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ये है पशुओं की चॉकलेट, जानिए पशुओं को इसे खिलाने से क्या है फायदे

Tue, 04 Dec 2018 12:31 AM IST
ब्यूरो, सहारनपुर
ब्यूरो, सहारनपुर Updated Tue, 04 Dec 2018 12:31 AM IST
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This is the chocolate of animals, know what is the benefits of feeding it to animals
सहारनपुर में पशु के खाने की चॉकलेट। - फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर में यूरिया मॉलेसेस मिनरल ब्रिक्स (यूएमएमबी) पशु चॉकलेट पशुओं में न सिर्फ पोषक तत्वों की कमी को दूर करेगी, बल्कि बांझपन से बचाने में  कारगर साबित होगी। इससे पशुओं की प्रजनन क्षमता में भी बढ़ोतरी होगी। कृषि विज्ञान केंद्र इस चॉकलेट के प्रति पशुपालकों को जागरूक कर रही है। 
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 भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली द्वारा विकसित यह यूूएमएमबी पशु चॉकलेट पशुओं में पोषक तत्वों  की पूर्ति में सहायक सिद्ध होगी। इस चॉकलेट को बनाने में शीरा, चोकर, सरसों की खल, यूरिया, कैल्शियम, मैग्निशियम, जिंक, कॉपर, नमक आदि का प्रयोग किया जाता है।  
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केवीके के वैैैैज्ञानिक डॉक्टर प्रमोद कुमार ने बताया कि एक वयस्क पशु को इस चॉकलेट की एक दिन में 500 से 600  ग्राम की मात्रा पर्याप्त रहता है। क्योंकि पोषक तत्वों की कमी के चलते पशु दीवार और ईंट को चाटता है। इस चॉकलेट के प्रयोग से हरे चारे की कमी को भी दूर किया जा सकता है। साथ ही यह पशुओं के पाचन तंत्र को भी  ठीक करता है। इस चॉकलेट को पशुओं की खोर में चाटने के लिए रखना चाहिए। पशु के लिए एक चॉकलेट प्रति सप्ताह पर्याप्त रहती है। एक पशु चॉकलेट की कीमत करीब  80 रुपये पड़ती है। 
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 पशु चॉकलेट की उपयोगिता---- 
- पशुओं में हारमोन संतुलन बनाए रखने में सहायक। 
-पशुओं में बांझपन निवारण में कारगर 
- रूमेन सूक्ष्मजीवी सक्रियता बढ़ाता है। 
- पशुओं में निरंतर ऊर्जा एवं प्रोटीन की उपलब्धता। 
 
 यूरिया मॉलेसेस मिनरल ब्रिक्स में शामिल होने वाले पदार्थ प्रतिशत में-- 
 पदार्थ----------------प्रतिशत 
शीरा------------------40 
 चोकर----------------39 
यूरिया----------------10 
सीमेंट----------------05 
सोडियम बेंजोएट-----2 से 3 
कैलशियम ऑक्साइड--02 
ग्वार गम---------------01 से 02 
खनिज  मिश्रण---------02 

 यूरिया मॉलेसिस मिनरल ब्रिक्स पशुओं में बांझपन को रोकने में कारगर साबित होगी। क्योंकि इसमें पशु के लिए आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में शामिल किए जाते हैं।  इससे पशु की दूध देने की क्षमता में भी वृद्धि होगी। इसे भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान बरेली ने विकसित किया है। --डॉ. आईके कुशवाहा, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र। 


- केवीके पशु चॉकलेट को बनाने के लिए प्रशिक्षण दे रहा है। ग्रामीण युवा इसको सीखकर स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं। पशुओं में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के साथ ही उनमें होने वाली बांझपन की समस्या को दूर करने में कारगर साबित होगी। केवीके में भी ग्रामीण युवाओं को यह चॉकलेट बनाना सिखाया जा रहा है। -- डॉक्टर प्रमोद कुमार, पशुपालन विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र।
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