{"_id":"595d33fc4f1c1bfc018b4624","slug":"try-to-restore-the-prisoners","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंदियों को पुन: स्थापित करने की कोशिश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंदियों को पुन: स्थापित करने की कोशिश
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 06 Jul 2017 12:16 AM IST
विज्ञापन
नव जेल अधीक्षक।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर में नवागत जेल अधीक्षक डाक्टर वीरेश राज शर्मा ने जिला कारागार का कार्यभार ग्रहण कर लिया है। उन्होंने जेल सुधार, जेल में शिक्षा का प्रसार एवं जेल के नियमों का पालन कराए जाने को प्राथमिकता बताया।
उन्होंने कहा कि जेल में बंदियों को तकनीकी शिक्षा दिलाकर उन्हें समाज में पुनः स्थापित कराए जाने का प्रयास किया जाएगा। जेएनयू से पीएचडी की डिग्री प्राप्त 2002 के पीसीएस डाक्टर वीरेश राज शर्मा एटा जेल में पहली पोस्टिंग 2006 में हुई।
वर्ष 2010 में गाजियाबाद की डासना जेल के अधीक्षक रहे, 2014 में अलीगढ़ जेल तैनात रहे। एक साल नोएडा जेल में भी वीरेश राज शर्मा की तैनाती रही। कासगंज जेल का भी कार्यभार रहा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि वह जेल में शिक्षा को बढ़ावा दिए जाने को प्राथमिकता देंगे। अलीगढ़, डासना और नोएडा जेल में जिस प्रकार उन्होंने एनजीओ के माध्यम से पुस्तकालय बनवाए।
सहारनपुर जेल में भी शिक्षा के विभिन्न कार्यक्रम चलाएंगे। समाज सेवियों एवं एनजीओ के माध्यम से समाज और जेल को जोड़ना उनका लक्ष्य रहेगा। बंदियों को तकनीकी शिक्षा देकर समाज में पुन: स्थापित करने की योजना पर काम किया जाएगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि जेल में बंदियों को तकनीकी शिक्षा दिलाकर उन्हें समाज में पुनः स्थापित कराए जाने का प्रयास किया जाएगा। जेएनयू से पीएचडी की डिग्री प्राप्त 2002 के पीसीएस डाक्टर वीरेश राज शर्मा एटा जेल में पहली पोस्टिंग 2006 में हुई।
विज्ञापन
वर्ष 2010 में गाजियाबाद की डासना जेल के अधीक्षक रहे, 2014 में अलीगढ़ जेल तैनात रहे। एक साल नोएडा जेल में भी वीरेश राज शर्मा की तैनाती रही। कासगंज जेल का भी कार्यभार रहा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि वह जेल में शिक्षा को बढ़ावा दिए जाने को प्राथमिकता देंगे। अलीगढ़, डासना और नोएडा जेल में जिस प्रकार उन्होंने एनजीओ के माध्यम से पुस्तकालय बनवाए।
सहारनपुर जेल में भी शिक्षा के विभिन्न कार्यक्रम चलाएंगे। समाज सेवियों एवं एनजीओ के माध्यम से समाज और जेल को जोड़ना उनका लक्ष्य रहेगा। बंदियों को तकनीकी शिक्षा देकर समाज में पुन: स्थापित करने की योजना पर काम किया जाएगा।