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नो एंट्री में चल रहा एंट्री का खेल
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 04 Feb 2016 12:40 AM IST
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केस नंबर एक :
दो सप्ताह पहले नवाब गंज चौक के पास ट्रक की चपेट में आने से साइकिल सवार डीपीएस के छात्र की मौत। विरोध में जाम, हंगामा।
केस नंबर दो :
पांच माह पहले एमएस कॉलेज के बाहर ओवरलोड ट्रक की चपेट में आने से बच्ची की मौत। विरोध में ट्रक में तोड़फोड़।
केस नंबर तीन :
चार माह पहले सहारनपुर चिलकाना रोड पर ट्रैक्टर ट्राली की चपेट में आने पर बाइक सवार किशोर की मौत।
केस नंबर चार :
सात माह पहले नुमाईश चौकी के पास ही ओवरलोड ट्रक की चपेट में आकर व्यापारी की मौत। विरोध में तोड़फोड़ हंगामा, घेराव।
ऐसे ही कई दर्जनों हादसों और इनमें होने वाली मौतों को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से नो एंट्री का शेड्यूल तो बदल दिया गया। हालांकि नो एंट्री का अनुपालन सिर्फ कागजों पर ही चल रहा है। सड़क पर तो नो एंट्री में एंट्री कराने का खेल अब भी जारी है।
लगातार हो रहे हादसों में दम तोड़ती जिंदगियों से कोई सबक नहीं लिया गया। नो एंट्री के अनुपालन का सच देखने के लिए अमर उजाला टीम ने सुबह नौ से बारह बजे तक अलग अलग जगहों का भ्रमण कर वस्तु स्थिति को जानने की कोशिश की, तो हालात हैरान कराने वाले सामने आए।
नो एंट्री में ही ओवरलोड और भारी वाहनों की एंट्री के अलावा खाकी की सेटिंग से वाहनों की अनुमति जैसे दृश्य सामने देखने को मिले।
सेटिंग के लिए ट्रक में भी बैठा होमगार्ड ः दिल्ली रोड पर एक होमगार्ड वाहनों को रोककर उनसे सेटिंग चार्ज लेने में लगा रहा। कुछ ट्रकों में तो वह खुद ही ड्राइविंग सीट पर बैठता रहा।
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बराबर में नो एंट्री का बोर्ड, सामने कराते रहे एंट्री
विश्वकर्मा चौक का नजारा भी अलग ही रहा। यहां बराबर में तो नो एंट्री का बोर्ड लगा रहा और सामने से भारी और अन्य ओवरलोड वाहनों को आराम से एंट्री मिलती रही।
नवाब गंज क्षेत्र में अब भी भारी वाहनों का डर
नवाब गंज क्षेत्र से लेकर नुमाईश कैंप तक का इलाका ऐसा रहा है जहां ओवरलोड और अन्य भारी वाहनों को लेकर सबसे अधिक तोड़फोड़ हंगामे तक हुए हैं। मगर, यहां भी बसों से लेकर ट्रकों तक नो एंट्री टाइम में एंट्री पा रहे हैं। इस क्षेत्र में सुबह से दोपहर तक हजारों स्कूली बच्चे गुजरते हैं।
पुलिस के सामने गुजरते रहे ओवरलोड वाहन
सहारनपुर-दिल्ली हाईवे पर हसनपुर चौकी के सामने ही ओवरलोड वाहन आराम से आते जाते रहे। हसनपुर तिराहे पर एक यातायात कर्मचारी गुजरने वाले ट्रकों की एंट्री कर रहा था। इस एंट्री का मकसद शायद इस वाहन को आगे हर अवरोध से बचाना रहा।
खुद करेंगे रैंडम चेकिंग
एसपी सिटी महेंद्र सिंह का कहना है कि नो एंट्री में भारी वाहनों के प्रवेश से हादसों को देखते हुए ही इसके शेड्यूल में बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस की टीमें काफी हद तक सुधरी हैं। मगर, होमगार्ड स्तर पर अभी दिक्कतें हैं। इन्हें दूर कराया जाएगा। नो एंट्री के अनुपालन की खुद रैंडम जांच की जाएगी।
