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मुश्किल थे हालात, पर मजबूत हौसले से मिली कामयाबी

Sun, 18 Oct 2020 10:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2020 10:54 PM IST
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Things were difficult, but the success was strong
मुश्किल थे हालात, पर मजबूत हौसले से मिली कामयाबी
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शिक्षा, समाजसेवा और मनोरंजन के क्षेत्र में अपने बूते लिखी सफलता की कहानी
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। मुश्किल थे हालात, पर हौसला नहीं डिगा। तय कर लिया था कुछ बनना है, समाज में सिर ऊंचा करके चलना है। मेहनत की तो बाधाएं दूर हुईं और कामयाबी का मुकाम हासिल कर लिया। ऐसी है जिले में शिक्षा, समाजसेवा और मनोरंजन के क्षेत्र में तरक्की हासिल करने वाली नारी की कहानी।
फल बेचने वाले की बिटिया बनी अभिनेत्री
नानौता निवासी फल की रेहड़ी लगाने वाले आभाराम सैनी की बेटी दीपाली ने प्रतिभा के बल पर छोटे से कस्बे से निकल मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई है। दीपाली ने अपने करियर की शुरुआत 2007 में देहाती मालीवुड फिल्म से की थी। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और मुंबई में रहते हुए छोटे पर्दे पर प्रसारित टीवी सीरियल नारायण नारायण में लक्ष्मी तथा हनुमान सीरियल में विभीषण की पुत्री अमला के किरदार सहित अनेक सीरियलों में अभिनय किया। दीपाली को यूपी बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड भी मिल चुका है।
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पीड़िताओं को न्याय दिलाने में जुटी सुरेशो
चिलकाना। सुल्तानपुर निवासी गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुरेशो सैनी ने किशोर अवस्था से ही सामाजिक कार्यों से जुड़कर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। पिछले करीब 30 वर्षों से दिशा सामाजिक संस्था से जुड़ी हैं। कम पढ़ी-लिखी होने के बावजूद घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को नि:शुल्क न्याय दिलाने के लिए खुद बाइक चलाकर सुरेशो थाने से लेकर कचहरी तक पैरवी करती हैं। अब तक उन्होंने 200 से ज्यादा महिलाओं के परिवारों को टूटने से बचाया है। शादी होने के बाद भी वे अपने मायके में रहकर गांव देहात की घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं के लिए काम कर रही हैं।
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ट्यूशन पढ़ाकर आगे बढ़ीं और पाई शिक्षिका की नौकरी
छुटमलपुर। गांव फतेहपुर भादो निवासी श्यामलाल की दो बेटियों मोनिका और प्रियंका ने एक साथ वर्ष 2018 में सहायक अध्यापिका बनकर परिवार का नाम रोशन किया। बच्चों की परवरिश के लिए पिता ने अखबार बेचा, रेहड़ी और चाय की दुकान लगाई, लेकिन पांच भाई-बहनों की पढ़ाई का खर्च जब पूरा नहीं पड़ा तो दोनों बहनों ने ट्यूशन पढ़ाकर अपनी उच्च शिक्षा की फीस जुटाई। इतना ही नहीं छोटे भाई-बहनों की फीस भी अदा की। इसी का नतीजा है कि छोटे भाई का हाल ही में सहायक अध्यापक के लिए चयन हुआ है, जबकि छोटी बहन बीटीसी कर रही है।
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