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मन, वचन, काया में एकरूपता ही उत्तम आर्जव धर्म
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सहारनपुर। जनपद के जैन मंदिरों में दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की पूजा की गई।
जैन बाग स्थित स्थित जिनालय में पूजा के दौरान जैन समाज के लोगों ने श्रीजी का अभिषेक किया। इस मौके पर सीए अनिल जैन ने कहा कि मन, वचन, काया में एकरूपता का होना ही उत्तम आर्जव धर्म है। इसके विपरीत यदि मन, वचन, काया में भिन्नता है तो यह छल है। ऐसे व्यक्तियों में तीन काल में भी उत्तम आर्जव धर्म उत्पन्न नहीं हो सकता है। प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में उल्लेखित घटनाओं के आधार पर ऐसे मनुष्य देहावसान के उपरांत नर्क एवं पशुगति में गमन करते हैं। यदि हमें अपने अगले जन्म को सुधारना है तो कभी किसी के साथ छल करने का विचार भी मन में नहीं लाना चाहिए। पूजा के दौरान मनीष जैन, नवीन जैन, अनिल जैन, सुखमाल जैन, सतपाल जैन, अभिषेक जैन, बालेश जैन, सुधीर जैन, संजीव जैन, अजय जैन, राजपाल जैन, मनोज जैन, राकेश जैन, आशीष जैन, विपिन जैन मौजूद रहे।
वहीं, आवास विकास के चौधरी संदीप जैन ने कहा कि आर्जव धर्म का महत्व सहजता और सरलता से है। उन्होंने कहा कि जब मन, वचन, काया अलग-अलग हो और उनमें एकरूपता न हो तो वह धोखा है। जैन समाज के महामंत्री संजीव जैन ने कहा कि यह दशलक्षण धर्म ही है, जिसके माध्यम से हम केवल अपने शरीर ही नहीं बल्कि आत्मा की भी शुद्धि करते हैं। इस मौके पर जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन के स्वास्थ्य लाभ की कामना की गई। इस दौरान मनोज जैन, राजा जैन, मनीष जैन, नवीन जैन, अनिल जैन, सुखमाल जैन, सतपाल जैन, अभिषेक जैन, बालेश जैन, सुधीर जैन, संजीव जैन, अजय जैन, राजपाल जैन, मनोज जैन, राकेश जैन, आशीष जैन, विपिन जैन मौजूद रहे।
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जैन बाग स्थित स्थित जिनालय में पूजा के दौरान जैन समाज के लोगों ने श्रीजी का अभिषेक किया। इस मौके पर सीए अनिल जैन ने कहा कि मन, वचन, काया में एकरूपता का होना ही उत्तम आर्जव धर्म है। इसके विपरीत यदि मन, वचन, काया में भिन्नता है तो यह छल है। ऐसे व्यक्तियों में तीन काल में भी उत्तम आर्जव धर्म उत्पन्न नहीं हो सकता है। प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में उल्लेखित घटनाओं के आधार पर ऐसे मनुष्य देहावसान के उपरांत नर्क एवं पशुगति में गमन करते हैं। यदि हमें अपने अगले जन्म को सुधारना है तो कभी किसी के साथ छल करने का विचार भी मन में नहीं लाना चाहिए। पूजा के दौरान मनीष जैन, नवीन जैन, अनिल जैन, सुखमाल जैन, सतपाल जैन, अभिषेक जैन, बालेश जैन, सुधीर जैन, संजीव जैन, अजय जैन, राजपाल जैन, मनोज जैन, राकेश जैन, आशीष जैन, विपिन जैन मौजूद रहे।
वहीं, आवास विकास के चौधरी संदीप जैन ने कहा कि आर्जव धर्म का महत्व सहजता और सरलता से है। उन्होंने कहा कि जब मन, वचन, काया अलग-अलग हो और उनमें एकरूपता न हो तो वह धोखा है। जैन समाज के महामंत्री संजीव जैन ने कहा कि यह दशलक्षण धर्म ही है, जिसके माध्यम से हम केवल अपने शरीर ही नहीं बल्कि आत्मा की भी शुद्धि करते हैं। इस मौके पर जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन के स्वास्थ्य लाभ की कामना की गई। इस दौरान मनोज जैन, राजा जैन, मनीष जैन, नवीन जैन, अनिल जैन, सुखमाल जैन, सतपाल जैन, अभिषेक जैन, बालेश जैन, सुधीर जैन, संजीव जैन, अजय जैन, राजपाल जैन, मनोज जैन, राकेश जैन, आशीष जैन, विपिन जैन मौजूद रहे।
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