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विधि पूर्वक किए श्राद्ध से होती पितरों की तृप्ति

Mon, 20 Sep 2021 11:38 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 20 Sep 2021 11:38 PM IST
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The fulfillment of ancestors would have been done by ritually performed Shradh.
सहारनपुर। विधि पूर्वक किए श्राद्ध से पितरों की तृप्ति होती है। श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को यश और कीर्ति प्राप्त होती है। श्राद्ध करने का उत्तम समय सुबह आठ से दोपहर 12 बजे तक है।
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ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित सिद्धपीठ शिव बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता आचार्य रोहित वशिष्ठ और श्री बालाजी धाम के संस्थापक अतुल जोशी महाराज ने बताया कि देश काल में विधि पूर्वक और श्रद्धा से पितरों के लिए किए कार्यों को श्राद्ध कहा जाता है। देश का अर्थ स्थान है। काल का अर्थ समय है और पात्र का अर्थ वह ब्राह्मण है। तीनों को भली-भांति समझकर ही श्राद्ध करना चाहिए। श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को आयु, पुत्र धन-धान्य और यश प्रदान करता होता है। श्राद्ध में कमी रहने पर श्राद्ध करने वाले को कष्ट भी भोगना पड़ता है।
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इन बातों का रखें ध्यान
भोजन पत्ते पर रखकर गाय और कुत्ते को खिलाएं।
भूमि या छत पर डालकर कोआ के लिए भोजन डालें।
पत्ते पर रखकर देवताओं के लिए अन्न निकाले और गाय को खिलाएं।
चींटी के लिए भी भोजन निकालें।
अग्नि के लिए भोजन निकालकर अग्नि में डाल दें और शेष अन्न गाय को खिलाएं।
इन सबके बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं।
ऐसे करें श्राद्ध
तिल और कुशा हाथ में लेकर लेकर संकल्प लें। चांदी का दान और भगवान के नाम का जप करें। दूध, गंगाजल, शहद, फल, दही, धान, तिल गेहूं, मूंग और सरसों का तेल शुभ माने गए हैं। तुलसी पत्र का प्रयोग भी श्राद्ध में अवश्य करना चाहिए। तुलसी की गंध से पितृगण प्रसन्न होते हैं। फलों में बेल, अनार, आंवला, नारियल, खजूर, अंगूर और केले का इस्तेमाल करें। श्राद्ध में चंदन की सुगंध होती है।
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ब्राह्मण को कराएं भोजन
शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध में हर किसी को भोजन कराने का विधान नहीं है। पवित्र, बुद्धिमान, सदाचारी, संध्या वंदन करने वाले ब्राह्मण को ही भोजन कराया जाए। इनमें नियमित गायत्री मंत्र का जप करने वाले ब्राह्मण को सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

इस तरह के भोजन से करें परहेज
जिस भोजन में बाल गिर गया हो, जिस अन्न में कीड़े पड़ गए हों, जिस भोजन पर कुत्ते की दृष्टि पड़ गई हो। बासी, दुर्गंध युक्त भोजन पर पहने हुए वस्त्र की हवा लग जाए और वह श्राद्ध में वर्जित है। इसके अलावा राजमा, साबुत उड़द, मसूर, अरहर, गाजर, लौकी, बैंगन, शलगम, हींग प्याज, लहसुन, काला नमक, काला जीरा, सिंघाड़ा, जामुन सुपारी सेवन भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा लोहे के बर्तन में श्राद्ध का भोजन ब्राह्मण को न परोसा जाए। इसके लिए सोना, चांदी, कांसा, तांबा के अलावा मिट्टी के बर्तन में भोजन कराएं।
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