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दो सप्ताह पहले नवाब गंज चौक के पास ट्रक की चपेट में आने से साइकिल सवार डीपीएस के छात्र की मौत। विरोध में जाम, हंगामा।
केस नंबर दो :
पांच माह पहले एमएस कॉलेज के बाहर ओवरलोड ट्रक की चपेट में आने से बच्ची की मौत। विरोध में ट्रक में तोड़फोड़।
केस नंबर तीन :
चार माह पहले सहारनपुर चिलकाना रोड पर ट्रैक्टर ट्राली की चपेट में आने पर बाइक सवार किशोर की मौत।
केस नंबर चार :
सात माह पहले नुमाईश चौकी के पास ही ओवरलोड ट्रक की चपेट में आकर व्यापारी की मौत। विरोध में तोड़फोड़ हंगामा, घेराव।
ऐसे ही कई दर्जनों हादसों और इनमें होने वाली मौतों को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से नो एंट्री का शेड्यूल तो बदल दिया गया। हालांकि नो एंट्री का अनुपालन सिर्फ कागजों पर ही चल रहा है। सड़क पर तो नो एंट्री में एंट्री कराने का खेल अब भी जारी है।
लगातार हो रहे हादसों में दम तोड़ती जिंदगियों से कोई सबक नहीं लिया गया। नो एंट्री के अनुपालन का सच देखने के लिए अमर उजाला टीम ने सुबह नौ से बारह बजे तक अलग अलग जगहों का भ्रमण कर वस्तु स्थिति को जानने की कोशिश की, तो हालात हैरान कराने वाले सामने आए।
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नो एंट्री में ही ओवरलोड और भारी वाहनों की एंट्री के अलावा खाकी की सेटिंग से वाहनों की अनुमति जैसे दृश्य सामने देखने को मिले।
सेटिंग के लिए ट्रक में भी बैठा होमगार्ड ः दिल्ली रोड पर एक होमगार्ड वाहनों को रोककर उनसे सेटिंग चार्ज लेने में लगा रहा। कुछ ट्रकों में तो वह खुद ही ड्राइविंग सीट पर बैठता रहा।
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बराबर में नो एंट्री का बोर्ड, सामने कराते रहे एंट्री
विश्वकर्मा चौक का नजारा भी अलग ही रहा। यहां बराबर में तो नो एंट्री का बोर्ड लगा रहा और सामने से भारी और अन्य ओवरलोड वाहनों को आराम से एंट्री मिलती रही।
नवाब गंज क्षेत्र में अब भी भारी वाहनों का डर
नवाब गंज क्षेत्र से लेकर नुमाईश कैंप तक का इलाका ऐसा रहा है जहां ओवरलोड और अन्य भारी वाहनों को लेकर सबसे अधिक तोड़फोड़ हंगामे तक हुए हैं। मगर, यहां भी बसों से लेकर ट्रकों तक नो एंट्री टाइम में एंट्री पा रहे हैं। इस क्षेत्र में सुबह से दोपहर तक हजारों स्कूली बच्चे गुजरते हैं।
पुलिस के सामने गुजरते रहे ओवरलोड वाहन
सहारनपुर-दिल्ली हाईवे पर हसनपुर चौकी के सामने ही ओवरलोड वाहन आराम से आते जाते रहे। हसनपुर तिराहे पर एक यातायात कर्मचारी गुजरने वाले ट्रकों की एंट्री कर रहा था। इस एंट्री का मकसद शायद इस वाहन को आगे हर अवरोध से बचाना रहा।
खुद करेंगे रैंडम चेकिंग
एसपी सिटी महेंद्र सिंह का कहना है कि नो एंट्री में भारी वाहनों के प्रवेश से हादसों को देखते हुए ही इसके शेड्यूल में बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस की टीमें काफी हद तक सुधरी हैं। मगर, होमगार्ड स्तर पर अभी दिक्कतें हैं। इन्हें दूर कराया जाएगा। नो एंट्री के अनुपालन की खुद रैंडम जांच की जाएगी।