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जुबान पर किसान और नौजवान, निगाहों में मुसलमान

Sun, 05 Feb 2017 10:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sun, 05 Feb 2017 10:48 PM IST
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Tongue and young farmers, in the eyes of Muslims
राजनी‌ति - फोटो : demo pic
सहारनपुर के गंगोह में चुनावी समर में अपनी जमीन मजबूत करने के लिए कांग्रेस की निगाहें मुसलमान वोट बैंक पर टिकी है। गंगोह में आयोजित चुनावी सभा में भले ही कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जुबान पर किसान और नौजवान थे।
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मगर, उनकी निगाहें मुसलमान पर जमी हुई थी। यही कारण है कि आरएसएस, भाजपा और मोदी पर निशाना साधकर मुसलमानों को रिझाने का कोई मौका नहीं चूकना चाह रहे थे।

हर बात पर पीएम नरेंद्र मोदी को कोसकर वे न केवल मुसलमानों एकजुट करने की कवायद करते रहे, बल्कि किसान, मजदूर और नौजवानों के रहनुमा बनने की भी कोशिश में जुटे रहे। करीब 25 मिनट के भाषण में बसपा का जिक्र तक नहीं कर गठबंधन में भविष्य की संभावनाओं को बरकरार रखा।
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गंगोह में चुनावी जनसभा में पहुंचे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इशारों में मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुटे रहे। सपा के साथ गठबंधन के जरिए मुस्लिम वोट बैंक को रिझाने की खातिर ही इसे भविष्य का आइना तक करार दिया।
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सपा के साथ कांग्रेस को जोड़ने की खातिर शेर पढ़ा कि हम दोनों में फर्क इतना, एक कहता ख्वाब, एक कहता सपना। इस शेर के जरिये राहुल ने मतदाताओं को यह संदेश देने की कोशिश की कि सपा और कांग्रेस एक है।

 इसके अलावा वुडकार्विंग उद्योग और उसके कारीगरों के दर्द को उकेरने के पीछे भी उनकी कोशिश मुसलमान के नब्ज टटोलने की रही। भले ही राहुल गांधी सीधे तौर पर कुछ कहने से परहेज करते रहे, मगर पीएम नरेंद्र मोदी को कोसकर वे अपने बेस वोट को साधने का कोई मौका नहीं चूकना चाह रहे थे।

यही कारण है कि 25 मिनट के भाषण में तीन दर्जन से ज्यादा बार पीएम मोदी का नाम लिया। सियासी जानकारों का मानना है कि मोदी का चेहरा दिखाकर कांग्रेस मुसलमान वोट को एकजुट करना चाहती है।


इसके अलावा राहुल ने सीएम अखिलेश यादव और खुद के जरिए युवाओं को रिझाने की पुरजोर कोशिश की। युवाओं के लिए मेनिफेस्टो और उसमें रोजगार की बात कर नौजवान मतदाताओं को भी अपने पाले में करने में जुटे रहे। कुल मिलाकर भले ही उनकी जुबान पर किसान और नौजवान रहे, मगर उनकी निगाहें मुसलमान पर थी। 
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