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किशोर बेटे पर आई दिव्यांग मां और बहन की जिम्मेदारी
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नकुड़ (सहारनपुर)। गांव अघ्याना निवासी अनुसचित जाति के एक पैर से दिव्यांग मांगेराम (50) किसी तरह रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट पाल रहा था। मांगेराम के 17 वर्षीय पुत्र पुष्पेंद्र ने बताया कि विगत 9 मई को उसके पिता ने नकुड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना टेस्ट कराया तो रिपोर्ट पॉजीटिव आ गई। डॉ ने दवाई देकर घर भेज दिया और होम क्वारंटाइन के लिए बोल दिया। पुष्पेंद्र ने बताया कि 13 मई को उसके पिता की हालत बिगड़ी तो वह लोग उन्हें लेकर तुरंत सीएचसी पहुंचे। जहां डाक्टरों ने हालत गंभीर होने पर उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी के लिए रेफर कर दिया। बताया कि 14 मई को वहां उपचार के दौरान उसके पिता की मौत हो गई। घर में वही अकेले कमाने वाले थे। उसकी मां सुमन भी दोनों पैरों से दिव्यांग है। पुष्पेंद्र 12 वीं का छात्र है तथा एक छोटी बहन पुष्पांजलि (16) है। आमदनी का कोई जरिया उनके पास नहीं है। मकान भी आधा अधूरा पड़ा है। मांगेराम के जाने के बाद परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बेटे पुष्पेंद्र पर अपनी पढ़ाई के साथ ही परिवार के गुजर बसर की जिम्मेदारी भी आ पड़ी है।
पत्नी और दो बच्चों के रोजी रोटी का संकट
छुटमलपुर। मुजफ्फराबाद ब्लाक के गांव गदरहेड़ी निवासी नवीन गोयल (32) पुत्र फूल सिंह इंडेन गैस एजेंसी पर डिलीवरी मैन का काम करते थे। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में उन्हें बुखार हुआ। परिजन उन्हें सहारनपुर जिला अस्पताल ले गए। जहां उन्हें कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। हालत बिगड़ने पर उन्हें हरियाणा के जगाधरी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां 10 मई को उनकी मौत हो गई।
नवीन की मौत के बाद उसकी पत्नी कामेश उर्फ रीना और दो छोटे बच्चों गोरी (12) और कन्हैया (9) के सामने भरण पोषण का संकट खड़ा हो गया। पिता कमा कर लाते थे तो परिवार की गुजर बसर होती थी। गोरी कक्षा आठ तथा कन्हैया कक्षा तीन में पढ़ता है। रीना बताती है कि जो जमा पूंजी थी, वह तो खत्म हो ही गई घर में रखा अनाज तक बेचकर बीमारी में लगा दिया था। परिवार के पास आय का कोई साधन नहीं है। जमीन भी उनके पास नहीं है। ऐसे में दो वक्त की रोटी जुटानी भी मुश्किल हो रही है। घर के नाम पर भी टीन शेड पड़ा है।
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चिह्नित हुए हैं ऐसे 15 बच्चे
सहारनपुर। कोरोना काल में जिन बच्चों के माता-पिता का निधन हो गया है या फिर माता पिता में से किसी एक का निधन हुआ है, उनको प्रोबेशन विभाग भी चिह्नित कर रहा है। जिले में अभी तक ऐसे 15 बच्चे चिह्नित हुए हैं, जिनके सिर से माता पिता का साया उठ चुका है। इसके अलावा 288 बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता या पिता किसी एक की मृत्यु हो चुकी है।
अपील
कोरोना महामारी ने कई बच्चों से उनके माता पिता को छीन लिया है। प्रदेश सरकार इनके प्रति संवेदनशील दिखाई देती है। बेसहारा बच्चों के
भरण पोषण को लेकर भी घोषणा की गई है। अमर उजाला ऐसे बच्चों की पहचान का अभियान शुरू कर रहा है। हम सरकार और ऐसे जरूरतमंद बच्चों के बीच सेतु बनकर उन्हें मदद दिलवाने का प्रयास करेंगे। आपको अपने आसपास ऐसे बच्चों के बारे में कोई जानकारी हो तो कृपया हमें 9675899767 पर व्हाट्सएप के जरिये बताएं, अथवा saharanpurbureau@mrt.amarujala.com पर ई-मेल करें।
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पत्नी और दो बच्चों के रोजी रोटी का संकट
छुटमलपुर। मुजफ्फराबाद ब्लाक के गांव गदरहेड़ी निवासी नवीन गोयल (32) पुत्र फूल सिंह इंडेन गैस एजेंसी पर डिलीवरी मैन का काम करते थे। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में उन्हें बुखार हुआ। परिजन उन्हें सहारनपुर जिला अस्पताल ले गए। जहां उन्हें कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। हालत बिगड़ने पर उन्हें हरियाणा के जगाधरी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां 10 मई को उनकी मौत हो गई।
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नवीन की मौत के बाद उसकी पत्नी कामेश उर्फ रीना और दो छोटे बच्चों गोरी (12) और कन्हैया (9) के सामने भरण पोषण का संकट खड़ा हो गया। पिता कमा कर लाते थे तो परिवार की गुजर बसर होती थी। गोरी कक्षा आठ तथा कन्हैया कक्षा तीन में पढ़ता है। रीना बताती है कि जो जमा पूंजी थी, वह तो खत्म हो ही गई घर में रखा अनाज तक बेचकर बीमारी में लगा दिया था। परिवार के पास आय का कोई साधन नहीं है। जमीन भी उनके पास नहीं है। ऐसे में दो वक्त की रोटी जुटानी भी मुश्किल हो रही है। घर के नाम पर भी टीन शेड पड़ा है।
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चिह्नित हुए हैं ऐसे 15 बच्चे
सहारनपुर। कोरोना काल में जिन बच्चों के माता-पिता का निधन हो गया है या फिर माता पिता में से किसी एक का निधन हुआ है, उनको प्रोबेशन विभाग भी चिह्नित कर रहा है। जिले में अभी तक ऐसे 15 बच्चे चिह्नित हुए हैं, जिनके सिर से माता पिता का साया उठ चुका है। इसके अलावा 288 बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता या पिता किसी एक की मृत्यु हो चुकी है।
अपील
कोरोना महामारी ने कई बच्चों से उनके माता पिता को छीन लिया है। प्रदेश सरकार इनके प्रति संवेदनशील दिखाई देती है। बेसहारा बच्चों के
भरण पोषण को लेकर भी घोषणा की गई है। अमर उजाला ऐसे बच्चों की पहचान का अभियान शुरू कर रहा है। हम सरकार और ऐसे जरूरतमंद बच्चों के बीच सेतु बनकर उन्हें मदद दिलवाने का प्रयास करेंगे। आपको अपने आसपास ऐसे बच्चों के बारे में कोई जानकारी हो तो कृपया हमें 9675899767 पर व्हाट्सएप के जरिये बताएं, अथवा saharanpurbureau@mrt.amarujala.com पर ई-मेल करें।