष बनाया गया।