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एमओयू के सहारे पार होगी स्मार्ट सिटी की बाधा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 08 Jun 2016 12:07 AM IST
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Ambala road suggest the smart people in the camp.
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर स्मार्ट सिटी की होड़ में शामिल सहारनपुर अब तीसरे चरण में अपनी जगह बनाने और अपनी रैंकिंग को सुधारने के लिए इस योजना के सबसे अहम पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) को जरिया बनाया है।
पुुरानी खामियों को दुरुस्त करने के लिए नगर निगम ने शहर के विकास के लिए आवश्यक हर क्षेत्र में निजी संस्थाओं और औद्योगिक संस्थानों से करार कर लिया है।
अब तक शहर के विकास के लिए आवश्यक 19 समझौते किए जा चुके हैं। अलग-अलग संस्थाओं से नगर निगम की मेमोरेंडम ऑफ अंडरटेकिंग (एमओयू) हो चुकी है।
माना जा रहा है कि एक सप्ताह में कुछ और एमओयू पर हस्ताक्षर संभव है। जन सहभागिता से उत्साहित सहारनपुर को अब एमओयू के जरिये स्मार्ट सिटी की बाधा पार करने की उम्मीद है।
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केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय की स्मार्ट सिटी योजना में जगह बनाने की कवायद में जुटेे सहारनपुर ने तीसरे चरण में जगह बनाने के लिए अपनी तैयारी लगभग पूरी कर ली है।
शहर में गुणवत्तापरक शिक्षा, रोजगार, सफाई, बाढ़ नियंत्रण के अलावा शहर को स्मार्ट सिटी के प्रति जागरूक करने के लिए नगर निगम ने जन सहभागिता के तहत संस्थाओं से करार किए हैं।
दरअसल, पहले चरण में नगर निगम के प्रस्ताव में शहर की इन जरूरतों को पूरा करने की बात की गई थी। मगर, एक भी मामले में एमओयू किसी तरह का समझौता नहीं होने पर यह बात स्पष्ट नहीं थी कि यह काम किए कैसे जाएंगे।
स्मार्ट सिटी की पहली जरूरत जनसहभागिता है और यही कारण है कि प्रोजेक्ट में पीपीपी मॉडल को लागू किया है। उसी क्रम में नगर निगम ने अब तक 19 करार किए हैं।
इसमें नगर निगम इन सभी संस्थाओं और संस्थानों को सिंगल विंडों के जरिये सुविधाएं प्रदान करेगा। इसमें बिजली कनेक्शन से लेकर विभिन्न मंत्रालयों की एनओसी भी नगर निगम अपने स्तर से सिंगल विंडो के माध्यम से कराएगा।
स्मार्ट सिटी के लिए मिलेंगे नंबर ःस्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शहरों की योजनाओं के आधार पर उन्हें नंबर दिए जाने हैं और इसके बाद उनकी रैंकिंग तय होगी। पहले चरण के चयन में सहारनपुर को पीपीपी मॉडल में कोई नंबर नहीं मिला था।
ऐसे में पीपीपी के तहत विकास योजनाओं और जनसहभागिता के लिए इस बार नंबर मिल सकता है। ऐसे में सहारनपुर की रैंकिंग में सुधार होगा।
करार करने वालों को टैक्स में छूट ःशहर की जरूरतों को पूरा करने और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में एमओयू करने वाले संस्थाओं को नगर निगम टैक्स में छूट देगा।
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद नगर निगम इन इमारतों पर लगने वाले टैक्स में छूट करने का प्रावधान कर रहा है। हालांकि इस संबंध में अब तक किसी तरह का निर्णय नहीं लिया गया है।
नगरायुक्त डा. नीरज शुक्ला ने बताया कि स्मार्ट सिटी के लिए पीपीपी मॉडल बेहद जरुरी है। अब तक 19 संस्थाओं ने नगर निगम के साथ शहर के विकास में योगदान का करार किया है। प्रोजेक्ट्स के लिए सिंगल विंडो सुविधा लागू करेंगे।
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पुुरानी खामियों को दुरुस्त करने के लिए नगर निगम ने शहर के विकास के लिए आवश्यक हर क्षेत्र में निजी संस्थाओं और औद्योगिक संस्थानों से करार कर लिया है।
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अब तक शहर के विकास के लिए आवश्यक 19 समझौते किए जा चुके हैं। अलग-अलग संस्थाओं से नगर निगम की मेमोरेंडम ऑफ अंडरटेकिंग (एमओयू) हो चुकी है।
माना जा रहा है कि एक सप्ताह में कुछ और एमओयू पर हस्ताक्षर संभव है। जन सहभागिता से उत्साहित सहारनपुर को अब एमओयू के जरिये स्मार्ट सिटी की बाधा पार करने की उम्मीद है।
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केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय की स्मार्ट सिटी योजना में जगह बनाने की कवायद में जुटेे सहारनपुर ने तीसरे चरण में जगह बनाने के लिए अपनी तैयारी लगभग पूरी कर ली है।
शहर में गुणवत्तापरक शिक्षा, रोजगार, सफाई, बाढ़ नियंत्रण के अलावा शहर को स्मार्ट सिटी के प्रति जागरूक करने के लिए नगर निगम ने जन सहभागिता के तहत संस्थाओं से करार किए हैं।
दरअसल, पहले चरण में नगर निगम के प्रस्ताव में शहर की इन जरूरतों को पूरा करने की बात की गई थी। मगर, एक भी मामले में एमओयू किसी तरह का समझौता नहीं होने पर यह बात स्पष्ट नहीं थी कि यह काम किए कैसे जाएंगे।
स्मार्ट सिटी की पहली जरूरत जनसहभागिता है और यही कारण है कि प्रोजेक्ट में पीपीपी मॉडल को लागू किया है। उसी क्रम में नगर निगम ने अब तक 19 करार किए हैं।
इसमें नगर निगम इन सभी संस्थाओं और संस्थानों को सिंगल विंडों के जरिये सुविधाएं प्रदान करेगा। इसमें बिजली कनेक्शन से लेकर विभिन्न मंत्रालयों की एनओसी भी नगर निगम अपने स्तर से सिंगल विंडो के माध्यम से कराएगा।
स्मार्ट सिटी के लिए मिलेंगे नंबर ःस्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शहरों की योजनाओं के आधार पर उन्हें नंबर दिए जाने हैं और इसके बाद उनकी रैंकिंग तय होगी। पहले चरण के चयन में सहारनपुर को पीपीपी मॉडल में कोई नंबर नहीं मिला था।
ऐसे में पीपीपी के तहत विकास योजनाओं और जनसहभागिता के लिए इस बार नंबर मिल सकता है। ऐसे में सहारनपुर की रैंकिंग में सुधार होगा।
करार करने वालों को टैक्स में छूट ःशहर की जरूरतों को पूरा करने और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में एमओयू करने वाले संस्थाओं को नगर निगम टैक्स में छूट देगा।
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद नगर निगम इन इमारतों पर लगने वाले टैक्स में छूट करने का प्रावधान कर रहा है। हालांकि इस संबंध में अब तक किसी तरह का निर्णय नहीं लिया गया है।
नगरायुक्त डा. नीरज शुक्ला ने बताया कि स्मार्ट सिटी के लिए पीपीपी मॉडल बेहद जरुरी है। अब तक 19 संस्थाओं ने नगर निगम के साथ शहर के विकास में योगदान का करार किया है। प्रोजेक्ट्स के लिए सिंगल विंडो सुविधा लागू करेंगे।